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कोलकाता से मनोरंजन सिंह की रिपोर्ट
CID at Abhishek Banerjee House: पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार को उस समय हलचल तेज हो गयी, जब राज्य की आपराधिक जांच विभाग (CID) की एक टीम तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी के आवास ‘शांतिनिकेतन’ पहुंची. हरीश मुखर्जी रोड स्थित उनके आवास पर सीआईडी की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब राज्य में चुनावी नतीजों के बाद राजनीतिक माहौल पहले से ही गरमाया हुआ है.
बंद दरवाजा और ‘मिस्टीरियस’ सन्नाटा: क्या हुआ मौके पर?
शनिवार दोपहर जब सीआईडी के 4 अधिकारियों की टीम शांतिनिकेतन पहुंची, तो घर का दरवाजा बंद मिला. अधिकारियों ने दरवाजा खटखटाया, तो वह अंदर से बंद था. काफी देर तक बाहर इंतजार करने के बाद घर के अंदर से एक व्यक्ति बाहर आया.
अभिषेक के घर के बाहर पुलिस का पहरा
घर से निकले व्यक्ति ने अधिकारियों को बताया कि अभिषेक बनर्जी घर पर नहीं हैं. सीआईडी ने औपचारिकता पूरी करते हुए उस व्यक्ति की पहचान नोट की और वहां से वापस चली गयी. सीआईडी के जाने के बाद भी एहतियात के तौर पर हेयर स्ट्रीट थाने की पुलिस को आवास के बाहर तैनात रखा गया है.
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आखिर क्यों पहुंची CID? जाली हस्ताक्षर का पेंच
आधिकारिक तौर पर सीआईडी ने इस यात्रा का उद्देश्य स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन सूत्रों के हवाले से जानकारी सामने आयी है कि मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा में शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाने के लिए सौंपे गये समर्थन पत्र से जुड़ा है.
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जाली हस्ताक्षर का आरोप
विधानसभा सचिवालय ने इस पत्र पर किये गये कुछ हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता पर संदेह जताया है. आरोप है कि इनमें से कुछ हस्ताक्षर ‘जाली’ हो सकते हैं. इसी मामले की कड़ियां जोड़ते हुए सीआईडी की टीम अभिषेक बनर्जी से पूछताछ या किसी दस्तावेज के सत्यापन के लिए पहुंची थी.
घर पर नहीं, बेलेघाटा में दिखे अभिषेक
जब सीआईडी की टीम उनके घर का दरवाजा खटखटा रही थी, तब अभिषेक बनर्जी कोलकाता के ही बेलेघाटा इलाके में थे. वे वार्ड नंबर 35 में चुनाव के दौरान मारे गये तृणमूल कार्यकर्ता विश्वजीत पटनायक के घर पहुंचे थे. इस दौरान उनके साथ तृणमूल विधायक कुणाल घोष भी मौजूद थे. अभिषेक ने शोक संतप्त परिवार को ढाढ़स बंधाया और हरसंभव मदद का भरोसा दिया.
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CID at Abhishek Banerjee House: टीएमसी बोली- बदले की कार्रवाई
तृणमूल कांग्रेस ने सीआईडी की इस सक्रियता को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के इशारे पर की गयी प्रतिशोध की राजनीति करार दिया है. पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि कोयला तस्करी और शिक्षक भर्ती घोटाले के बाद अब नये-नये आधारहीन मामले बनाकर अभिषेक बनर्जी को परेशान करने की कोशिश की जा रही है.
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