खास बातें
Kolkata Voter List Deletion 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के मतदान (29 अप्रैल) से ठीक पहले कोलकाता की मतदाता सूची में बड़े बदलाव सामने आये हैं. निर्वाचन आयोग (ECI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद कोलकाता के कई इलाकों से भारी संख्या में मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिये गये हैं.
श्यामपुकुर में 87 प्रतिशत वोटर अयोग्य घोषित
इस लिस्ट में श्यामपुकुर विधानसभा क्षेत्र सबसे ऊपर है. इस सीट पर जांच के घेरे में आये 87 प्रतिशत मतदाताओं को अयोग्य घोषित कर दिया गया है. इसके बाद चौरंगी और इंटाली का नंबर आता है. इन आंकड़ों ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है.
श्यामपुकुर और चौरंगी में सबसे बड़ा वोटर कट
- श्यामपुकुर विधानसभा सीट : कुल 2,759 संदिग्ध मामलों में से 2,390 (87 प्रतिशत) नाम हटा दिये गये.
- चौरंगी विधानसभा सीट : 14,217 मामलों में से 10,424 (73.3 प्रतिशत) मतदाताओं के नाम काट दिये गये.
- इंटाली विधानसभा सीट : 12,558 में से 9,092 (72.4 फीसदी) नाम काटे गये हैं.
- जोड़ासांकू में 63.6 प्रतिशत, रासबिहारी में 61.6 प्रतिशत काशीपुर-बेलगाछिया में 60 प्रतिशत नाम हटाये गये हैं.
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बालीगंज और भवानीपुर में हुई वोटर्स की वापसी
- बालीगंज विधानसभा सीट : 23,968 संदिग्ध मामलों में से 17,769 (74 प्रतिशत) मतदाताओं को वैध मानकर सूची में शामिल किया गया.
- भवानीपुर विधानसभा सीट : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सीट पर 14,154 मामलों में से 10,256 मतदाताओं की पात्रता को हरी झंडी मिली.
- कोलकाता पोर्ट विधानसभा सीट : इस सीट पर सबसे ज्यादा 32,378 मामले जांच के अधीन थे. इनमें से 59 फीसदी यानी 18,938 नामों को क्लियर कर दिया गया.
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Kolkata Voter List Deletion 2026: प्रवासी मजदूरों और अल्पसंख्यकों पर असर?
सबर इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता सौप्तिक हलधर ने कहा कि यह कटौती मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर और प्रवासी मजदूर आबादी को प्रभावित कर रही है. श्यामपुकुर, चौरंगी और इंटाली जैसे क्षेत्रों में प्रवासी मजदूरों की संख्या अधिक है.
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पूरे बंगाल में 60 लाख मतदाता जांच के दायरे में
कोलकाता ही नहीं, पूरे बंगाल की 294 सीटों पर 60 लाख से अधिक मतदाताओं को न्यायिक जांच (Adjudication) के दायरे में रखा गया था. कोलकाता के बाहर राजरहाट न्यू टाउन में सबसे ज्यादा कटौती देखी गयी, जहां 31,382 मामलों में से 24,132 (77 प्रतिशत) नाम हटा दिये गये. कोलकाता में नामांकन की प्रक्रिया समाप्त होने के साथ ही यह लिस्ट ‘फ्रीज’ कर दी गयी.
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SIR के आंकड़ों से जुड़ी जरूरी बातें
- पूरे पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के बाद लगभग 91 लाख नाम मतदाता सूची से हटाये गये. इनमें 27.16 लाख नाम केवल न्यायिक जांच (Judicial Scrutiny) के अंतिम चरण में काटे गये.
- कोलकाता शहर के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों में मतदाताओं की संख्या में भारी कमी आयी है. श्यामपुकुर में सबसे ज्यादा 87 प्रतिशत नाम काटे गये, जो जांच के दायरे में थे.
- भवानीपुर में कुल मतदाताओं की संख्या में लगभग 25 प्रतिशत (करीब 51,004 नाम) की कमी आयी है. इसमें पहले चरण की कटौती और न्यायिक जांच दोनों शामिल हैं.
- शोधकर्ताओं का दावा है कि इस कटौती का सबसे बड़ा असर प्रवासी मजदूरों और अल्पसंख्यक समुदायों पर पड़ा है. विशेष रूप से लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी और अनमैप्ड श्रेणियों के तहत.
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