नंदीग्राम की जंग का पूरा हिसाब : एक-एक वोट के लिए ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी ने कितना बहाया पैसा?

Nandigram Election Expense: नंदीग्राम में ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच हुई ऐतिहासिक जंग में किस उम्मीदवार ने कितना पैसा खर्च किया? एक वोट की कीमत से लेकर जीत के अंतर तक, जानें चुनावी खर्च का पूरा लेखा-जोखा.

Nandigram Election Expense: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में एक बार फिर ममता बनर्जी से शुभेंदु अधिकारी का मुकाबला होने जा रहा है. तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दोनों ने तैयारी कर ली है. पिछली बार मैदान था पूर्व मेदिनीपुर का नंदीग्राम. इस बार दक्षिण कोलकाता के भवानीपुर में होगा ‘महासंग्राम’. भवानीपुर में दूसरे चरण में 29 अप्रैल को वोटिंग होगी. इससे पहले आपको ले चलते हैं नंदीग्राम के उस चुनाव में, जहां शुभेंदु अधिकारी ने टीएमसी सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चुनाव में हराकर सबको चौंका दिया था.

शुभेंदु अधिकारी को चुनौती देने नंदीग्राम गयीं थीं ममता बनर्जी

कोलकाता छोड़कर शुभेंदु अधिकारी को चुनौती देने के लिए ममता बनर्जी नंदीग्राम पहुंचीं थीं. यहां पूरी ताकत लगाने के बाद भी वह 1956 वोटों से हार गयीं. ममता बनर्जी ने यहां कितना खर्च किया? शुभेंदु अधिकारी को कितने पैसे खर्च करने पड़े? नंदीग्राम में तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की 1 वोट की कीमत कितनी रही? चुनाव जीतने के लिए भाजपा उम्मीदवार ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से कितने ज्यादा पैसे खर्च किये? यहां आपको एक-एक वोट और दोनों उम्मीदवारों के चुनावी खर्च का पूरा हिसाब बतायेंगे.

ममता को 41505 और शुभेंदु को 43461 वोट मिले

सबसे पहले बात चुनाव लड़ने वाले दोनों उम्मीदवारों को मिले वोट की. नंदीग्राम विधानसभा सीट पर वर्ष 2021 में हुए चुनाव में बंगाल की चीफ मिनिस्टर ममता बनर्जी को 41,505 वोट मिले थे. टीएमसी छोड़कर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले शुभेंदु अधिकारी को 43,461 वोट मिले. इस तरह ममता बनर्जी 1956 वोट से यहां चुनाव हार गयीं.

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Nandigram Election Expense: 40 लाख था ममता के पास, खर्च किये 21.88 लाख रुपए

अब बात चुनाव खर्च की. इलेक्शन कमीशन के दस्तावेजों के मुताबिक, ममता बनर्जी के पास चुनाव लड़ने के लिए 40.01 लाख रुपए का फंड था. उन्होंने इसमें से 21.88 लाख रुपए ही खर्च किये. दूसरी तरफ, शुभेंदु अधिकारी के पास ममता बनर्जी से आधे से थोड़ा अधिक फंड था. भाजपा नेता के पास 21.02 लाख रुपए का फंड था. 40 लाख के फंड के बावजूद ममता बनर्जी ने खर्च में कटौती की, लेकिन शुभेंदु अधिकारी ने फंड से अधिक पैसे खर्च कर डाले. संगठन और प्रचार पर पूरा फोकस किया और चुनाव जीत लिया.

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ममता को 52.73, शुभेंदु को 54.36 रुपए का पड़ा 1 वोट

उम्मीदवारों को मिले वोट और उनके चुनाव खर्च का हिसाब करेंगे, तो पायेंगे कि ममता बनर्जी का प्रति वोट खर्च 52.73 रुपए रहा. शुभेंदु अधिकारी ने जो खर्च किये, उसके हिसाब से उन्हें एक वोट 54.36 रुपए का पड़ा. चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी से 1.74 लाख रुपए अधिक खर्च किये. तब जाकर उनको 1956 वोटों से जीत मिली. इन 1956 वोटों की कीमत का आकलन करेंगे, तो पायेंगे कि जीत के अंतर वाले प्रति वोट का मूल्य 88.96 रुपए रहा.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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