सख्ती: वायु प्रदूषण पर मांगा बंगाल से भी जवाब

नयी दिल्ली: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सात राज्यों से पूछा है कि उनके राज्य का सबसे प्रदूषित शहर कौन है. साथ ही कहा है कि सभी राज्यों के वकील अगर मंगलवार(31 मई) तक यह नहीं बता पाये कि उनके राज्य का कौन-सा शहर सबसे ज्यादा प्रदूषित है, तो संबंधित राज्य के मुख्य सचिव के […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
नयी दिल्ली: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सात राज्यों से पूछा है कि उनके राज्य का सबसे प्रदूषित शहर कौन है. साथ ही कहा है कि सभी राज्यों के वकील अगर मंगलवार(31 मई) तक यह नहीं बता पाये कि उनके राज्य का कौन-सा शहर सबसे ज्यादा प्रदूषित है, तो संबंधित राज्य के मुख्य सचिव के खिलाफ वारंट जारी कर दिया जायेगा.

ये राज्य हैं – महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, पंजाब, पश्चिम बंगाल. एनजीटी ने प्रदूषण पर स्पष्ट रुख नहीं अपनाने और बड़े शहरों में ज्यादा वाहन पर रोक नहीं लगाने के लिए सोमवार को इन सात राज्य सरकारों को लताड़ लगायी. एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार ने सात राज्यों के 11 शहरों में बढ़ते प्रदूषण के मामले में दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान यह कड़ा निर्देश जारी किया. पीठ ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को भी जनसंख्या और देश के बड़े शहरों में वाहनों की संख्या पर ‘आधे-अधूरे’ आंकड़े मुहैया कराने के लिए लताड़ लगायी. सुनवाई के दौरान केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण पर्षद (सीपीसीबी) ने 11 शहरों के वायु प्रदूषण का आंकड़ा एनजीटी को सौंपा.

सीपीसीबी की रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि अधिकतर शहरों में हवा की गुणवत्ता अनुमान्य मानक से ज्यादा है. भारी उद्योग मंत्रालय ने 11 बड़े शहरों में डीजल गाड़ियों को बैन नहीं किये जाने के लिए एनजीटी में हस्तक्षेप याचिका दायर की थी. इसी पर एनजीटी ने सुनवाई की. याचिका में भारी उद्योग मंत्रालय ने 11 शहरों में नयी डीजल गाड़ियों पर बैन नहीं लगाने की गुहार की है.
कोलकाता समेत 11 शहरों का आंकड़ा मांगा
11 बड़े शहरों में लगातार बढ़ रहे वायु प्रदूषण को लेकर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने एनजीटी के समक्ष पटना समेत 11 शहरों की रिपोर्ट सौंपी, लेकिन एनजीटी इससे संतुष्ट नहीं हुआ. जिन शहरों का डाटा फिर मांगा गया है, उनमें लखनऊ, पटना, पुणे, बेंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता, मुंबई, कानपुर, जालंधर, वाराणसी, अमृतसर शामिल हैं.
बैन लगा, तो रोजगार छिनेगा : केंद्र
भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उपक्रम मंत्रालय ने एनजीटी से कहा कि 2000 सीसी से उपर के डीजल वाहनों के पंजीकरण पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से से लगायी गयी पाबंदी को दूसरे शहरों तक नहीं बढ़ाया जाये.मंत्रालय की ओर से कहा गया कि प्रदूषण बढ़ने की कोई प्रामाणिक रिपोर्ट नहीं है. डीजल गाड़ियों पर बैन लग जाने से ऑटोमोबाइल उद्योग से जुड़े तीन करोड़ लोगों का रोजगार सीधे तौर पर प्रभावित होगा. मालूम हो कि फिलहाल दिल्ली-एनसीआर में डीजल गाड़ियां बैन हैं.
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