खास बातें
NIA in Action: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने अप्रैल में वोटर लिस्ट के शुद्धिकरण के लिए शुरू की गयी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़ी हिंसा मामले में एक ‘स्थानीय नेता’ को गिरफ्तार किया है. उस पर भीड़ द्वारा रास्ता अवरुद्ध करने और न्यायिक अधिकारियों को कथित तौर पर बंधक बनाकर रखने की घटनाओं में शामिल होने का आरोप है. अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी.
कोलकाता में पूछताछ के बाद लिया गया हिरासत में
एनआईए ने एक बयान जारी कर कहा है कि सायेम चौधरी उर्फ बाबू चौधरी को एनआईए की एक टीम ने कोलकाता स्थित एजेंसी के शाखा कार्यालय में पूछताछ के बाद हिरासत में ले लिया. चौधरी मालदा जिले के मोथाबाड़ी के राजनेता हैं.
मालदा हिंसा मामले में अब तक 30 गिरफ्तार
इस मामले में अब तक एनआईए कुल 30 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. केंद्रीय एजेंसी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मालदा जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान भीड़ के विरोध-प्रदर्शनों और न्यायिक अधिकारियों को अवैध रूप से रोके जाने से जुड़े एक दर्जन से अधिक मामलों की जांच कर रही है.
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बीडीओ कार्यालय में जजों को बनाया गया था बंधक
एनआईए की जांच में पता चला है कि सायेम चौधरी एक अप्रैल 2026 को ब्लॉक-2 के बीडीओ कार्यालय में न्यायिक अधिकारियों को अवैध रूप से बंधक बनाये जाने के मामले में प्रमुख आरोपियों में शामिल था. बयान में कहा गया है कि वह कथित तौर पर उस भीड़ का हिस्सा था, जिसने ‘कानून-व्यवस्था भंग’ की और सरकारी ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला किया. हमले में 9 पुलिसकर्मी घायल हो गये थे.
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हिंसा से एक दिन पहले सायेम ने लोगों को भड़काया : NIA
एनआईए ने कहा है कि जांच में पता चला है कि आरोपी ने घटना से एक दिन पहले बीडीओ कार्यालय के सामने भाषण दिया था. इसमें लोगों को हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के लिए उकसाया गया था. एनआईए ने कहा कि चौधरी ने कथित तौर पर अन्य सह-आरोपियों के साथ साजिश रची थी और एसआईआर अभियान के दौरान हिंसा, धमकी और बाधा उत्पन्न करने वाली अवैध सभाओं में सक्रिय रूप से भाग लिया था.
NIA in Action: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एनआईए ने शुरू की थी जांच
बयान में यह भी कहा गया है कि एनआईए इन घटनाओं के पीछे की व्यापक साजिश की जांच के तहत पश्चिम बंगाल में चुनाव-पूर्व हिंसा के विभिन्न मामलों में शामिल सभी लोगों की पहचान करने और उनका पता लगाने का प्रयास कर रही है. एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इन मामलों की जांच शुरू की थी. उच्चतम न्यायालय ने मालदा में अप्रैल में हुई हिंसा का स्वतः संज्ञान लिया था.
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