चीन की बढ़ेगी टेंशन: ट्रंप ने बनाया नया ‘ट्रेडिंग ब्लॉक’, अब दुनिया को मिनरल्स के लिए ड्रैगन की जरूरत नहीं!

Critical Minerals: अमेरिका ने दुनिया के मिनरल मार्केट पर कंट्रोल करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है और एक नया ट्रेडिंग ग्रुप बनाया है. प्रेसिडेंट ट्रंप के प्रोजेक्ट वॉल्ट और 10 अरब डॉलर के फंड का मकसद चीन को इस खेल से बाहर करना है. जापान और यूरोप के भी इस पहल में शामिल होने से, क्या आखिरकार फाइटर जेट और स्मार्टफोन की सप्लाई चेन में चीन का दबदबा खत्म हो जाएगा?

Critical Minerals: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के एकाधिकार (Monopoly) को चुनौती देने के लिए एक बड़ा दांव खेला है. बुधवार को ट्रंप प्रशासन ने घोषणा की कि वे अपने मित्र देशों के साथ मिलकर एक ‘क्रिटिकल मिनरल्स ट्रेडिंग ब्लॉक’ (व्यापारिक गुट) बनाएंगे. इसका सीधा मकसद उन जरूरी खनिजों (Minerals) पर चीन के कब्जे को तोड़ना है, जो स्मार्टफोन से लेकर फाइटर जेट्स तक बनाने में काम आते हैं.

क्या है ट्रंप का प्लान और क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के अनुसार, पिछले एक साल में चले ट्रेड वॉर (व्यापार युद्ध) ने यह साफ कर दिया है कि दुनिया इन खनिजों के लिए चीन पर कितनी ज्यादा निर्भर है. वेंस ने कहा कि अब समय आ गया है जब पश्चिमी देशों को ‘सेल्फ-रिलायंस’ (आत्मनिर्भरता) दिखानी होगी.

प्लान के खास पॉइंट्स:

प्राइस गारंटी: वेंस ने बताया कि इस ग्रुप के अंदर खनिजों की कीमतें स्थिर रखी जाएंगी ताकि चीन भविष्य में कीमतों के साथ छेड़छाड़ न कर सके.

टैरिफ का इस्तेमाल: अमेरिका टैरिफ (आयात शुल्क) का इस्तेमाल करके एक न्यूनतम कीमत तय करेगा, ताकि चीन सस्ते दाम पर माल डंप करके दूसरी कंपनियों को बर्बाद न कर पाए.

अमेरिका की ताकत: इस ब्लॉक का मकसद अमेरिकी इंडस्ट्रियल पावर को सुरक्षित करना और सहयोगी देशों में उत्पादन बढ़ाना है.

प्रोजेक्ट वॉल्ट: 10 बिलियन डॉलर का बड़ा निवेश

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने ‘प्रोजेक्ट वॉल्ट’ का भी ऐलान किया है. यह दुर्लभ खनिजों (Rare Earth Elements) का एक रणनीतिक भंडार होगा. इसे अमेरिकी एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक से 10 बिलियन डॉलर के लोन और लगभग 1.67 बिलियन डॉलर के प्राइवेट निवेश से तैयार किया जाएगा. इसके अलावा, सरकार ने ‘USA Rare Earth’ नाम की कंपनी में 1.6 बिलियन डॉलर का निवेश किया है.

डेटा की बात: पेंटागन ने पिछले एक साल में माइनिंग (खनन) को बढ़ावा देने के लिए करीब $5 बिलियन खर्च किए हैं. चीन फिलहाल दुनिया की 70 प्रतिशत माइनिंग और 90 प्रतिशत प्रोसेसिंग को कंट्रोल करता है.

कौन-कौन है अमेरिका के साथ और कौन रह गया पीछे?

वॉशिंगटन में हुई इस बड़ी मीटिंग की मेजबानी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने की. इसमें कई यूरोपीय, एशियाई और अफ्रीकी देशों ने हिस्सा लिया.

साथ आए देश: जापान, यूरोपीय संघ (EU) और मैक्सिको ने अमेरिका के साथ मिलकर काम करने और ‘प्राइस फ्लोर’ (न्यूनतम कीमत) तय करने पर सहमति जताई है. जापान के मंत्री इवाओ होरी ने कहा कि वे इस पहल के साथ पूरी तरह से खड़े हैं.

इन्होंने बनाई दूरी: हैरान करने वाली बात यह रही कि ग्रीनलैंड और डेनमार्क इस मीटिंग में शामिल नहीं हुए. ट्रंप की ग्रीनलैंड को खरीदने की इच्छा और उनकी बयानबाजी की वजह से सहयोगियों के बीच कुछ तनाव भी देखा जा रहा है.

चुनौतियां भी कम नहीं

कोलोराडो स्कूल ऑफ माइन्स के प्रोफेसर इयान लांगे के अनुसार, इस ग्रुप को सफल बनाने के लिए यह सुनिश्चित करना होगा कि सदस्य देश चोरी-छिपे चीन से सस्ता माल न खरीदें. डिफेंस कंपनियों पर तो सरकार लगाम कस सकती है, लेकिन इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बनाने वाली प्राइवेट कंपनियों को चीन से सामान लेने से रोकना मुश्किल होगा.

ट्रंप और शी जिनपिंग की ‘पॉजिटिव’ बातचीत

इस तनाव के बीच, ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने फोन पर लंबी बातचीत की. ट्रंप ने सोशल मीडिया (Truth Social) पर बताया कि बातचीत बहुत शानदार और पॉजिटिव रही.

बातचीत के मुख्य मुद्दे:

  • चीन अमेरिका से और ज्यादा सोयाबीन (करीब 20-25 मिलियन टन) खरीदेगा.
  • चीन अमेरिका से तेल और गैस खरीदने पर भी विचार कर रहा है.
  • दोनों नेताओं ने ताइवान, यूक्रेन युद्ध और ईरान के हालातों पर भी चर्चा की.
  • ट्रंप अप्रैल में चीन की यात्रा पर भी जाने वाले हैं.

शी जिनपिंग ने कहा कि आपसी सम्मान के साथ मुद्दों को सुलझाया जा सकता है और उम्मीद जताई कि 2026 दोनों देशों के रिश्तों में एक नया टर्निंग पॉइंट साबित होगा.

बुधवार को ही अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी के नियंत्रण वाली ‘हाउस’ ने एक बिल पास किया, जिससे सरकारी जमीनों पर माइनिंग करना आसान हो जाएगा. हालांकि, डेमोक्रेट्स और पर्यावरण बचाने वाले ग्रुप्स इसका विरोध कर रहे हैं, लेकिन ट्रंप प्रशासन इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी मान रहा है.

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लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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