जब तक जिंदा हूं, योग्य शिक्षकों की नौकरी नहीं जाने दूंगी : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने नेताजी इनडोर स्टेडियम में एक बैठक में प्रभावित शिक्षकों और अन्य कर्मियों से अपने-अपने स्कूल जाने और स्वैच्छिक तरीके से फिर से काम करने का आग्रह किया.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नौकरी गंवाने वालों के साथ सीएम ने की बैठक

बोलीं ममता-अभी तक किसी को नौकरी से निकाला नहीं गया है, स्वैच्छिक रूप से काम करते रहें

संवाददाता, कोलकातामुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नौकरी गंवाने वाले योग्य शिक्षकों और गैर शिक्षण कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करने का संकल्प जताया और कहा कि वह अंतिम सांस तक उनके लिए लड़ती रहेंगी, चाहे जेल भी जाना पड़े, तो भी कोई परवाह नहीं. मुख्यमंत्री ने शीर्ष अदालत के फैसले के बाद स्कूलों की नौकरी गंवाने वाले लोगों के साथ सोमवार को यहां नेताजी इनडोर स्टेडियम में एक बैठक में प्रभावित शिक्षकों और अन्य कर्मियों से अपने-अपने स्कूल जाने और स्वैच्छिक तरीके से फिर से काम करने का आग्रह किया. उन्होंने एक भावनात्मक संदेश में कहा: अगर मुझे जेल भी जाना पड़ा तब भी मैं यह सुनिश्चित करने के लिए लड़ती रहूंगी कि किसी पात्र उम्मीदवार को नौकरी से वंचित नहीं रखा जाये. जब तक मैं जीवित रहूंगी. एक भी योग्य शिक्षक की नौकरी नहीं जाने दूंगी. सुश्री बनर्जी ने कहा: किसी को अभी तक निष्कासन पत्र नहीं मिला है. इसलिए अपना काम करते रहिये. आप इस बीच स्वैच्छिक सेवा देने के लिए स्वतंत्र हैं. मुख्यमंत्री ने स्कूलों की स्थिति पर कहा कि अब स्कूलों को कौन देखेगा? अन्य सारे कार्यों से कौन निपटेगा? अगर कोई नौकरी देने की स्थिति में नहीं है तो उसे उन्हें लेने का अधिकार भी नहीं होना चाहिए. हालांकि ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य सरकार शीर्ष अदालत की व्यवस्था का सम्मान करती है. उन्होंने कहा: हम उच्चतम न्यायालय की अवमानना नहीं कर रहे. हम पूरी तरह कानूनी रूपरेखा के दायरे में कार्रवाई करेंगे. लेकिन मैं कहूंगी कि प्रशासन को गलतियों को सुधारने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया.

सीएम ने सुप्रीम कोर्ट में मामले की पैरवी के लिए नये अधिवक्ताओं की टीम की घोषणा की: इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में मामले की पैरवी के लिए राज्य सरकार की ओर से नये अधिवक्ताओं की टीम बनायी गयी है. मुख्यमंत्री ने अधिवक्ताओं की टीम की घोषणा करते हुए कहा है कि इसमें अभिषेक मनु सिंघवी, कपिल सिब्बल, राकेश द्विवेदी, कल्याण बनर्जी और प्रशांत भूषण जैसे अधिवक्ताओं को शामिल किया गया है, जो न्यायालय में राज्य और प्रभावित अभ्यर्थियों का पक्ष रखेगी. उन्होंने शिक्षकों से कहा: आप निश्चिंत होकर पढ़ाना जारी रखें. अगर आपने अभी दो महीने परेशानी सह ली तो अगले 20 साल तक दिक्कत नहीं आयेगी. सुश्री बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने योग्य लोगों की सेवा में किसी भी तरह की बाधा को रोकने के लिए योजना तैयार की है. उन्होंने कहा, ‘मैं उन लोगों के साथ खड़ी रहूंगी, जिन्होंने अन्यायपूर्ण तरीके से अपनी नौकरी खो दी है. मुझे परवाह नहीं है कि दूसरे क्या सोचते हैं. मैं आपका सम्मान वापस दिलाने के लिए सब कुछ करूंगी.’ ममता बनर्जी ने दोहराया कि राज्य सरकार न्यायालय के फैसले का सम्मान करती है और प्रशासन ‘अत्यंत सावधानी और निष्पक्षता’ के साथ स्थिति को संभालने के लिए सक्रियता से कदम उठा रहा है.

योग्य के बाद अयोग्य उम्मीदवारों की समस्याओं का भी किया जायेगा समाधान सुश्री बनर्जी ने लोगों की “नौकरियां बहाल करने” के लिए दो चरण की योजना बतायी, जिनकी नियुक्तियां शीर्ष अदालत ने रद्द कर दी थीं. उन्होंने कहा, ‘पहले चरण में हम पात्र उम्मीदवारों का ब्योरा देखेंगे और उनकी खोई नौकरी उन्हें लौटाने के लिए सभी जरूरी कदम उठायेंगे. दूसरे चरण में हम तथाकथित दागी उम्मीदवारों के मामले उठायेंगे. हम इस बात की गहराई से जांच करेंगे कि उन्हें ‘अयोग्य’ करार क्यों दिया गया, किस आधार पर उन्हें दागी पाया गया और जांच कैसे की गयी जिसमें उन्हें दोषी पाया गया. मैं उनके साथ अलग से बैठक करुंगी.’

ममता बनर्जी ने प्रभावित शिक्षकों से कहा कि वे अपनी नौकरी करते समय सरकार पर भरोसा रखें और ‘पात्र’ तथा ‘दागदार’ उम्मीदवारों के बीच कोई टकराव नहीं होना चाहिए. मुख्यमंत्री ने यह दावा भी किया कि उनका नाम किसी ऐसी चीज में घसीटा जा रहा है जिसके बारे में “मुझे कोई जानकारी नहीं है.’’उन्होंने स्कूली नौकरियों में नियुक्ति संबंधी विसंगतियों का जिक्र करते हुए यह बात कही. सुश्री बनर्जी ने कहा: अगर कोई मुझे स्कूल की नौकरी गंवाने वालों के साथ खड़े होने के लिए सजा देना चाहता है तो मैं जेल जाने के लिए भी तैयार हूं.” उन्होंने भाजपा और माकपा का स्पष्ट संदर्भ देते हुए कहा, “पूरी शिक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचाने की साजिश है. कुछ लोग एक गंदा खेल खेल रहे हैं.

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By Akhilesh kumar singh

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