सुप्रीम कोर्ट में ईडी का बंगाल प्रशासन पर बड़ा आरोप, डीजीपी को निलंबित करने की रखी मांग

I-PAC Case in Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने डीजी राजीव कुमार पर गंभीर आरोप लगाये. उन्होंने अदालत में उस दिन मौजूद पुलिस अधिकारियों के खिलाफ बेहद आक्रामक तरीके से तर्क दिया. तुषार मेहता के अनुसार, वर्दी पहने एक उच्च पदस्थ पुलिस अधिकारी तलाशी अभियान के बीच बाधा डालने का काम किया.

By Ashish Jha | January 15, 2026 1:49 PM

I-PAC Case in Supreme Court: कोलकाता. आई-पैक छापेमारी मामले में सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई. ईडी ने याचिका दायर कर मुख्यमंत्री पर जांच में बाधा डालने और फाइलें छीनने का आरोप लगाया है. याचिका में आरोप न केवल मुख्यमंत्री पर बल्कि मुख्य सचिव और महानिदेशक पर भी लगाया गया है. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल मनुभाई पंचोली की बेंच में इस मामले की सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान ईडी के वकील ने अदालत को बताया कि जब भी जांच चल रही होती है, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हस्तक्षेप करती हैं. ईडी ने इस संबंध में पिछली कई घटनाओं का हवाला दिया. ईडी के वकील ने कहा कि उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए. उन्होंने विभागीय जांच की भी मांग की. वकील कपिल सिबल ने इस पूरे मामले का विरोध किया.

बेहद आक्रामक दिखे तुषार मेहता

बहस की शुरुआत करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने डीजी राजीव कुमार और उस दिन मौजूद अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ बेहद आक्रामक तरीके से तर्क दिया. तुषार मेहता के अनुसार, उस दिन एक उच्च पदस्थ पुलिस अधिकारी वर्दी में मुख्यमंत्री के साथ तलाशी में कैसे दाखिल हुआ. जब ईडी फाइल की जांच कर रही थी, तब वह उसे वहां से कैसे लेकर आया. उन्होंने कहा कि छापेमारी से पहले ईडी सबसे पहले स्थानीय पुलिस स्टेशन गई. वहां से अनुमति लेकर ही तलाशी ली गई. तलाशी अभियान के बीच इतनी बड़ी पुलिस फोर्स वहां क्यों पहुंची.

डीजीपी के निलंबन की मांग

वकील तुषार मेहता ने कहा कि राजीव कुमार समेत सभी पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया जाना चाहिए. तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में पिछले शुक्रवार को हाई कोर्ट की सुनवाई के दौरान कोर्टरूम में हुए हंगामे का मुद्दा भी उठाया. ईडी के अनुसार, कानून मंत्री उस दिन 500 लोगों को लेकर गए थे. प्रश्न-उत्तर सत्र के दौरान नारेबाजी शुरू हो गई. बाद में सुनवाई स्थगित कर दी गई. तुषार मेहता ने उच्च न्यायालय की सुनवाई का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि क्या अदालत जंतर-मंतर में तब्दील हो गई है. ईडी ने कहा कि जांच में इस तरह की दखलअंदाजी एक चलन बन गई है. जब भी किसी के खिलाफ जांच शुरू होती है, हंगामा मच जाता है और पूरा मामला बिगड़ जाता है.

जांच में बाधा डालने की नहीं थी उम्मीद

तुषार मेहता ने कहा कि जांचकर्ता न्यायिक आदेश मिलने के बाद तलाशी अभियान चला रहे हैं, लेकिन फिर भी ऐसी घटनाएं क्यों हो रही हैं. तुषार मेहता ने बताया कि ईडी कोयला घोटाले की जांच कर रही है. इस जांच के दौरान पता चला कि 20 करोड़ रुपये कोलकाता से गोवा भेजे गए थे. इस पूरी प्रक्रिया में लाभार्थी के रूप में प्रतीक जैन का नाम सामने आया. जांच शुरू हुई. ईडी के अधिकारी विशेष निर्देशों के साथ जांच करने पहुंचे. तुषार मेहता ने कहा कि इस जांच के दौरान बंगाल पुलिस को ऐसा महसूस होगा कि वे इस तरह की घटनाओं में मुख्यमंत्री के साथ किसी के भी घर में कभी भी प्रवेश कर सकते हैं. बाद में वे धरना दे सकते हैं.

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