नेत्र रोग विशेषज्ञ पर मरीज की आंख खराब करने का आरोप

शांतिपुर के बागंचरा इलाके में एक नेत्र रोग विशेषज्ञ पर इलाज में लापरवाही का गंभीर आरोप सामने आया है

राजनीतिक जुड़ाव व चिकित्सकीय लापरवाही को लेकर उठे सवाल जांच में जुटी पुलिस

प्रतिनिधि, कल्याणी.

शांतिपुर के बागंचरा इलाके में एक नेत्र रोग विशेषज्ञ पर इलाज में लापरवाही का गंभीर आरोप सामने आया है, जिससे मरीज की एक आंख की रोशनी चली गयी. आरोप डॉक्टर अरूप राय पर है, जो न सिर्फ एक नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस समर्थित टोटो यूनियन के उपाध्यक्ष भी हैं. इस घटना से इलाके में सनसनी फैल गयी है और राजनीतिक हलकों में भी हलचल मच गयी है.

मरीज की आंख गयी, परिवार सदमे में : घटना 16 जुलाई की है, जब ढाकापाड़ा निवासी सुजीत विश्वास निश्चिंतपुर के नेत्रदीप क्लिनिक में आंख में जलन और लालिमा की शिकायत लेकर पहुंचा.

परिवार का आरोप है कि डॉक्टर अरूप राय ने बिना पूरी जांच के दवा दे दी. दवा के इस्तेमाल के बाद मरीज की आंख में तेज दर्द शुरू हो गया. जब उसने डॉक्टर को इसकी सूचना दी, तो आरोप है कि डॉक्टर ने न केवल मामले को नजरअंदाज किया, बल्कि दुर्व्यवहार भी किया. इसके बाद 24 जुलाई को अन्य डॉक्टरों द्वारा बताया गया कि मरीज की आंख पूरी तरह खराब हो चुकी है और अगर दर्द कम नहीं हुआ, तो उसे निकालना पड़ सकता है. इससे आहत होकर सुजीत विश्वास ने शनिवार रात शांतिपुर थाने में डॉक्टर के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज करायी. रविवार सुबह से ही इलाके में घटना को लेकर हंगामा मच गया.

डॉ अरूप राय ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है. उनका कहना है कि मरीज की खुद की लापरवाही के चलते यह स्थिति बनी और इसमें उनकी कोई चिकित्सकीय गलती नहीं है.

मामला पहुंचा राजनीतिक गलियारों तक : मामले ने तब और तूल पकड़ा, जब यह सामने आया कि डॉक्टर अरूप राय तृणमूल कांग्रेस समर्थित टोटो यूनियन के उपाध्यक्ष भी हैं. भाजपा ने आरोप लगाया कि राजनीतिक रसूख के चलते डॉक्टर अब तक कार्रवाई से बचते रहे हैं और अब पार्टी का दबाव बनाकर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है. भाजपा नेताओं ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग की आलोचना करते हुए आरोपी डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है.

जांच शुरू, स्वास्थ्य विभाग की नजर

शिकायत मिलने के बाद शांतिपुर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. जिला स्वास्थ्य विभाग भी मामले की समीक्षा कर रहा है. स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि अगर डॉक्टर की इलाज प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी पायी गयी, तो नियमानुसार कार्रवाई की जायेगी. तृणमूल कांग्रेस की ओर से बयान आया है कि वह चिकित्सकीय मामलों पर प्रतिक्रिया नहीं देगी, लेकिन यदि कोई कार्यकर्ता पार्टी की छवि खराब करता है, तो संगठन उस पर कार्रवाई करेगा.

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