भाजपा का पाखंड उजागर, देशभक्ति के नाम पर दोहरा रवैया : तृणमूल

असम में बांग्लादेश का राष्ट्रगान ‘आमार सोनार बांग्ला’ को लेकर सियासी घमासान जारी है. इसे लेकर कांग्रेस और भाजपा पहले से ही आमने-सामने हैं.

असम में आमार सोनार बांग्ला गीत को लेकर विवाद पर तृणमूल कांग्रेस का हमला

संवाददाता, कोलकाता

असम में बांग्लादेश का राष्ट्रगान ‘आमार सोनार बांग्ला’ को लेकर सियासी घमासान जारी है. इसे लेकर कांग्रेस और भाजपा पहले से ही आमने-सामने हैं. इसी बीच, तृणमूल कांग्रेस ने भी मामले को लेकर भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. असल में विवाद की शुरुआत असम के श्रीभूमि में कांग्रेस की एक सभा में बांग्लादेश का राष्ट्रगान आमार सोनार बांग्ला बजाने से हुई. सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही राजनीतिक घमासान शुरू हो गया. उसके बाद ही असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ‘आमार सोनार बांग्ला’ गाने पर कांग्रेस नेताओं व कार्यकर्ताओं पर देशद्रोह, राजद्रोह और राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों के तहत मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था. तृणमूल ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि भाजपा का पाखंड उजागर हो गया है. असम में कांग्रेसी नेताओं व कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई भाजपा की ‘खुली दोहरी राजनीति’ बताया है. देशभक्ति के नाम पर भगवा दल का दोहरा रवैया है. एक्स पर तृणमूल के आधिकारिक पेज से जारी बयान में आरोप लगाया गया कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा वही नेता हैं, जिन्होंने कुछ महीने पहले जनगणना के दौरान ‘बांग्ला’ को मातृभाषा लिखने वालों को ‘विदेशी’ कहा था. यह ‘घृणा फैलाने वाली राजनीति’ भाजपा की पहचान बन चुकी है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का मौन समर्थन प्राप्त है. पार्टी ने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने पांच फरवरी 2014 को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड की रैली में खुद ‘आमार सोनार बांग्ला, आमी तोमाय भालोबाशी’ गाकर बंगाल के लोगों का समर्थन मांगा था. तृणमूल ने तंज कसते हुए कहा कि अगर असम के सीएम सरमा के नियम लागू किये जायें, तो प्रधानमंत्री मोदी को भी तब ‘देशद्रोह’ के आरोप में गिरफ्तार कर लेना चाहिए था. भाजपा के लिए देशभक्ति कोई भावना नहीं, बल्कि सत्ता का औजार है.

जब भाजपा के नेता या प्रधानमंत्री बंगाली संस्कृति को अपनाते हैं, तो वह ‘राष्ट्रीय एकता’ कहलाती है. लेकिन जब विपक्ष वही करता है, तो उसे देशद्रोह कहा जाता है. यह कोई पहली बार नहीं है, जब भाजपा ने अपने ही बयानबाजी के जाल में खुद को फंसा लिया. ‘देशद्रोह’ के नाम पर विपक्ष को डराना-धमकाना ही, अब उनकी राजनीति का केंद्र बन गया है. लेकिन जब बात अपने नेताओं की आती है, तो सारे कानून, सारे नियम भुला दिये जाते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Akhilesh kumar singh

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >