खास बातें
Bengal Census: लंबे इंतजार के बाद पश्चिम बंगाल में जनगणना (Census) की सुगबुगाहट तेज हो गयी है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य में 1 अगस्त 2026 से फरवरी 2027 तक जनगणना कराने का फैसला किया है. इस व्यापक अभियान के लिए सरकार ने कमर कस ली है. इस कदम से विपक्षी खेमों में हलचल तेज है, लेकिन मुख्यमंत्री ने कहा है कि इस प्रक्रिया का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है. यह विशुद्ध रूप से विकास योजनाओं को सही लाभार्थियों तक पहुंचाने का एक प्रशासनिक जरिया है.
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बंगाल सरकार ने जनगणना की प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए एक विस्तृत समय-सीमा (Timeline) तय की है.
- शुरुआत (1 अगस्त): अगस्त के पहले सप्ताह से प्रगणकों (Enumerators) की टीम घर-घर जाकर डेटा जुटाना शुरू करेगी.
- विस्तार : यह प्रक्रिया अगले कई महीनों तक चलेगी, जिसमें राज्य के सभी 23 जिलों, नगरपालिकाओं और ग्रामीण क्षेत्रों को कवर किया जायेगा.
- समापन (फरवरी 2027): फरवरी 2027 के अंत तक डेटा संग्रह का मुख्य चरण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
शुभेंदु अधिकारी का नो पॉलिटिक्स कार्ड
जनगणना को लेकर उठ रहे सवालों के बीच मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है. उनका तर्क है कि वर्ष 2011 के बाद से बंगाल की जनसंख्या में बड़ा बदलाव आया है. बिना सटीक आंकड़ों के ‘अन्नपूर्णा भंडार’ जैसी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है.
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राष्ट्रीय सुरक्षा और संसाधन
उन्होंने कहा कि जनगणना से राज्य के संसाधनों के वितरण में पारदर्शिता आयेगी. यह किसी विशेष समुदाय या समूह को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि बंगाल के भविष्य के निर्माण के लिए है. मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी है कि जनगणना के काम में बाधा डालने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, क्योंकि यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है.
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डिजिटल होगी जनगणना, कागज-कलम का इस्तेमाल कम
- इस बार की जनगणना कई मायनों में आधुनिक होगी. जनगणना करने वाले अपने साथ टैबलेट या मोबाइल ऐप लेकर चलेंगे, जिससे डेटा सीधे सरकारी सर्वर पर अपलोड होगा. इससे गड़बड़ी की गुंजाइश कम होगी.
- जून और जुलाई के महीने में हजारों सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों को जनगणना के विशेष सॉफ्टवेयर्स के लिए प्रशिक्षित किया जायेगा.
- बंगाल की विविधता को देखते हुए फॉर्म बांग्ला, हिंदी, अंग्रेजी और नेपाली (पहाड़ी क्षेत्रों के लिए) भाषाओं में उपलब्ध होंगे.
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Bengal Census 2026: विपक्ष की आशंका और प्रशासनिक चुनौतियां
भले ही सरकार इसे गैर-राजनीतिक बता रही हो, लेकिन टीएमसी और अन्य विपक्षी दल इसे सॉफ्ट एनआरसी (NRC) के रूप में देख रहे हैं. विपक्षी नेताओं का आरोप है कि डेटा संग्रह के बहाने लोगों की नागरिकता पर सवाल खड़े किये जा सकते हैं. प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सीमावर्ती जिलों और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में सटीक डेटा जुटाना है.
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