खास बातें
Who is Sumit Roy TMC: पश्चिम बंगाल के सियासी गलियारों से लेकर पुलिस महकमे तक इस वक्त एक ही नाम की सबसे ज्यादा गूंज है- सुमित रॉय (Sumit Roy). तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी के इस सबसे भरोसेमंद और रहस्यमयी रणनीतिकार के खिलाफ पुलिसिया हंटर चलने से हड़कंप मच गया है.
आधी रात को कालीघाट में सालबनी पुलिस
पश्चिमी मेदिनीपुर जिले की सालबनी थाने की पुलिस की एक विशेष टीम ने आधी रात को कोलकाता में अभिषेक बनर्जी के आधिकारिक आवास पर धावा बोल दिया. पुलिस की इस दस्तक ने तृणमूल के शीर्ष नेतृत्व की रात की नींद उड़ा दी.
बगैर चुनाव लड़े चलाया संगठन का सिंडिकेट
आखिर सुमित रॉय कौन हैं? टीएमसी में उनका क्या वजूद है? आपको जानकर आश्चर्य होगा कि पार्टी में सुमित को किसी चुने हुए जनप्रतिनिधि या मंत्री से भी ज्यादा ताकतवर माना जाता है. वे कभी जनता के सामने नहीं आये. न ही कभी कोई चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें अभिषेक बनर्जी का अदृश्य साया (Shadow) और अघोषित सेकंड-इन-कमांड कहा जाता है.
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कद्दावर नेताओं के लिए बने ‘गेटकीपर’
स्कूल के दिनों से ही अभिषेक बनर्जी के दोस्त रहे सुमित रॉय ने समय के साथ अभिषेक के दफ्तर और टीएमसी के बड़े-बड़े सांगठनिक फैसलों में अपना एकछत्र एकाधिकार स्थापित कर लिया था. तृणमूल में सुमित रॉय का रसूख इस कदर हावी था कि वे अभिषेक बनर्जी के सबसे बड़े ‘गेटकीपर’ बन चुके थे. जिला स्तर के जमीनी नेताओं से लेकर पार्टी के वरिष्ठ सांसदों तक को अभिषेक से मिलने के लिए सुमित की हरी झंडी का घंटों इंतजार करना पड़ता था.
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5-5 घंटे इंतजार के बाद भी अभिषेक से नहीं मिल पाते थे नेता
एक जिला स्तर के नेता ने बताया कि वे 5-5 घंटे इंतजार करने के बाद भी सुमित से अप्वाइंटमेंट नहीं ले पाते थे. यहां तक कि राज्य के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी और हाई-रैंकिंग पुलिस अफसर भी अभिषेक तक कोई फाइल पहुंचाने के लिए सुमित के सामने कतार में खड़े होने को मजबूर थे.
डायमंड हार्बर की समानांतर सरकार
सुमित रॉय का असली पावर सेंटर अभिषेक बनर्जी का संसदीय क्षेत्र डायमंड हार्बर था. स्थानीय टीएमसी नेताओं के मुताबिक, वहां की सांगठनिक नियुक्तियां, प्रशासनिक ट्रांसफर-पोस्टिंग और विकास परियोजनाओं के टेंडर सीधे सुमित के इशारे पर तय होते थे. सोशल मीडिया पर सुमित के नाम से बाकायदा फैन क्लब और सपोर्टर ग्रुप सक्रिय थे, जो उन्हें टीएमसी का अगला बड़ा थिंक-टैंक घोषित कर रहे थे.
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जमीन घोटाले में फंसा ‘अनटचेबल’ चेहरा
आखिर सालबनी पुलिस को आधी रात को अभिषेक के घर क्यों जाना पड़ा? इसका कनेक्शन पूर्व टीएमसी विधायक और जिला अध्यक्ष सुजॉय हाजरा (Sujoy Hazra) से जुड़ा है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, मेदिनीपुर इलाके में जमीन हड़पने से जुड़े हाई-प्रोफाईल केस और अवैध डीलिंग के मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान सुमित रॉय का नाम सामने आया. जांच अधिकारियों ने सुमित को ट्रेस करने की कोशिश की, तो उनकी आखिरी लोकेशन अभिषेक बनर्जी के कोलकाता आवास पर मिली, जिसके बाद सालबनी पुलिस की टीम वहां पहुंची.
कुणाल घोष का तीखा और विस्फोटक प्रहार
कानूनी चक्रव्यूह में सुमित रॉय के फंसते ही टीएमसी के भीतर दबे सुर खुलेआम विद्रोह में बदल रहे हैं. पार्टी के वरिष्ठ विधायक कुणाल घोष ने आधी रात को पुलिस के पहुंचने के तरीके पर विरोध जताया. सुमित रॉय पर भी तीखा हमला बोला. कुणाल ने कहा- सुमित रॉय जैसे लोगों की वजह से ही तृणमूल कांग्रेस को आज इतना बड़ा सांगठनिक नुकसान उठाना पड़ा है. मुझे सुमित के साथ कोई सहानुभूति नहीं है. पुलिस को न केवल सुमित को ढूंढ़ना चाहिए, बल्कि उन लोगों को भी घसीटकर सलाखों के पीछे डालना चाहिए, जो सुमित का फैन क्लब चलाते थे.
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Who is Sumit Roy TMC: ढह गया अदम्य शक्ति का केंद्र
जो सुमित रॉय कल तक तृणमूल कांग्रेस के भीतर ‘अदम्य’ शक्ति का केंद्र माने जाते थे, आज उनके भूमिगत होने और पुलिसिया रडार पर आने से अभिषेक बनर्जी का पूरा कोर सिंडिकेट बिखरने की कगार पर पहुंच गया है. पार्टी के वो नेता, जो अब तक सुमित के खौफ से चुप थे, वे अब खुलकर उनकी तानाशाही और कॉरपोरेट कल्चर के खिलाफ मुंह खोल रहे हैं.
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