ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को फिर लिखी चिट्ठी, कहा- SIR में AI के इस्तेमाल से हो रही परेशानी
Mamata Banerjee to Election Commission: ममता बनर्जी ने एसआईआर के मुद्दे पर चुनाव आयोग को एक बार फिर चिट्ठी लिखी है. उन्होंने कहा है कि राज्य में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल की वजह से मतदाताओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने चुनाव आयोग पर कुछ आरोप भी लगाये हैं. टीएमसी चीफ ने क्या-क्या लिखा है, पढ़ें.
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Mamata Banerjee Letter to Election Commission: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को फिर से चिट्ठी लिखी है. तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने इस चिट्ठी में दावा किया है कि वर्ष 2002 की मतदाता सूचियों में एआई-आधारित डिजिटाइजेशन की वजह से एसआईआर प्रक्रिया के दौरान पात्र मतदाताओं को बड़े पैमाने पर कठिनाई हो रही है.
ममता बनर्जी ने सीईसी को लिखी 5वीं चिट्ठी
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की शुरुआत से अब तक ममता बनर्जी मुख्य निर्वाचन आयुक्त को 5 चिट्ठी लिख चुकीं हैं. इस पांचवीं चिट्ठी में उन्होंने कहा है कि इसके कारण डेटा में बड़े पैमाने पर विसंगति देखने को मिली. कई पात्र मतदाताओं को गलत तरीके से ‘तार्किक विसंगतियों’ वाला बताकर चिह्नित कर दिया गया.
Mamata Banerjee Letter to Election Commission: आयोग पर अपनी ही प्रक्रिया की अनदेखी का आरोप
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग 2 दशकों से अपनायी जा रही अपनी ही वैधानिक प्रक्रियाओं की अनदेखी कर रहा है. उन्होंने कहा कि ‘अर्ध-न्यायिक सुनवाइयों’ के बाद पहले किये गये संशोधनों के बावजूद मतदाताओं को अपनी पहचान दोबारा साबित करने के लिए मजबूर किया जा रहा है.
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ईसीआई का रवैया संविधान की भावना के प्रतिकूल
अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सुप्रीमो ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अपने ही दृष्टिकोण और व्यवस्थाओं से पल्ला झाड़ने वाला ऐसा रवैया मनमाना, अतार्किक और भारत के संविधान की भावना एवं प्रावधानों के प्रतिकूल है.
ममता बनर्जी बोलीं- एसआईआर प्रक्रिया विसंगतियों से भरा हुआ
ममता बनर्जी ने इस पूरी प्रक्रिया को विसंगतियों से भरा बताते हुए आरोप लगाया कि एसआईआर के दौरान जमा किये गये दस्तावेजों की कोई उचित पावती नहीं दी जा रही है. कहा कि एसआईआर की सुनवाई प्रक्रिया ‘काफी हद तक यांत्रिक हो गयी है, जो पूरी तरह तकनीकी आंकड़ों से संचालित है’. इसमें ‘विवेक, संवेदनशीलता तथा मानवीय दृष्टिकोण का पूरी तरह अभाव’ है. बंगाल की चीफ मिनिस्टर ने कहा कि इससे ‘हमारे लोकतंत्र और संवैधानिक ढांचे की बुनियाद’ कमजोर होती है.
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