डीएलएड पास नहीं करनेवालों को भी नौकरी का अवसर, होंगी 2,300 नियुक्तियां

प्राथमिक में डीएलएड मामले को लेकर कलकत्ता हाइकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अभिजीत गांगुली के फैसले को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने बहाल रखा.

सुप्रीम कोर्ट ने हाइकोर्ट की सिंगल बेंच के आदेश को रखा बहाल, खंडपीठ का फैसला किया खारिज

कोलकाता. प्राथमिक में डीएलएड मामले को लेकर कलकत्ता हाइकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अभिजीत गांगुली के फैसले को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने बहाल रखा. हाइकोर्ट की खंडपीठ के फैसले को शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया. शुक्रवार को न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा व न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की खंडपीठ ने कहा कि पूर्व न्यायाधीश अभिजीत गांगुली की सिंगल बेंच के फैसले के आधार पर ही नियुक्ति की जा सकती है. इस फैसले के बाद 2,300 अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है. बता दें कि प्राथमिक शिक्षा पर्षद ने 2022 में प्राथमिक में 11,758 शिक्षकों की नियुक्ति के लिए विज्ञप्ति जारी की. पहले विज्ञप्ति में पर्षद ने बताया कि चालू शिक्षा वर्ष में जो अभ्यर्थी डीएलएड का प्रशिक्षण ले रहे हैं, वे भी नियुक्ति प्रक्रिया में हिस्सा ले सकते हैं. पर्षद के इस फैसले के खिलाफ कलकत्ता हाइकोर्ट में मामला दर्ज हुआ. हाइकोर्ट के तत्कालीन न्यायाधीश अभिजीत गांगुली ने पर्षद के फैसले को मान्यता दे दी. फैसले को तत्कालीन न्यायाधीश सुब्रत तालुकदार व न्यायाधीश सुप्रतीम भट्टाचार्य की खंडपीठ में चुनौती दी गयी. खंडपीठ ने पूर्व न्यायाधीश अभिजीत गांगुली व पर्षद की विज्ञप्ति को खारिज कर दिया था. खंडपीठ का कहना था कि भले ही 2022 के जून महीने में उनका कोर्स पूरा हो जायेगा, लेकिन अभ्यर्थियों को प्रमाण-पत्र समय के भीतर नहीं मिल पायेगा. उन्हें नवंबर महीने में उन्हें प्रमाण-पत्र मिलेगा. इसलिए उन्हें आवेदन के लिए योग्य नहीं माना जा सकता है. अगर उन्हें नियुक्ति प्रक्रिया में हिस्सा लेने दिया गया, तो यह एनसीटीइ के नियमों का उल्लंघन होगा. खंडपीठ में मामला चलने के दौरान पर्षद ने नयी विज्ञप्ति जारी की. इसमें कहा गया था कि पूरी तरह से प्रशिक्षण प्राप्त अभ्यर्थियों को अवसर देने की बात कही गयी. खंडपीठ के फैसले को चुनौती देते हुए डीएलएड प्रशिक्षण प्राप्त कुछ अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में मामला दर्ज कराया. इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को हुई. अदालत ने खंडपीठ के फैसले को खारिज करते हुए सिंगल बेंच के फैसले को ही बरकरार रखा.

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By Akhilesh kumar singh

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