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एक समान कानून कोड का दिया तर्क

रेणुका रे (1904-1997) भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सामाजिक एवं राजनीतिक रूप से सक्रिय कार्यकर्ता रहीं रेणुका रे 1946-47 के दौरान संविधान सभा की सदस्य रहीं. वर्ष 1957 से 1967 तक वे मालदा लोकसभा से सांसद रहीं. रेणुका रे एक मुखर स्वतंत्रता सेनानी थीं. इनके पिता सतीश चंद्र मुखर्जी एक आइसीएस अधिकारी थे. इनकी मां चारुलता […]

रेणुका रे (1904-1997)

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सामाजिक एवं राजनीतिक रूप से सक्रिय कार्यकर्ता रहीं रेणुका रे 1946-47 के दौरान संविधान सभा की सदस्य रहीं. वर्ष 1957 से 1967 तक वे मालदा लोकसभा से सांसद रहीं. रेणुका रे एक मुखर स्वतंत्रता सेनानी थीं. इनके पिता सतीश चंद्र मुखर्जी एक आइसीएस अधिकारी थे.

इनकी मां चारुलता मुखर्जी एक सामाजिक कार्यकर्ता और अखिल भारतीय महिला सम्मेलन के सदस्य थीं. पढ़ाई के लिए रेणुका रे कुछ समय तक लंदन में रहीं और केंसिंग्टन हाइ स्कूल में पढ़ाई की. फिर उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से बीए किया. वहां इन्हें हेराल्ड लास्की, विलियम बेवरिज, क्लेमेंट एटली, इलीन पावर जैसे शिक्षकों का सान्निध्य मिला था. इनकी 16 वर्ष की उम्र में गांधी से मुलाकात हुई. इस मुलाकात का इन पर गहरा प्रभाव पड़ा.

बाद में इन्होंने सत्येंद्र नाथ रॉय से शादी की, इन्होंने वर्ष 1934 में एआइडब्ल्यूसी के कानूनी सचिव के रूप में भारत के महिलाओं के लिए ‘कानूनी विकलांगता’ नामक एक रिपोर्ट प्रस्तुत की. भारत में कानून के राज से पहले महिला की स्थिति बहुत खराब थी. कानूनी समीक्षा में इनकी प्रतिबद्धता को जोड़ा गया. रेणुका ने एक समान कानून कोड का तर्क दिया, जिसमें उन्होंने बताया कि यहां महिलाओं की स्थिति दुनिया में सबसे अधिक खराब है.

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