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OBC Certificate Not Valid For SIR Hearing: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत दावों और आपत्तियों की सुनवाई के दौरान वर्ष 2010 के बाद राज्य सरकार की ओर से जारी ओबीसी प्रमाणपत्रों को पहचान के सहायक दस्तावेज के रूप में स्वीकार नहीं किया जायेगा. भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने इस संबंध में स्थिति स्पष्ट कर दी है. यह स्पष्टीकरण उस आदेश के बाद आया है, जिसमें 24 दिसंबर को कलकत्ता हाईकोर्ट की एकल पीठ ने निर्वाचन आयोग से यह बताने को कहा था कि क्या ऐसे ओबीसी प्रमाणपत्रों को विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में मान्य दस्तावेज माना जायेगा.
एसआईआर से जुड़े अधिकारियों को चुनाव आयोग का सख्त निर्देश
आयोग ने साफ किया है कि किसी भी स्थिति में वर्ष 2010 के बाद जारी ओबीसी प्रमाणपत्रों का उपयोग पहचान के लिए नहीं किया जायेगा. मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ पश्चिम बंगाल) कार्यालय के मुताबिक, निर्वाचन आयोग ने निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों, जिलाधिकारियों और जिला निर्वाचन अधिकारियों को इस निर्देश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा है. किसी भी स्तर पर उल्लंघन की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी.
- ओबीसी प्रमाणपत्र की मान्यता के बारे में कलकत्ता हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगा था जवाब
- 22 मई 2025 को हाइकोर्ट ने 2010 के बाद जारी ओबीसी प्रमाणपत्रों को रद्द करने का दिया था आदेश
कलकत्ता हाईकोर्ट ने ओबीसी प्रमाणपत्रों को रद्द करने का दिया था आदेश
कलकत्ता हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 22 मई 2025 को पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वर्ष 2010 के बाद जारी सभी ओबीसी प्रमाणपत्रों को रद्द कर दिया था. भविष्य में किसी भी उद्देश्य के लिए उनके उपयोग पर रोक भी लगा दी थी. इसी फैसले के आधार पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की पश्चिम बंगाल इकाई ने अदालत का रुख किया था और मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया में ऐसे प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल पर आपत्ति जतायी थी.
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OBC Certificate Not Valid For SIR Hearing: पहचान के प्रमाण में शामिल है ओबीसी प्रमाणपत्र
निर्वाचन आयोग ने बताया है कि पहचान के प्रमाण के रूप में कुल 13 दस्तावेज निर्धारित किये गये हैं, जिनमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) प्रमाणपत्र भी शामिल हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा वर्ष 2010 के बाद जारी ओबीसी प्रमाणपत्र अब इस श्रेणी में मान्य नहीं रहेंगे.
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