ऑटोमैटिक सिस्टम से जाता है नोटिस
कोलकाता. एसआइआर को लेकर अल्पसंख्यक समुदाय का विरोध जारी है. स्वयं तृणमूल विधायक मनीरुल इस्लाम ने कहा कि अल्पसंख्यकों को परेशान किया जा रहा है. चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता ने इस आरोप को खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि यह आरोप ही गलत है कि धर्म के आधार पर नोटिस भेजा जा रहा है. यह एक ऑटोमैटिक सिस्टम है. चुन कर किसी को नोटिस देना मुमकिन नहीं है. इलेक्टोरल रोल में कहीं भी किसी धर्म का जिक्र नहीं है. यह भी आरोप लगाया गया कि मुर्शिदाबाद में ज्यादातर नोटिस अल्पसंख्यक समुदाय को ही दिया गया है. इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि जहां भी जिस समुदाय की आबादी ज्यादा है, निश्चित ही वहां उन्हें ही ज्यादा नोटिस मिलेगा. यह सामान्य बात है. एक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जब वह मालबाजार गये और देखा कि सुनवाई में नोटिस पाने वालों में से 80 फीसदी आदिवासी थे. जबकि कूच बिहार में ज्यादातर राजवंशियों को नोटिस मिले हैं. यह पूछे जाने पर कि मुख्यमंत्री बार-बार कह रही हैं कि मौत की जिम्मेदारी चुनाव आयोग को लेनी होगी, इस पर उनका कहना था कि उन्होंने सभी मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट मांगी है, ताकि पीड़ित परिवारों की मदद की जा सके. उन्होंने कहा कि सुनवाई के लिए आते-जाते समय कुछ मौतें हुई हैं. लेकिन ऐसी रिपोर्ट नहीं मिली है कि सुनवाई के कारण ही उनकी मौत हुई है. इस बारे में चुनाव आयोग से बातचीत की जायेगी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
