चाय बागानों की भूमि के उपयोग की योजना

कोलकाता : बंद पड़े चाय बागानों के कामगारों की तकलीफ को ध्यान में रखते हुए पश्चिम बंगाल के चाय बागान की 15 प्रतिशत भूमि को किसी वैकल्पिक इस्तेमाल के लिए पेश करने की योजना है. प्रदेश के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने आज विधानसभा को यह जानकारी दी. एक प्रश्न का उत्तर देते हुए श्री […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
कोलकाता : बंद पड़े चाय बागानों के कामगारों की तकलीफ को ध्यान में रखते हुए पश्चिम बंगाल के चाय बागान की 15 प्रतिशत भूमि को किसी वैकल्पिक इस्तेमाल के लिए पेश करने की योजना है. प्रदेश के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने आज विधानसभा को यह जानकारी दी.
एक प्रश्न का उत्तर देते हुए श्री मित्रा ने कहा कि खेती के लिए भूमि के वैकल्पिक इस्तेमाल से कामगारों को मदद मिलेगी. इस बार में अलीपुरद्वार की प्रशासनिक बैठक में विचार विमर्श किया गया था. श्री मित्रा विपक्ष के बंद पडे चाय बागानों के बारे में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा उत्तर बंगाल में और राज्य के श्रम मंत्री मलय घटक द्वारा कल दिये गये अंतरविरोधी बयानों के आरोपों का उत्तर दे रहे थे. श्री मित्रा ने कहा कि सरकार छह चाय बागानों रेड बैंक, सुरेंद्र नगर, धारानीपुर, देखलापारा, बंदापानी, मधु और रहीमाबाद के अधिग्रहण की ओर ध्यान दे रही है.
मंत्री ने कहा कि सरकार ने पहले दार्जिलिंग और डुवार्स में पांच परित्यक्त चाय बागानों के लिए जो तरीका अपनाया था, फिर वही तरीका अपना सकती है. प्रदेश सरकार ने बोली के जरिये इन बागानों का अधिग्रहण करने के बाद इन बागानों की नीलामी कर दी थी. डंकन के बंद पड़े सात चाय बागानों पर केंद्र की भूमिका की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि तीन महीने के अधिग्रहण के बाद भी कोई प्रगति नहीं हुई है. अभिरुचि पत्र को जारी किया गया, लेकिन अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई है और कामगार संकट में हैं.
हालांकि प्रदेश सरकार ने कामगारों के लिए कई उपाय किये हैं. श्री मित्रा ने कहा कि प्रदेश सरकार ने 3,185 कामगारों को पेंशन की पेशकश की, जबकि हजारों कामगारों को सामाजिक योजनाओं और आइसीडीएस के जरिये लाभ प्राप्त हुआ.
चाय बागानों को लेकर विरोधाभास : मन्नान
विधासनभा में विपक्ष के नेता अब्दुल मन्नान ने कहा कि चाय बागानों को लेकर सरकारी मंत्रियों के बयान को लेकर विरोधाभास है. उन्होंने कहा कि कल वित्त मंत्री अमित मित्रा ने कहा कि विधानसभा से बाहर कोई घोषणा नहीं की जाती है, लेकिन मुख्यमंत्री ने चाय बागानों को लेकर क्या विधानसभा में घोषणा की है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार चाय श्रमिकों को राहत नहीं दे रही है, वरन उनके हितों का हनन कर रही है. चाय बागान बंद हैं, लेकिन सरकार के मंत्री स्वीकार नहीं कर रहे हैं और चाय बागानों में चाय श्रमिकों की मृत्यु को भी झुठला रहे हैं.
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