I-PAC क्या है, जिसके दफ्तर पर ED की छापेमारी से बौखला गई हैं ममता बनर्जी?

I-PAC एक राजनीतिक सलाहकार कंपनी है, जो राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति बनाने में मदद करती है. इस संस्था के वेबसाइट पर जाएं, तो हमें एक बेहतरीन स्लोगन लिखा मिलता है–Reshaping participatory democracy. इससे यह जाहिर होता है कि यह संस्था, यह दावा करती है कि वह देश में लोकतंत्र को बेहतर बनाने में जुटी है. इस संस्था के संस्थापक हैं रणनीतिकार और जनसुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर. ऐसे में यह सवाल लाजिमी है कि आखिर I-PAC का कोयला घोटाला से क्या संबंध है, जिससे तार जुड़े होने का दावा करते हुए ईडी ने संस्थान से जुड़े कई ठिकानों पर रेड किया है.

By Rajneesh Anand | January 8, 2026 7:17 PM

I-PAC (Indian Political Action Committee), यह नाम आज सुबह से चर्चा में है , इसकी वजह है, आईपैक से जुड़े कई ठिकानों और इसके एक प्रमुख डायरेक्टर प्रतीक जैन के ठिकानों पर ईडी की रेड हुई है. ईडी का कहना है कि यह रेड कोयला घोटाले से जुड़ी है और संस्थान तक भी इस घोटाले का पैसा पहुंचा है. हालांकि इस रेड से बंगाल के साथ–साथ पूरे देश की राजनीति में खलबली मचा दी है, लेकिन बंगाल चुनाव से पहले जिस तरह यह रेड हुई है, इसने आम लोगों के मन में कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं.

ममता बनर्जी का आरोप है कि बीजेपी चुनाव से पहले उनकी पार्टी टीएमसी के आईटी सेल के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, ताकि उन्हें पार्टी की गुप्त जानकारी मिल जाए. ममता बनर्जी ने इस ईडी रेड को साजिश करार दिया और जहां रेड हो रही थी वहां पहुंचकर कई फाइलें वहां से लीं और सरकार पर एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया. आखिर क्या है I-PAC, जिसके कार्यालय पर रेड से ममता बनर्जी परेशान हैं? इस संस्थान का टीएमसी के आईटी सेल से क्या संबंध है? क्या I-PAC का टीएमसी के अतिरिक्त अन्य किसी पार्टी से भी संबंध रहा है और यह संस्था काम क्या करती है? इसके संस्थापक प्रशांत किशोर क्या अब भी इससे जुड़े हैं, इन तमाम सवालों का जवाब इस आलेख में पढ़ें.

क्या है I-PAC?

प्रतीक जैन, आईपैक के डायरेक्टर

I-PAC (Indian Political Action Committee) खुद को एक राजनीतिक सलाहकार और रणनीति बनाने वाली कंपनी बताती है. इसका कार्यक्षेत्र राजनीति है, लेकिन यह किसी खास पार्टी के लिए काम नहीं करते हैं. इनका उद्देश्य राजनीतिक दलों को सलाह देना, उन्हें चुनावी रणनीति बनाने में मदद करना और डेटा कलेक्ट करना है, जिनके आधार पर भावी रणनीति बनाई जा सके. संस्था देश के युवाओं का आह्वान करती है कि वे अपने देश की राजनीति में भागीदारी के लिए उनकी संस्था ज्वाइन करें और राजनीतिक दलों को नागरिक आधारित एजेंडा तैयार करने में मदद और सलाह उपलब्ध करा सकें. इस संस्थान की स्थापना 2013 में Citizens for Accountable Governance (CAG) नाम से प्रशांत किशोर ने की थी, बाद में यह संस्था I-PAC के रूप में विकसित हुई.


2014 के चुनाव में नरेंद्र मोदी के लिए रणनीति बनाने में निभाई थी अहम भूमिका


2014 के लोकसभा चुनाव में I-PAC ने बीजेपी के लिए काम किया था और उसने इस चुनाव में पार्टी को यह सलाह दिया था कि वह अपनी रणनीतियों को युवाओं से जोड़कर बनाएं, क्योंकि युवा वोटर्स की संख्या देश में बहुत अधिक थी. कहा जाता है कि चाय पर चर्चा जैसे कार्यक्रम इसी संस्था की रणनीतियों का हिस्सा थे. इस चुनाव में बीजेपी को सफलता मिली थी और देश में पूर्ण बहुमत से बीजेपी की सरकार बनी थी.उसके बाद इस संस्था ने 2015 में नीतीश कुमार के लिए काम किया. उसके बाद कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और फिर टीएमसी के साथ संस्था का नाम जुड़ा.


कैसे काम करता है I-PAC ?

I-PAC का काम बहुत ही व्यवस्थित तरीके से होता है और यह काफी गहराई से डाटा का विश्लेषण और उसका अध्ययन करता है. इसके साथ ही यह समय के अनुकूल रणनीति बनाने और अभियानों का नेतृत्व करने के लिए भी जाना जाता है. इसके साथ ही यह राजनीतिक दलों के आईटी सेल के रखरखाव और उसके संचालन का काम भी करता है.

I-PAC और टीएमसी के बीच क्या संबंध है?

I-PAC के लिए टीएमसी एक क्लाइंट है, जिसे सलाह देना और उसके बेहतर प्रदर्शन के लिए रणनीति बनाना आईपैक का काम है, जिसके एवज में संस्थान को टीएमसी की ओर से भुगतान किया जाता है. टीएमसी और आईपैक का संबंध 2019 से बनना शुरू हुआ और 2021 के विधानसभा चुनाव में इस जोड़ी ने विधानसभा चुनाव में सफलता हासिल की, जिसके बाद से यह संबंध काफी मजबूत हो गया. कोलकाता में आईपैक का कार्यालय भी है.

कौन है प्रतीक जैन, जिसे बताया जा रहा है टीएमसी का आईटी सेल हेड?

प्रतीक जैन I-PAC के तीन डायरेक्टर्स में से एक हैं. उनके अतिरिक्त जो दो और डायरेक्टर हैं, उनके नाम हैं–ऋषि राज सिंह और विनेश चांदेल.प्रतीक जैन आईआईटी बंबई से ग्रेजुएट हैं. वे I-PAC के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं. जब प्रशांत किशोर ने 2021 से खुद को आईपैक के कार्यों से अलग करना शुरू कर दिया, तो प्रतीक जैन खुलकर सामने आए और नेतृत्व संभाला. अभी आईपैक टीएमसी के लिए सलाहकार का काम कर रही है, लेकिन प्रतीक जैन अपने बायो में यह नहीं बताते हैं कि वे टीएमसी के आईटी सेल के मैनेजर या हेड हैं. हालांकि ममता बनर्जी ने यह स्पष्ट कहा है कि आज जो रेड हुआ, वह उनके आईटी हेड के यहां हुआ है.

I-PAC क्या काम करती है?

I-PAC राजनीतिक सलाह देने का काम करती है.

I-PAC का पुराना नाम क्या था?

Citizens for Accountable Governance (CAG) आईपैक का पुराना नाम था.

I-PAC की स्थापना कब और किसने की थी?

I-PAC की स्थापना 2013 में प्रशांत किशोर ने की थी.

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