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सैंथिया : तीन महिला प्रत्याशियों के बीच होगी कांटे की टक्कर!

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
बीरभूम के सैंथिया विधानसभा सीट पर तीन देवियों का है मुकाबला
बीरभूम के सैंथिया विधानसभा सीट पर तीन देवियों का है मुकाबला
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सैंथिया (मुकेश तिवारी): बीरभूम जिले के सैंथिया विधानसभा सीट से इस बार तृणमूल कांग्रेस, भाजपा और माकपा की महिला प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर होने के आसार हैं. तृणमूल कांग्रेस ने इस बार भी वर्तमान विधायक नीलाबाती साहा को दूसरी बार प्रत्याशी घोषित किया है.

भाजपा ने भी पिछले चुनाव में हार चुकीं प्रिया साहा को फिर से उम्मीदवार बनाया है. संयुक्त मोर्चा की ओर से माकपा ने मौसमी कनाई को प्रत्याशी घोषित किया है. सैंथिया सीट पर इस बार तीन महिला उम्मीदवारों के बीच दिलचस्प मुकाबला होने के आसार हैं.

आगामी 29 अप्रैल को यहां पर मतदान होगा और दो मई को मतगणना होगी. मतदान से पूर्व तीनों ही महिला उम्मीदवारों के समर्थन में उनके दल के हेवीवेट नेताओं द्वारा तूफानी रूप से चुनाव प्रचार चलाया गया. इस बार प्रिया साहा को लेकर भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है. तृणमूल भी अपने प्रत्याशी को दोबारा विजयी बनाने की कोशिश में लगी हुई है.

वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव को देखा जाये, तो तृणमूल कांग्रेस की नीलाबाती साहा ने अपने प्रतिद्वंद्वी माकपा के धीरेन बागदी को 38,611 वोट से पराजित किया था. नीलाबाती साहा को 103376 वोट मिले थे, जबकि धीरेन को 64,765 वोट मिले थे. भाजपा की प्रिया साहा को महज 24,029 वोट मिले थे.

वर्ष 2011 के विधानसभा चुनाव में धीरेन बागदी ने तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी परीक्षित बाला को 4,318 वोट से पराजित किया था. इस बार इन तीन मुख्य पार्टी के प्रत्याशियों के अलावा एसयूसीआइ ने नव कुमार दास व बीएसपी ने तारापद बाध्यकर को चुनाव में उतारा है. नीलाबाती साहा स्थानीय प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका भी हैं.

भाजपा प्रत्याशी प्रिया साहा इस बार पूरी ताकत के साथ बीरभूम में परिवर्तन की सरकार लाने की कोशिश कर रही हैं. उनका कहना है कि पश्चिम बंगाल में जिस तरह से विगत 10 वर्षों में विशेषकर बीरभूम जिले में बम और बारूद की ढेर पर लोगों को दहशत में रहना पड़ा है, उससे सैंथिया की जनता निजात पाना चाहती है. यही कारण है कि इस बार यहां परिवर्तन की जीत होगी.

नीलाबाती साहा को ममता के काम पर भरोसा

तृणमूल की निवर्तमान विधायक व प्रत्याशी नीलाबाती साहा विगत 10 वर्षों में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विकास कार्यों को मुद्दा बनाकर अपनी चुनावी नैया पार करना चाहती हैं. उनका कहना है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने महिला सशक्तीकरण को लेकर राज्य में महिलाओं को काफी इज्जत दी है. मैं स्वयं एक महिला प्रत्याशी हूं, विधायक हूं. मैंने क्षेत्र के विकास के लिए हर संभव कार्य किया है.

केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ आवाज बुंद कर रहीं मौसमी

माकपा की मौसमी कनाई भी अपनी चुनावी प्रचार में विशेष रूप से केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की है तथा इसे विशेष मुद्दा बनाया है. राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सैंथिया विधानसभा सीट पर इस बार लड़ाई काफी रोमांचक होगी, क्योंकि तृणमूल विधायक पहले से ही इलाके से परिचित हैं और जनता के बीच में हैं. लेकिन इलाके के विकास कार्य को लेकर स्थानीय मतदाताओं में खासी नाराजगी भी है. इसका लाभ भाजपा या माकपा प्रत्याशी को मिल सकता है.

Posted By : Mithilesh Jha

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Published Date

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