बंगाल के स्कूलों में CISF के ठहराव से शिक्षा मंत्री नाराज, बोले- पाठशाला को धर्मशाला बना दिया

Bratya Basu on CISF: बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रात्या बसु इस बात को लेकर खासे नाराज हैं कि केंद्रीय बलों के ठहरने के लिए राज्य के स्कूल और कॉलेजों को धर्मशाला की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है.

Bratya Basu on CISF: कोलकाता: चुनाव से पहले और बाद में हर बार केंद्रीय बलों के अस्थायी आवास को लेकर विवाद खड़ा हो जाता है. इस बार भी केंद्रीय बल(CISF) की तैनाती को लेकर बंगाल में विवाद शुरू हो गया है. बंगाल में केंद्रीय बलों की तैनाती के लिए स्कूल और कॉलेजों की मांग की खबर सुनकर राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु थोड़े नाराज हैं. उन्होंने नबन्ना से केंद्र पर कटाक्ष किया है. शिक्षा मंत्री ने कहा- यदि केंद्र सरकार को लगता है कि स्कूल ही एकमात्र सहारा हैं, तो स्कूली शिक्षा को लेकर उनका नजरिया स्पष्ट है. केंद्र ने स्कूलों को धर्मशाला समझ लिया है. केंद्र को बलों के समायोजन के बारे में कुछ तो जानकारी होनी चाहिए, लेकिन अगर इसी वजह से राज्य में शिक्षा बाधित होती है, तो हम इसे नहीं चाहेंगे.

इन जिलों में होनी है तैनाती

दरअसल केंद्रीय बलों के ठहरने की व्यवस्था सामान्यत: राज्य के सरकारी और सरकारी स्कूलों में होता है, जिसके कारण लंबी अवधि के लिए शिक्षा व्यवस्था लगभग पूरी तरह से बाधित हो जाती है. शनिवार से बंगाल में चरणबद्ध तरीके से केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती शुरू होने जा रही है. गृह विभाग बंगाल के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में केंद्रीय बलों की कुल 480 कंपनियां भेजने जा रहा है. इनमें से 240 कंपनियां शुक्रवार को पहुंच चुकी हैं. इनमें से 7 कंपनियां बीरभूम, 5 कंपनियां पुरुलिया, 12 कंपनियां कोलकाता, 12 कंपनियां दक्षिण दिनाजपुर, केवल 4 कंपनियां दक्षिण 24 परगना के सुंदरबन और 14 कंपनियां पूर्वी मेदिनीपुर पहुंचेंगी. लेकिन उनकी तैनात अभी नहीं की गयी हैं, लेकिन यह तय है कि केंद्रीय बलों को स्कूलों और कॉलेजों में ही ठहराने की व्यवस्था सरकार की ओर से की जा रही है.

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भाजपा ने मंत्री की नाराजगी पर दुख जताया

भाजपा ने राज्य के शिक्षा मंत्री द्वारा स्कूलों को धर्मशाला कहने पर करारा जवाब दिया है. मीडिया से बात करते हुए भाजपा नेता साजल घोष ने कहा- केंद्रीय बल को हमेशा स्कूलों और कॉलेजों में ही ठहराया जाता है. यह कोई नयी परंपरा नहीं है. ऐसा हर राज्य में होता है. शिक्षामंत्री का यह कहना कि इससे पढ़ाई बाधित होती है, तो ब्रात्या बाबू के आदेश पर 8,200 स्कूल बंद कर दिए गए हैं. क्या वो स्कूल नहीं हैं, क्या वहां शिक्षा नहीं दी जा रही थी. उनका स्कूलों को धर्मशाला कहना दुखद है, क्योंकि केंद्रीय बलों के ठहरने के लिए उचित जगह की व्यवस्था करना भी राज्य सरकार का ही दायित्व है. सरकार अपने दायित्व का निर्वाह करें.

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लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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