खास बातें
Lok Sabha Speaker Om Birla TMC Split: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से अलग हुए सांसदों के समूह को मान्यता देने के मुद्दे पर फैसला करने से पहले उसका और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट, दोनों का पक्ष सुनेंगे. सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी.
टीएमसी का दावा- 2 घंटे पहले मुलाकात की मिली सूचना
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी से जुड़े सूत्रों ने कहा कि अभिषेक बनर्जी को बिरला के साथ मुलाकात के लिए सिर्फ 2 घंटे पहले सूचित किया गया. यह संदेश भी उस वक्त भेजा गया, जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) उनसे पूछताछ कर रहा था.
4 बजे मिलने को बुलाया, 2 बजे भेजा ई-मेल
टीएमसी सूत्रों का यह भी कहना है कि अभिषेक बनर्जी को बीते सोमवार को दिन में करीब 2 बजे लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय से एक ई-मेल आया, जिसमें कहा गया था कि वह 2 घंटे बाद 4 बजे बिरला से मुलाकात करें. इसके तत्काल बाद लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय ने टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद को फोन किया और इस ई-मेल के बारे में बताया.
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कोलकाता में ईडी कर रही थी अभिषेक बनर्जी से पूछताछ
सूत्रों के मुताबिक, इसके जवाब में आजाद ने लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय को बताया कि अभिषेक बनर्जी ‘सभी जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध’ हैं और वह कोलकाता के सीजीओ कॉम्प्लेक्स में ईडी कार्यालय में जांच में सहयोग कर रहे हैं. बाद में आजाद ने लोकसभा अध्यक्ष से मिलकर उन्हें इस ई-मेल के बारे में जानकारी दी.
तृणमूल कांग्रेस के दो-तिहाई सांसदों ने अलग बैठने की व्यवस्था की मांग करते हुए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र दिया है. हम नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी में विलय करेंगे और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का समर्थन करेंगे.
काकोली घोष दस्तीदार, टीएमसी के बागी गुट की नेता
विधि विभाग से कानूनी राय लेंगे स्पीकर ओम बिरला
सूत्रों ने यह भी बताया कि तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव पूछताछ के बाद आधी रात के आस-पास लौटे. इससे पहले संसद से जुड़े सूत्रों ने बताया था कि लोकसभा अध्यक्ष, अलग हुए सांसदों की, अपेक्षाकृत कम चर्चित राजनीतिक दल नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय के बाद अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग पर कानूनी राय ले सकते हैं.
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Lok Sabha Speaker Om Birla TMC Split: फैसला मानसून सत्र से पहले संभव
सूत्रों ने कहा कि इस मांग पर कोई भी निर्णय संसद के मानसून सत्र से पहले लिया जायेगा, जो आमतौर पर जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होता है. अलग हुए गुट को मान्यता दी जाये या नहीं, इस पर निर्णय केंद्रीय विधि मंत्रालय की लिखित राय के आधार पर लिया जायेगा. मंत्रालय किसी वरिष्ठ विधि अधिकारी से परामर्श के बाद अपनी राय देगा.
सांसद या विधायक नहीं कर सकते पार्टी का विलय : विशेषज्ञ
लोकसभा के पूर्व महासचिव और संविधान विशेषज्ञ पीडीटी आचारी ने संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा-4 का हवाला देते हुए कहा कि केवल कोई राजनीतिक दल ही दूसरे राजनीतिक दल में विलय कर सकता है, सांसद या विधायक नहीं.
टीएमसी के एनसीपीआई में विलय की योजना से हैरान हैं अधिकारी
निर्वाचन आयोग के एक पूर्व अधिकारी, जो राजनीतिक दलों से जुड़े मामलों को देखते थे, ने तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों द्वारा एनसीपीआई में विलय की मौजूदा योजना को ‘नवाचार’ करार देते हुए कहा कि इसका उल्लेख न तो दलबदल विरोधी कानून में है और न ही जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में.
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तृणमूल के सांसदों से अलग बैठना चाहते हैं 20 बागी
रविवार को तृणमूल कांग्रेस का संकट उस समय गहरा गया, जब अलग हुए सांसदों ने एनसीपीआई में विलय की घोषणा कर दी और लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग को लेकर बिरला से मुलाकात की. बैठक के बाद बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि अध्यक्ष को सौंपे गये ज्ञापन पर पार्टी के 20 सांसदों ने हस्ताक्षर किये हैं.
हावड़ा के संकराईल में है एनसीपीआई का मुख्यालय
एनसीपीआई ने जनवरी 2023 में खुद को राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत कराया था. निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, इसके पते में पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के संकराइल स्थित एक भवन का जिक्र है और राष्ट्रीय राजनीति में इसकी मौजूदगी सीमित रही है.
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