भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने सोमवार को कहा कि अगर उनकी पार्टी पश्चिम बंगाल में सत्ता में आती है, तो बांग्लादेशी घुसपैठियों को राज्य से बाहर निकालने के लिए असम का मॉडल लागू किया जायेगा. असम ने ‘पहचानो (डिटेक्ट), नाम हटाओ (डिलीट) और वापस भेजो (डिपोर्ट)’ की नीति पर काम किया था.
नितिन नबीन ने मालदा में परिवर्तन यात्रा की शुरुआत
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मालदा जिले के इस्लामपुर में भाजपा की परिवर्तन यात्रा की शुरुआत करते हुए नितिन नबीन ने एक रैली में यह घोषणा भी की कि भाजपा अगर राज्य की सत्ता में आयी, तो इस्लामपुर का नाम बदलकर ‘ईश्वरपुर’ कर देगी.
50 लाख से अधिक बांग्लादेशी मताधिकार से वंचित
मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में हाल में नाम हटाये जाने का जिक्र करते हुए नबीन ने दावा किया कि निर्वाचन आयोग ने बंगाल में ‘50 लाख से अधिक बांग्लादेशी घुसपैठियों’ को मताधिकार से वंचित कर दिया है.
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बांग्लादेशियों के नाम न हटते, तो योजनाओं का लाभ उन्हें मिलता
उन्होंने कहा कि अगर निर्वाचन आयोग 50 लाख से अधिक बांग्लादेशियों के नाम नहीं हटाता, तो बंगाल के लोगों के लिए केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ घुसपैठियों को मिलता.
हमने हाल में बिहार में सरकार बनायी है. असम में हम बांग्लादेशी घुसपैठियों को निकालने के लिए ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ का मॉडल अपना रहे हैं. जहां भी ये विदेशी लोग हमारे अपने नागरिकों के अधिकारों को छीन रहे हैं, हम वहां इसे लागू करेंगे.
नितिन नबीन, राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी
इस्लामपुर के लोगों को ‘ईश्वरपुर के लोग’ कहकर संबोधित किया
नबीन ने पूरे भाषण में वहां मौजूद लोगों को ‘ईश्वरपुर के लोग’ कहकर संबोधित किया. उन्होंने कहा- हम इस जगह का नाम बदलकर ईश्वरपुर करने के आपके सपने को पूरा करेंगे. यह राजबंशी सुधारक ठाकुर पंचानन बर्मा की, बंगाल के अंतिम हिंदू राजा लक्ष्मण सेन की और क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी पूर्ण चंद्र दास की भूमि है.
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