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West Bengal Voter List: इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) ने पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद वोटर लिस्ट जारी करना शुरू कर दिया है शनिवार को अधिकारियों ने बताया कि वोटर लिस्ट फेज वाईज जारी होंगे. उनका कहना है कि बांकुड़ा जैसे कुछ जिलों में मतदाता सूची की ‘हार्ड कॉपी’ उपलब्ध करा दी गयी है.
बांकुड़ा में 1.35 लाख वोटर के नाम हटाये जाने की आशंका
सूची निर्वाचन आयोग के पोर्टल eci.gov.in पर अपलोड हो गया है. वोटर अब ऑनलाइन पता कर सकेंगे कि मतदाता सूची में उनका नाम है या नहीं. मतदाता सूची से हटाये गये नामों की कुल संख्या के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गयी है. बांकुड़ा जिले से 1.35 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाये जाने की आशंका जतायी जा रही है.
7.08 करोड़ वोटर को 3 श्रेणियों में बांटा जायेगा
वोटर लिस्ट के प्रकाशन से 7.08 करोड़ मतदाताओं को ‘स्वीकृत’, ‘हटाये गये’ या ‘विचाराधीन’ के रूप में वर्गीकृत किया जायेगा. विचाराधीन की श्रेणी में वैसे वोटर्स को रखा गया है, जिनके नामों की न्यायिक अधिकारियों द्वारा वर्तमान में जांच की जा रही है. सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जारी होने के बाद पता चलेगा कि किन लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल किये गये हैं और किनके नाम हटाये गये हैं.
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116 दिन लगे वोटर लिस्ट जारी करने में निर्वाचन आयोग को
पश्चिम बंगाल में एसआईआर की प्रक्रिया 4 नवंबर 2025 को मतदाताओं के बीच जनगणना प्रपत्रों के वितरण के साथ शुरू हुई थी. निर्वाचन आयोग को राजनीतिक उथल-पुथल, दस्तावेज सत्यापन नियमों में संशोधन और कानूनी चुनौतियों के बीच इस प्रक्रिया को अस्थायी रूप से पूरा करने और अंतिम लेकिन अपूर्ण सूची प्रकाशित करने में 116 दिन लगे.
58 लाख से अधिक वोटर के नाम वोटर लिस्ट से हटाये गये
मसौदा मतदाता सूची यानी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 16 दिसंबर 2025 को प्रकाशित हुई थी. इसके अनुसार, मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.08 करोड़ रह गयी. मसौदा मतदाता सूची में शामिल मतदाताओं को इस आधार पर गणना प्रपत्र वितरित किये गये थे कि उनके नाम अगस्त 2025 तक राज्य की मतदाता सूची में शामिल हैं. 58 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम मृत्यु, प्रवास, नाम दोहराव या पता नहीं मिलने के कारण हटा दिये गये.
दूसरे चरण में 1.36 करोड़ वोटर लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी की श्रेणी में
दूसरे चरण में 1.67 करोड़ मतदाताओं पर विचार किया गया. इनमें से 1.36 करोड़ मतदाताओं के संबंध में ‘तार्किक विसंगतियां’ पायी गयीं और 31 लाख मतदाताओं की ‘मैपिंग’ (दस्तावेजों का मिलान) नहीं हुई थी. लगभग 60 लाख मतदाताओं के नाम अब भी जनगणना प्रपत्रों में ‘तार्किक विसंगतियों’ के आधार पर कानूनी कार्रवाई के अधीन हैं. बंगाल में एसआईआर 2002 के बाद से इस तरह का पहला राज्यव्यापी अभ्यास है.
बंगाल में एसआईआर : एक नजर में
- 4 नवंबर 2025 को जनगणना प्रपत्रों के वितरण के साथ शुरू हुई एसआईर की प्रक्रिया
- 16 दिसंबर 2025 को प्रकाशित हुआ ड्राफ्ट वोटर लिस्ट
- 7.66 करोड़ वोटर थे पश्चिम बंगाल में दिसंबर 2025 से पहले
- 7.08 करोड़ वोटर रह गये पश्चिम बंगाल के ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में
- 7.08 करोड़ वोटर्स को मतदाता सूची में 3 श्रेणियों में बांटा जायेगा
- 58 लाख से अधिक नाम हटा दिये गये वोटर लिस्ट से
58 लाख लोगों को हटाये जाने की वजह
- मृत्यु
- प्रवास
- नाम दोहराव
- पहचान नहीं हो पाया
- वोटर का पता नहीं लगाया जा सका
1.67 करोड़ मामलों की सेकेंड फेज में हुई सुनवाई
- 1.36 करोड़ ‘तार्किक विसंगतियों’ यानी लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी के मामले
- 31 लाख की नहीं हो पायी मैपिंग
- 60 लाख मतदाताओं के मामले अब भी विचाराधीन
कहां मिलेगी मतदाता सूची
- जिला और उप-मंडल कार्यालयों
- मतदान केंद्रों
- निर्वाचन आयोग की वेबसाइट
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