24 जनवरी को छुट्टी पर घर लौटने वाले थे समीरन सिंह
कोलकाता/झाड़ग्राम. कश्मीर में हुए हादसे में झाड़ग्राम जिले के एक भारतीय जवान के शहीद होने की खबर से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गयी है. जिले के सांकराइल ब्लॉक के कुचलादाड़ी गांव निवासी 28 वर्षीय जवान समीरन सिंह देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गये. परिजनों के अनुसार, समीरन सिंह 24 जनवरी को छुट्टी पर घर लौटने वाले थे. गांव में उनके लिए नया घर बन रहा था और तय हुआ था कि उनके आने के बाद ही मकान की छत की ढलाई कराई जायेगी. लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. छुट्टी पर लौटने से पहले ही उनके शहीद होने की खबर ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया. शुक्रवार को तिरंगे में लिपटा जवान का पार्थिव शरीर गांव लाया जाना था, लेकिन खराब मौसम के कारण यह संभव नहीं हो सका. शहीद की अंतिम झलक पाने के लिए परिजन, रिश्तेदार और गांववाले बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. समीरन सिंह भारतीय सेना की ब्रेवो कंपनी की 169वीं बटालियन में तैनात थे. परिवार के सूत्रों के मुताबिक, वह परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे. उनके जीवन का सबसे बड़ा सपना अपने माता-पिता को खुश रखना था. इसी उद्देश्य से वह उनके लिए नया घर बनवा रहे थे. माता-पिता पहली मंजिल पर रहते हैं, जबकि दूसरी मंजिल का निर्माण कार्य शुरू किया गया था, लेकिन छत की ढलाई का सपना अधूरा ही रह गया. शहीद जवान के पिता वीरेंद्र सिंह और छोटे भाई दिब्येंदु सिंह ने बताया कि समीरन बचपन से ही देश के लिए कुछ करने की बात करता था. सेना में जाने का उसका सपना था, जिसके लिए उसने खुद को पूरी मेहनत और अनुशासन के साथ तैयार किया.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
