खास बातें
Mamata Banerjee Rigging Claim: पश्चिम बंगाल में पराजय के बाद पहली बार सड़क पर उतरीं तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी ने मंगलवार को सनसनीखेज दावा किया. कोलकाता के एस्प्लेनेड में धरना के दौरान ममता बनर्जी ने भाजपा की प्रचंड जीत की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े किये. उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पश्चिम बंगाल की सत्ता हथियाने के लिए 294 में से 177 सीटों पर मतगणना में बड़े पैमाने पर धांधली की है. उन्होंने ऐलान किया कि वे इस मुश्किल दौर में अपने कार्यकर्ताओं को अकेला नहीं छोड़ेंगी और जल्द ही दिल्ली से भाजपा विरोधी इंडिया (INDIA) गठबंधन के साथ मिलकर देशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगी.
177 सीटों का सीक्रेट नंबर और दिल्ली का नया चक्रव्यूह
ममता बनर्जी ने पहली बार आधिकारिक रूप से 177 सीटों का आंकड़ा देते हुए आरोप लगाया कि तृणमूल को मिली हार जनादेश नहीं, बल्कि काउंटिंग टेबल पर की गयी प्रशासनिक धोखाधड़ी है. उन्होंने घोषणा की कि अगले सप्ताह नयी दिल्ली में भाजपा विरोधी सभी प्रमुख दलों की एक हाई-प्रोफाइल बैठक होगी. उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा- कुछ दिनों का इंतजार कीजिए, हम जल्द ही दिल्ली से केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ एक देशव्यापी साझा कार्ययोजना (Action Plan) का ऐलान करेंगे.
नीट (NEET) और राष्ट्रीय मुद्दों से कनेक्शन
अपने इस धरने को केवल टीएमसी तक सीमित न रखकर ममता बनर्जी ने बड़ी चालाकी से इसे ‘नीट परीक्षा में अनियमितता/धोखाधड़ी’ और फेरीवालों के पुनर्वास जैसे राष्ट्रीय और जनहित के मुद्दों से जोड़कर खुद को दोबारा स्थापित करने की कोशिश की है.
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अभिषेक पर हमला सुनियोजित, अस्पतालों पर था शुभेंदु सरकार का दबाव!
शनिवार को सोनारपुर में सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले को लेकर ममता बनर्जी ने एक बेहद डरावना और नया खुलासा किया. बंगाल की पूर्व चीफ मिनिस्टर ने आरोप लगाया कि अभिषेक पर अचानक हमला नहीं हुआ था. वह पूरी तरह सुनियोजित (Pre-planned) था. भाजपा ने अपने कार्यकर्ताओं को पहले से वहां छुपाकर रखा था. उन्हें खाना खिलाया था और यहां तक कि उन्हें कैसे हमला करना है, इसकी ट्रेनिंग भी दी थी.
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हेलमेट न होता तो चली जाती जान: ममता बनर्जी
टीएमसी सुप्रीमो ने कहा कि अगर तृणमूल के एक जांबाज कार्यकर्ता ने ऐन वक्त पर अभिषेक को हेलमेट नहीं पहनाया होता, तो पत्थरों से लगी वह चोट जानलेवा साबित हो सकती थी. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हमले के बाद जिन निजी अस्पतालों में अभिषेक को ले जाया गया था, उन पर शुभेंदु अधिकारी सरकार का भारी प्रशासनिक दबाव था कि घायल नेता को भर्ती न किया जाये. उन्होंने तंज कसा कि पीएम मोदी ने बंगाल को ऐसे असामाजिक और मनमानी करने वाले नेताओं के हाथों में छोड़ दिया है, जो राज्य को अंधकार में धकेल रहे हैं.
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‘सिग्नेचर गेट’ पर तोड़ी चुप्पी, स्पीकर पर उठाये सवाल
विधानसभा में शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता चुनने के लिए विधायकों के फर्जी हस्ताक्षरों (Signature Scandal) के आरोपों का भी ममता ने बचाव किया. उन्होंने कहा कि विधायकों ने किसी फर्जी कागज पर नहीं, बल्कि आधिकारिक पार्टी बैठक की उपस्थिति पुस्तिका (Attendance Register) पर हस्ताक्षर किये थे. इसे बाद में समर्थन पत्र के रूप में जमा किया गया.
फॉरेंसिक जांच क्यों नहीं करायी : ममता
ममता बनर्जी ने भाजपा और विधानसभा अध्यक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा- अगर विधानसभा अध्यक्ष को हमारे हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता पर कोई शक था, तो उन्हें इसकी निष्पक्ष फॉरेंसिक जांच करानी चाहिए थी. लेकिन जांच की बजाय पुलिस को कालीघाट भेजना भाजपा की गंदी राजनीति का हिस्सा है.
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Mamata Banerjee Rigging Claim: बिना मंच और लाउडस्पीकर के जारी रहा संग्राम
कोलकाता पुलिस द्वारा रानी रासमणि रोड की अनुमति रद्द किये जाने के बाद एस्प्लेनेड के वाई-चैनल पर यह धरना आयोजित हुआ. पुलिस ने वहां मंच बनाने या बड़े लाउडस्पीकर का उपयोग करने पर भी रोक लगा दी थी. इसके खिलाफ कोर्ट जाने की चेतावनी देते हुए ममता ने कहा- अगर अन्य दलों को इस जगह माइक लगाने की इजाजत मिलती है, तो हम अदालत जायेंगे. कानून भेदभाव के आधार पर लागू नहीं हो सकता.
अफरा-तफरी और नारेबाजी के बीच रोकना पड़ा भाषण
प्रदर्शन के दौरान टीएमसी कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ के कारण कई बार अफरा-तफरी मची और नारेबाजी के चलते ममता बनर्जी को अपना भाषण रोकना पड़ा. धरने पर उनके साथ फिरहाद हकीम, मदन मित्रा, कल्याण बनर्जी, शोभनदेव चट्टोपाध्याय, चंद्रिमा भट्टाचार्य और डोला सेन जैसे पुराने वफादार जमे रहे. टीएमसी के टिकट पर चुनाव जीते अधिकांश नये विधायकों ने इस धरने से भी दूरी बनाये रखी.
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