बंगाल की सियासत में ‘आया राम, गया राम’, 2021 की जीत के बाद 10 विधायकों ने बदला पाला, BJP को सबसे बड़ा झटका

West Bengal Election 2021 Defected MLAs: ADR की ताजा रिपोर्ट से पता चलता है कि 2021 बंगाल चुनाव के बाद 10 विधायकों ने पाला बदल लिया. भाजपा के 7 विधायक TMC में शामिल हुए. कांग्रेस के बायरन विश्वास ने बगावत की, तो हुमायूं कबीर ने भी नयी राह पकड़ ली. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

West Bengal Election 2021 Defected MLAs: पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनाव जीतना एक बात है और अपनी पार्टी के साथ टिके रहना दूसरी. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और वेस्ट बंगाल इलेक्शन वॉच की ताजा रिपोर्ट से पता चला है कि 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद कुल 10 विधायकों ने अपनी पार्टी छोड़ दी. इसमें सबसे दिलचस्प बात यह है कि पाला बदलने वाले अधिकांश नेताओं का झुकाव सत्ताधारी दल की ओर रहा.

दलबदल में BJP को सबसे अधिक नुकसान

ADR की रिपोर्ट बताती है कि चुनाव के बाद दलबदल की मार सबसे ज्यादा भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर पड़ी है. पाला बदलने वाले 10 विधायकों में 6 विधायक अकेले भाजपा के थे, जिन्होंने दल बदलकर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) का दामन थाम लिया. इनमें उत्तर बंगाल से लेकर जंगलमहल तक के नेता शामिल हैं.

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सत्ता ही नहीं, बगावत भी है वजह

सिर्फ विपक्षी दलों से ही पलायन नहीं हुआ. सत्ताधारी खेमे में भी टूट और बगावत देखी गयी.

  • हुमायूं कबीर : तृणमूल कांग्रेस (AITC) से निलंबित किये जाने के बाद हुमायूं कबीर ने अपनी नयी पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) बना ली.
  • पार्थ चटर्जी : चर्चित शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में जेल जाने वाले पार्थ चटर्जी को तृणमू कांग्रेस ने निलंबित कर दिया. इसके बाद से वह निर्दलीय (Independent) विधायक के तौर पर गिने जा रहे हैं.
  • बायरन विश्वास : कांग्रेस के टिकट पर सागरदीघी विधानसभा सीट से उपचुनाव जीतकर इतिहास रचने वाले बायरन विश्वास ने भी कुछ ही समय बाद पाला बदलकर तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया.
  • विष्णु प्रसाद शर्मा : उत्तर बंगाल के कर्सियोंग के भाजपा विधायक विष्णु प्रसाद शर्मा तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गये.
  • कन्हाई चंद्र मंडल : नबग्राम के निवर्तमान विधायक कन्हाई चंद्र मंडल ने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा.

West Bengal Defected MLAs की लिस्ट यहां देखें

दल बदलने वाले विधायक का नामनिर्वाचन क्षेत्र का नामपिछला दल (2021 चुनाव)वर्तमान दल (5 मार्च 2026 तक)टिप्पणी
सुमन कांजीलालअलीपुरद्वारBJPAITCभाजपा से टीएमसी में शामिल +1
तन्मय घोष (बुम्बा)बिष्णुपुरBJPAITCभाजपा से टीएमसी में शामिल +1
हरकाली प्रतिहारकतुलपुर (SC)BJPAITCभाजपा से टीएमसी में शामिल +1
विष्णु प्रसाद शर्माकर्सियांगBJPAITCभाजपा से टीएमसी में शामिल +1
तपसी मोंडलहल्दिया (SC)BJPAITCभाजपा से टीएमसी में शामिल
बायरन बिस्वाससागरदिघीINC (कांग्रेस)AITCकांग्रेस से टीएमसी में शामिल
रुदेन सदा लेपचाकालिम्पोंगनिर्दलीय (IND)BGPMनिर्दलीय से गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा +1
हुमायूं कबीरभरतपुरAITCAJUPटीएमसी से निलंबित, नयी पार्टी बनायी +1
पार्थ चटर्जीबेहाला पश्चिमAITCनिर्दलीयटीएमसी से निलंबित
कन्हाई चंद्र मंडलनबग्रामAITCBJPटीएमसी से भाजपा में शामिल

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राजनीतिक गलियारों में चर्चा

ADR की रिपोर्ट में स्पष्ट है कि विश्लेषण 5 मार्च 2026 तक की स्थिति और विधायकों की ओर से दिये गये शपथपत्रों पर आधारित है. विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल में ‘वोट किसी को और समर्थन किसी को’ वाली यह संस्कृति मतदाताओं के विश्वास को कमजोर करती है. चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, इन दलबदलुओं के कारण कई सीटों पर राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गये हैं.

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दलबदल करने वाले 36 फीसदी उम्मीदवार जीते

पिछले 3 विधानसभा चुनावों में हुए दलबदल पर गौर करेंगे, तो पायेंगे कि बंगाल में अब दलबदल असामान्य बात नहीं है. कई मामलों में यह कारगर भी साबित होता है. वर्ष 2011, वर्ष 2016 और वर्ष 2021 के बंगाल चुनावों में 135 उम्मीदवारों ने दलबदल कर चुनाव लड़ा. इनमें 49 ने चुनाव जीता. यानी दलबदल करने वालों में से एक तिहाई से अधिक उम्मीदवार विधायक चुने गये.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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