ट्रंप ने ईरान के प्रदर्शनकारियों से कहा- मदद रास्ते में है, तनाव फिर बढ़ने की आशंका, 2500 से ज्यादा मौतें

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर हिंसक कार्रवाई के बीच अमेरिका और ईरान के रिश्तों में भारी तनाव बढ़ गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनियों, तेहरान की धमकियों, यूरोपीय प्रतिबंधों और मानवाधिकार उल्लंघनों ने हालात को और गंभीर बना दिया है. क्षेत्र में बड़े टकराव की आशंका गहराती जा रही है.

By Govind Jee | January 14, 2026 1:19 PM

अमेरिका और ईरान के बीच पिछले 18 दिनों से चल रहे तनाव तेजी से बढ़ते जा रहा है. पूरे ईरान में देशव्यापी सरकार विरोधी प्रदर्शनों से कारण प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई हुई. जिसके बाद पूरे देश में हिंसा बढ़ गई. तनाव इतना बढ़ गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की चेतावनी और तेहरान की ओर से आए तीखे बयानबाजी हमले हुए. इस पूरे घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति पैदा कर दिया.

ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर राजनीतिक उथल-पुथल को बढ़ावा देने, हिंसा भड़काने और देश की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और देश की सुरक्षा को कमजोर करने का आरोप लगाया.  ईरान में प्रदर्शनकारियों को बेरहमी से ईरानी सरकार ने कुचला. मानवाधिकार संगठनों ने भी इसकी पुष्टि की है. इसके बाद फिर से देश में तनाव बढ़ने की संभावनाएं बढ़ गई है.

अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, अब तक पूरे ईरान में कम से कम 2500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. बाहर आए हुए आंकड़े को एसोसिएटेड प्रेस ने भी इसकी पुष्टि की है. ईरानी की सरकारी टीवी ने भी जारी जनहानि की बात स्वीकार की है. वहीं इस हिंसा को शहीद फाउंडेशन के एक अधिकारी ने अशांति के दौरान बहुत सारे शहीदों का जिक्र किया है.

ट्रंप ईरान को लगातार चेतावनी दे रहे हैं

ट्रंप ईरान को पिछले कई दिनों से लगातार ट्रंप को चेतावनी दे रहे हैं. ट्रंप अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुश सोशल पर पोस्ट किया और उन्होंने कहा कि ईरानी अधिकारियों के साथ होने वाली सभी बैठकें हमने प्रदर्शनकारियों की बेमतलब हत्या रुकने तक रद्द कर दिया है और लिखा कि मदद रास्ते में है. ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों को को आंदोलन जारी रखने और ईरान के संस्थानों पर कब्जा करने के भी अपील की. वहीं इस पोस्ट के बाद तेहरान ने इन टिप्पणियों को ईरान के अंदरूनी मामलों पर खुला हस्तक्षेप बताया. 

ट्रंप ने इसके बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उनका प्रशासन हत्याओं के पैमाने की पुष्टि करने की कोशिश कर रहा है और उसी के आधार पर कदम उठाएगा. उन्होंने कहा कि ईरान में हुए प्रदर्शनकारियों की हुई हत्याएं काफी बड़ी लग रही हैं लेकिन पूरी तरह पता नहीं है. ट्रंप ने ईरानी नेताओं से मनावता दिखाने की भी दिखाने की अपील की है और आगे खून-खराबा होने पर चेतावनी भी दिया है कि तेहरान प्रदर्शनकारियों के साथ ठीक से पेश आए.

एक्सियोस के अनुसार, अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने बाद में यह भी संकेत दिया कि ट्रंप द्वारा कही गई मदद में सैन्य या साइबर कारवाई भी शामिल हो सकती है. जिसके बाद वाशिंगटन के अगले कदमों को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं. इसके बाद विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बंद कमरे की बैठक में कहा है कि प्रशासन प्रदर्शनकारियों के समर्थन में गैर-सैन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहा है. जिस पर साइबर हमले भी हो सकते हैं. 

तेहरान ने भी दिया ट्रंप को कड़ी चेतावनी

तेहरान ने भी ट्रंप के इस बयान के बाद तीखी प्रतिक्रिया दी है. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी ने अमेरिका और इजरायल को ईरान के लोगों को असली हत्यारा बताया. ट्रंप के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का नाम लेते हुए उन पर पलटवार किया.  एक्सियोस कि रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस के दूत स्टीव विटकॉक ने ईरान के निर्वासित युवराज रजा पहलवी की सीक्रेट मुलाकात हुई.

ईरान में चल रहे इस कथित तौर पर प्रदर्शनों की शुरुआत के बाद ट्रंप प्रशासन और ईरानी विपक्षी नेताओं के बीच पहली उच्च स्तरीय बातचीत हो सकती है. रजा पहलवी 1979 की इस्लामी क्रांति में अपदस्थ किए गए शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे हैं. पहलवी ने ईरान के मौजूदा शासन गिरने की स्थिति में खुद को एक संभावित अंतरिम नेता के रूप में पेश किया है. जैसे-जैसे ईरान में कूटनीतिक दबाव बढ़ रहा है क्षेत्रीय और विश्व भर की ताकत हालात को और ना बिगड़े इसे रोकने की कोशिश में जुटी हैं. 

ईरान पर बढ़ रहा वैश्विक तनाव 

कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल-थानी ने अली लारीजानी से बातचीत की और तनाव कम करने व शांतिपूर्ण समाधान के लिए दोहा इस मुश्किल वक्त में खड़ा रहेगा. कतर ने कहा कि उन्हें क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया. वहीं यूरोप में ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों की घोषणा की है. ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने कहा है कि लंदन वित्त, ऊर्जा और परिवहन समेत प्रमुख क्षेत्रों को निशाना बनाते हुए पूरे और अतिरिक्त प्रतिबंध लगाएगा. वहीं यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लेयेन न कहा है कि दमन में शामिल ईरानी अधिकारियों पर नए प्रतिबंध लगाए जाएंगे. 

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने आशंका जताई है कि ईरान में बढ़ते हुए असहमति को कुचलने के लिए अधिकारी त्वरित सुनवाई और फांसी का सहारा ले सकते हैं. संगठन ने मोहरबेह यानी ईश्वर के खिलाफ युद्ध जैसे आरोपों का हवाला दिया है, जिनमें मौत की सजा का प्रावधान है. ईरान ह्यूमन राइट्स ने 26 वर्षीय इरफान सुल्तानी का मामला उठाया है, जिन्हें कराज में गिरफ्तारी के बाद कथित तौर पर मौत की सजा सुनाई गई है.

इससे आशंका है कि कुछ ही दिनों में फांसी की प्रक्रिया शुरू हो सकती है. फ्रांस ने ईरानी दूत को तलब किया है. वहां के विदेश मंत्री जां-नोएल बारो ने प्रदर्शनकारियों पर दमन को असहनीय, असह्या और अमानवीय बताते हैं. जर्मनी ने भी इस सूची में शामिल हो गया है. बर्लिन में ईरान के राजदूत को तलब कर हिंसक कारवाई का विरोध जताया गया और तेहरान ने अपने ही नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग बंद करने तथा उनके बुनियादी अधिकारों का सम्मान करने की अपील की गई.

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