बीएसएफ को 105 एकड़ जमीन देगी पश्चिम बंगाल सरकार, लैंड ट्रांसफर को दी मंजूरी

बंगाल चुनाव 2026 से पहले राज्य सरकार ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को लैंड ट्रांसफर करने की तैयारी शुरू कर दी है. ममता बनर्जी की सरकार ने सीमा पर 105 एकड़ जमीन बीएसएफ को ट्रांसफर करने को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है. सीएमओ से प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद इसे मंत्रिमंडल के पास भेजा जायेगा.

पश्चिम बंगाल सरकार ने सीमा पर बाड़ लगाने और चौकियां बनाने के लिए केंद्र को लगभग 105 एकड़ जमीन देने के प्रताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है. लगभग 17 किलोमीटर में बाड़ लगाने और सीमा चौकियां (बीओपी) स्थापित करने के लिए यह जमीन सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को ट्रांसफर की जायेगी. आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी.

शुक्रवार को नबान्न में हुई थी मंत्रिस्तरीय समूह की बैठक

केंद्रीय एजेंसियों को जमीन देने से संबंधित प्रस्तावों की जांच के लिए गठित मंत्रिस्तरीय समूह ने शुक्रवार को राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ में बैठक की थी. इसी बैठक में सैद्धांतिक रूप से इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी. अंतिम मंजूरी राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में दी जायेगी.

17 किलोमीटर लंबे हिस्से में बाड़ लगाने की है योजना

केंद्र सरकार सीमा के 17 किलोमीटर लंबे हिस्से पर बाड़ लगाने की योजना बना रही है. इसके लिए उसने पश्चिम बंगाल सरकार से जमीन की मांग की है. बीएसएफ को भी इस क्षेत्र में 9 सीमा चौकियों के निर्माण के लिए जमीन की जरूरत है.

ममता बनर्जी ने नियुक्त किया था विशेष मंत्रिस्तरीय समूह

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इससे पहले केंद्रीय एजेंसियों को जमीन देने से संबंधित प्रस्तावों की जांच के लिए एक विशेष मंत्रिस्तरीय समूह नियुक्त किया था. शुक्रवार को चंद्रिमा भट्टाचार्य, फिरहाद हकीम और अरूप विश्वास ने इन बातों पर विचार-विमर्श किया कि कहां कितनी जमीन की जरूरत है और राज्य कितनी जमीन उपलब्ध करा सकता है.

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9 सीमा चौकियों के लिए 18 एकड़ जमीन देगी सरकार

राज्य सचिवालय से मिली जानकारी अनुसार, 17 किलोमीटर के क्षेत्र में बाड़ लगाने के लिए लगभग 67 एकड़ जमीन आवंटित करने का निर्णय लिया गया है. 9 बीओपी (बोर्ड ऑफ पोस्ट यानी सीमा चौकियों) के निर्माण के लिए लगभग 18 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी.

सीएमओ से मंजूरी के बाद राज्य मंत्रिमंडल में जायेगा प्रस्ताव

इन जमीनों का मालिकाना हक फिलहाल निजी व्यक्तियों के पास है. राज्य सरकार ये जमीनें बीएसएफ को सौंपने से पहले जमीन के मालिकों से उसकी खरीद करेगी. यदि मुख्यमंत्री कार्यालय प्रस्ताव को मंजूरी दे देता है, तो इसे राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जायेगा.

जिला प्रशासन करेगा भूमि का अधिग्रहण

मंत्रिमंडल की स्वीकृति मिलने पर, जिला प्रशासन आवश्यक भू-खंडों के अधिग्रहण के लिए भू-स्वामियों से बातचीत शुरू करेगा. इतना ही नहीं, मंत्रिस्तरीय समूह द्वारा सीमा से सटे 9 स्थानों पर लगभग 20-25 एकड़ सरकारी जमीन बीएसएफ को हस्तांतरित करने की सिफारिश की जा सकती है. एक अधिकारी ने कहा कि इसका उद्देश्य सीमावर्ती बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाना है.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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