खास बातें
TMC Crisis: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद बिखर रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के ताबूत में सोमवार को दिल्ली की धरती पर सबसे आखिरी और सबसे बड़ा कील ठोक दिया गया. पश्चिम बंगाल से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक उस समय राजनीतिक भूकंप आ गया, जब तृणमूल कांग्रेस की वरिष्ठ सांसद और लोकसभा में पार्टी की पूर्व मुख्य सचेतक (Chief Whip) काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि टीएमसी के 28 लोकसभा सदस्यों में से 20 ने केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी राजग (NDA) को समर्थन देने का फैसला कर लिया है.
बागी सांसदों ने निकाली दलबदल कानून की काट
बागी टीएमसी सांसदों ने दलबदल कानून की काट निकालते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को आधिकारिक पत्र भी सौंप दिया है, जिससे ममता बनर्जी का संसदीय कुनबा ताश के पत्तों की तरह ढह गया. इसी तरह रीतब्रत बनर्जी की अगुवाई में 58 टीएमसी विधायकों ने ममता बनर्जी को बंगाल विधानसभा में झटका दिया था.
हम एनडीए के साथ जा रहे हैं : काकोली घोष दस्तीदार
सोमवार को काकोली घोष दस्तीदार ने टीएमसी में सबसे बड़े विद्रोह की आधिकारिक पुष्टि की. उन्होंने खुलासा किया कि केंद्र सरकार को समर्थन देने की इच्छा जताते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक लिखित पत्र पहले ही भेजा जा चुका है. उन्होंने एक बड़ा तकनीकी दावा ठोकते हुए कहा- तृणमूल कांग्रेस के करीब 20 सांसदों ने, जिनमें मैं भी शामिल हूं, एनडीए को समर्थन देने के अपने फैसले से लोकसभा अध्यक्ष को अवगत करा दिया है. मैं अभी भी लोकसभा में पार्टी की मुख्य सचेतक बनी हुई हूं और यह निर्णय सभी साथी सांसदों के साथ गहन विचार-विमर्श और आम सहमति के बाद लिया गया है.
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दलबदल विरोधी कानून की उड़ी धज्जियां
बागियों ने दलबदल कानून (Anti-Defection Law) के उस चक्रव्यूह को पूरी तरह भेद दिया, जिसकी चर्चा रविवार को टीएमसी के थिंक टैंक कर रहे थे. लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सदस्य हैं. नियमानुसार, दलबदल कानून से बचने और अपनी सांसदी बचाने के लिए दो-तिहाई यानी कम से कम 19 सांसदों की जरूरत थी. काकोली का दावा है कि 20 सांसदों का उनको समर्थन प्राप्त है. इसलिए दलबदल कानून उन पर लागू नहीं होता.
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बंगाल की जनता के फैसले को किया स्वीकार
बगावत को जायज ठहराते हुए काकोली घोष दस्तीदार ने कहा- हमने पश्चिम बंगाल की जनता के फैसले और जनादेश को खुले दिल से स्वीकार कर लिया है. हमारा दृढ़ विश्वास है कि बंगाल के विकास के लिए हमारा भविष्य का राजनीतिक मार्ग अब राजग (NDA) की नीतियों के अनुरूप ही होना चाहिए.
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यह अप्रत्याशित घटनाक्रम उस वक्त सामने आया है, जब तृणमूल कांग्रेस के भीतर पिछले कुछ दिनों से वरिष्ठ नेताओं द्वारा खुले तौर पर केंद्रीय नेतृत्व (अभिषेक बनर्जी की शैली) के खिलाफ असहमति जताने और इस्तीफे देने का दौर चल रहा था. लोकसभा के 28 सांसदों के साथ-साथ राज्यसभा में भी टीएमसी के 12 सदस्य हैं, लेकिन लोकसभा में हुए इस 20 सांसदों के महा-विद्रोह ने ममता बनर्जी की राष्ट्रीय राजनीति को शून्य पर ला खड़ा किया है.
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ममता के ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक से पहले हुआ ‘धमाका’
दिल्ली में ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की बड़ी बैठक से ठीक पहले यह धमाकेदार खबर आ गयी. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस महा-तख्तापलट और काकोली घोष दस्तीदार के दावों पर समाचार लिखे जाने तक तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व (कालीघाट) की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या खंडन सामने नहीं आया है.
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