चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा की हुई शुरुआत, लाहौर में उद्घाटन

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) की पहली परिवहन परियोजना का रविवार को लाहौर में उद्घाटन किया गया . लाहौर आरेंज लाइन मेट्रो रेल परियोजना का उद्घाटन पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री उस्मान बूज़दार ने किया. इस अवसर पर चीन के अधिकारी भी उपस्थित थे.

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) की पहली परिवहन परियोजना का रविवार को लाहौर में उद्घाटन किया गया . लाहौर आरेंज लाइन मेट्रो रेल परियोजना का उद्घाटन पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री उस्मान बूज़दार ने किया. इस अवसर पर चीन के अधिकारी भी उपस्थित थे.

इसकी लागत 2.2 अरब डॉलर आयी है और यह छह साल में पूरी हुई है. यह लाइन लाहौर शहर के डेरा गुज्जरान को अली टाउने से जोड़ती है और 27 किलो मीटर की है. इस लाइन पर सोमवार से मेट्रो रेल सेवाएं शुरू हो जाएंगी और रोज 250,000 लोग इससे यात्रा कर सकेंगे. चीन ने इस परियाजना को दोनों देशों की मित्रता का प्रतीक और लाहौर के लिए उपहार बताया है.

क्या है सीपीइसी?

चीन ने अपने व्यापक हितों वाली परियोजना ‘वन बेल्ट, वन रोड’ के तहत वर्ष 2015 में सीपीइसी यानी चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर के नाम से एक आर्थिक गलियारे को विकसित करने का फैसला लिया, जिससे पाकिस्तान के आर्थिक और सुरक्षा संबंधी हित भी जुड़े हुए हैं.

इसके निर्माण की पहल के पीछे चीन का यह भी मकसद है कि इसके जरिये यूरोप और अफ्रीका जैसी दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से आसानी संपर्क कायम करते हुए व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा दिया जा सके. सीपीइसी के तहत चीन के पश्चिमोत्तर प्रांत शिंजियांग से पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह तक रोड, रेल और पाइप लाइन के जरिये पहुंच कायम की जा सके.

Also Read: दिल्ली की वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ श्रेणी में बरकरार, सोमवार से सुधार की उम्मीद

यह इकोनॉमिक कॉरिडोर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान के विवादित क्षेत्र बलोचिस्तान होते हुए जायेगा. विविध रिपोर्ट्स के मुताबिक ग्वादर बंदरगाह को इस तरह से विकसित किया जा रहा है, ताकि वह 19 मिलियन टन कच्चे तेल को चीन तक सीधे भेजने में सक्षम होगा.

हालांकि, इस परियोजना की परिकल्पना 1950 के दशक में ही की गयी थी, लेकिन वर्षों तक पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता कायम रहने के कारण इस लक्ष्य को हासिल नहीं किया जा सका. इसके मौजूदा स्वरूप की घोषणा चीन सरकार ने नवंबर, 2014 में की थी और अप्रैल, 2015 में इस दिशा में काम की शुरुआत की गयी.

इस प्रोजेक्ट कीझ लागत कई अरब डॉलर बतायी जा रही है. उम्मीद जतायी जा रही है कि इस आर्थिक गलियारे के निर्माण से पाकिस्तान में होनेवाले विदेशी निवेश की रकम में बढ़ोतरी होगी.

Posted By – Pankaj Kumar Pathak

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: Agency

Published by: Prabhat Khabar

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >