जय गंगा मैया! जय श्मशान!! सर्द रात में चिता की आग से खुद को गरम कर रहे गंगासागर मेला पहुंचे श्रद्धालु

Gangasagar Mela: जय गंगा मैया! जय श्मशान!! गंगासागर की सर्द रात में चिता की आग से खुद को गरम कर रहे श्रद्धालु. यह कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है. शर्मनाक स्थिति है दक्षिण 24 परगना जिला प्रशासन के लिए. प्रशासन ने श्रद्धालुओं की हर सुविधा का ख्याल रखने का दावा किया था, लेकिन ये वो दृश्य हैं, जो प्रशासन के दावों की पोल खोल रहे हैं.

श्मशान में ठहरने के लिए मजबूर हैं गंगासागर आये श्रद्धालु. फोटो : अर्को

Gangasagar Mela| गंगासागर से शिव कुमार राउत : मकर संक्रांति पर गंगासागर में पुण्य स्नान के लिए देश के कोने-कोने से तीर्थयात्रियों का जत्था सागरद्वीप पहुंचा है. इनमें बड़ी संख्या ग्रामीण इलाकों से आये श्रद्धालुओं की है. उन्हें यह तक पता नहीं चल रहा कि मेले में ठहरने की व्यवस्था कहां है. नतीजतन श्मशान, सड़क और सागर के किनारा ही उन्होंने डेरा डाल लिया है.

खुले आसमान के नीचे श्मशान में सो रहे श्रद्धालु

हैरत की बात है कि एक ओर चिता की आग धधक रही है और उसी के बगल में जमीन पर तीर्थयात्रियों का समूह ठिठुरती ठंड में खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर है. इनमें महिलाएं और बच्चे सभी हैं. सनातन हिंदू धर्म में श्मशान में महिलाओं का जाना वर्जित है, लेकिन विडंबना कि तीर्थस्थल पर महिलाएं श्मशान में रात गुजारने को विवश हैं. वह भी मोक्ष की नगरी में.

Gangasagar Mela: ठहरने की जगह तलाशते हुए पहुंच गये श्मशान

उत्तर बंगाल के रायगंज से पत्नी के साथ आये बुजुर्ग श्यामापद मंडल बताते हैं कि वे शाम को मेले में पहुंचे. काफी खोजबीन की, लेकिन ठहरने के लिए कोई जगह नहीं मिली. रास्ते में आग जलती दिखी, तो वहां चले आये. बाद में पता चला कि यह श्मशान है. यहां और लोगों को देखा, तो हिम्मत बांधकर वहीं रुक गये.

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रास्ता भटककर यहां आ गये सलीमपुर के बृजमोहन

राजस्थान के बीकानेर से आयीं आनंदी अम्मा कहती हैं कि सोने के लिए कहां जाना है, कोई कुछ बताने वाला नहीं है. जहां भीड़ दिखी, वहीं आ गये. एक और श्रद्धालु हैं, जो पटना से आये हैं. पटना के सलीमपुर से आये बृजमोहन ने कहा कि टेंट कहां लगे हैं, यह पूछते-पूछते रास्ता भटक गये. यहां पर लोगों को देखा, तो वह भी चादर बिछाकर लेट गये. मन में डर है. बस भोर होने का इंतजार है.

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By Mithilesh Jha

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