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SIR in Bengal: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 से पहले वोटर शुद्धिकरण के लिए चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के बीच चुनाव आयोग के अफसरों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का एक केस दर्ज हुआ है. मामला राज्य के पुरुलिया जिले में 23 दिन पहले हुई एक आत्महत्या के मामले से जुड़ा है.
29 दिसंबर को दुर्जन माझी ने की थी आत्महत्या
चुनाव आयोग के खिलाफ दर्ज करायी गयी एफआईआर में कहा गया है कि एसआईआर से जुड़ी चिंता की वजह से दुर्जन माझी ने 29 दिसंबर को आत्महत्या कर ली थी. उसे उसी दिन सुनवाई के लिए बुलाया गया था. दुर्जन की उम्र 82 साल थी.
23 दिन बाद चुनाव आयोग के खिलाफ दर्ज हुआ केस
एक अधिकारी ने बताया है कि बुजुर्ग के बेटे ने पाड़ा पुलिस स्टेशन में एक कंप्लेन दी है. इसके आधार पर घटना के 23 दिन बाद केस दर्ज हुआ है. थाने में दर्ज एफआईआर में किसी अधिकारी का नाम नहीं है. मृतक के बेटे ने इलेक्शन कमीशन के ऑफिसर्स पर उसके पिता को सुसाइड करने के लिए प्रोवोक करने के आरोप लगाये हैं.
चौटाला गांव के रहने वाले थे दुर्जन माझी
अधिकारी ने बताया है कि पाड़ा ब्लॉक के चौटाला गांव के आदिवासी बुजुर्ग दुर्जन माझी ने ब्लॉक कार्यालय में एसआईआर हियरिंग के लिए पेश होने से कुछ घंटे पहले अपनी जान दे दी थी. माझी के परिवार ने कहा कि वोटर लिस्ट और एसआईआर से जुड़ी चिंता की वजह से उन्होंने आत्महत्या कर ली.
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तृणमूल ने आयोग पर लगाया भय पैदा करने का आरोप
दुर्जन माझी के बेटे की ओर से थाने में की गयी शिकायत के बाद तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि एसआईआर के माध्यम से लोगों में भय पैदा किया जा रहा है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने अभी तक इस आरोप पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.
पुरुलिया के मानबाजार में आदिवासी युवक ने दे दी जान
एक अन्य घटना में पुरुलिया जिले के मानबाजार में 32 वर्षीय एक आदिवासी व्यक्ति ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली. उसके परिवार ने दावा कि उसने यह आत्मघाती कदम तब उठाया, जब उसे एसआईआर सुनवाई का नोटिस मिला.
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