41 लाख बंगाली अवैध नागरिक तो असम सरकार भी अवैध

जलपाईगुड़ी : असम में नागरिकता साबित नहीं कर सकने वाले करीब 41 लाख लोगों की नागरिकता सवालों के घेरे में आने बाद से बंगाल में तीखी प्रतिक्रिया हो रही है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की इस समस्या से बंगाल और बिहार के प्रभावित होने की आशंका जताने के बाद जलपाईगुड़ी जिले के बुद्धिजीवियों में भी उबाल […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | August 1, 2018 1:31 AM
जलपाईगुड़ी : असम में नागरिकता साबित नहीं कर सकने वाले करीब 41 लाख लोगों की नागरिकता सवालों के घेरे में आने बाद से बंगाल में तीखी प्रतिक्रिया हो रही है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की इस समस्या से बंगाल और बिहार के प्रभावित होने की आशंका जताने के बाद जलपाईगुड़ी जिले के बुद्धिजीवियों में भी उबाल देखा जा रहा है. मंगलवार को जलपाईगुड़ी जिला परिषद के सभागार में आयोजित एक सभा के दौरान सामाजिक संगठन एक्य संहति मंच गठित किया गया. मंच का मकसद असम में नागरिकता से वंचित लोगों के प्रति मानवीय सहयोग की भावना से काम करना बताया गया है.
सभा को संबोधित करते हुए उत्तरबंगाल विश्वविद्यालय में इतिहास के विभागाध्यक्ष रह चुके पूर्व अध्यापक डॉ. आनंदगोपाल घोष ने कहा कि अगर असम में रह रहे 41 लाख बंगाली वैध नागरिक नहीं हैं तो उनके वोट से चुनी हुई वहां की राज्य सरकार भी अवैध मानी जायेगी. सभा के आखिर में एक्य संहति मंच का गठन कर ऐसे नागरिकों के समर्थन में उतरने का संकल्प भी जिले के बुद्धिजीवियों ने लिया.
डॉ. आनंद गोपाल घोष ने कहा कि इन्हीं 41 लाख असमवासियों ने 2016 के विधानसभा चुनाव में वोट दिये थे. इसलिये अगर इनकी नागरिकता अवैध है तो फिर वहां की राज्य सरकार कैसे वैध हो सकती है‍? उन्होंने असम सरकार से तुरंत इस्तीफा देने की मांग की. सभा में तय हुआ कि मंच सुप्रीम कोर्ट के साथ है जिसमें उसने दीर्घलंबित नागरिकता की समस्या के हल के लिये निर्देश जारी किये थे. उसके साथ ही मानवीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए नागरिकता से वंचित होने वाले लोगों के समर्थन में खड़ा होने का फैसला भी लिया गया.
उन्होंने कहा कि आज की सभा कोई प्रतिवाद सभा नहीं है. सभा में नवगठित मंच के संयुक्त सचिव नजरुल हक और नीहार मजूमदार ने कहा कि हम लोग असम के नागरिक अधिकार से वंचित होने वाले इन लोगों के साथ मानवीय आधार पर खड़ा होना चाहते हैं. कला व संस्कृति के विभिन्न रुपों के जरिये हम लोग इस मानवीय पक्ष को सामने लाने का प्रयास करेंगे.
उत्तर बंगाल के अन्वेषक उमेश शर्मा ने कहा कि लाखों लोगों की नागरिकता समाप्त करने से पूर्व उनके प्रति न्याय किया जाना चाहिये. समाज सेवी संजीव चटर्जी ने कहा कि जरूरी पड़ी तो मंच सड़क पर उतर कर आंदोलन भी कर सकता है. हम सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर कर सकते हैं. उल्लेखनीय है कि मंच के दो संयुक्त उपाध्यक्ष उमेश शर्मा और संजीव चटर्जी चुने गये हैं.