शरत चंद्र का घर पर्यटन स्थल

हावड़ा: बागनान के सामताबेड़ स्थित कहानीकार शरत चंद्र चट्टोपाध्याय के घर को जल्द ही पर्यटन स्थल बनाया जायेगा. जमीन नहीं मिलने के कारण वर्षो से यह काम रुका था. हावड़ा जिला परिषद व सिंचाई विभाग की पहल पर यह विवाद सुलझा लिया गया है. दिसंबर से काम शुरू हो जायेगा. 45 लाख की लागत से […]

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हावड़ा: बागनान के सामताबेड़ स्थित कहानीकार शरत चंद्र चट्टोपाध्याय के घर को जल्द ही पर्यटन स्थल बनाया जायेगा. जमीन नहीं मिलने के कारण वर्षो से यह काम रुका था. हावड़ा जिला परिषद व सिंचाई विभाग की पहल पर यह विवाद सुलझा लिया गया है. दिसंबर से काम शुरू हो जायेगा. 45 लाख की लागत से शरत चंद्र के घर को पर्यटन स्थल बनाया जायेगा.

स्थानीय विधायक अरुनाभ सेन ने बताया कि वामो के शासनकाल में केंद्र सरकार ने वामो शासित हावड़ा जिला परिषद को पर्यटन स्थल के निर्माण के लिए 35 लाख रुपये आबंटित किये थे. यह पर्यटन स्थल शरत चंद्र के घर से सटे बनाने का निर्णय लिया गया था, लेकिन उस समय किसानों ने अपनी जमीन सरकार को नहीं दी. इसके कारण राशि केंद्र सरकार को लौटा दी गयी. जिला परिषद में तृणमूल बोर्ड के गठन के बाद यहां के किसानों से दोबारा बातचीत की गयी. बातचीत में किसानों ने अपनी शर्त रखी. दोनों पक्ष के बीच समझौता होने पर किसान अपनी जमीन छोड़ने के लिए तैयार हो गये. विधायक ने बताया कि पर्यटन स्थल के लिए केंद्र सरकार ने 35 लाख रुपये, जबकि जिला परिषद ने 10 लाख रुपये आबंटित किया है. पर्यटन स्थल में थीम पार्क, रात्रिकालीन आवास गृह व शौचालय बनाये जायेंगे. इसके अलावा यहां तक आनेवाली सड़कें दुरुस्त की जायेंगी.

जीवन के आखिरी दिन यहीं बीते
शरत चंद्र चट्टोपाध्याय के जीवन के आखिरी 12 साल (1926-38) इसी घर में बीते. यहां उन्होंने कई उपन्यास व कहानियां लिखीं. इन 12 वर्षो में उन्होंने अभागीर स्वर्ग, वामूनेर मेय, रामेर सूमति, पल्ली समाज, श्रीकांत आदि कई उपन्यास लिखे. उन दिनों कई स्वंत्रता सेनानियों ने शरत चंद्र के घर पर गोपनीय तरीके से बैठक भी की थी. सुभाष चंद्र बोस, बिपिन बिहारी गांगुली, देशबंधु चितरंजन दास यहां अक्सर आते थे. चितरंजन दास ने जेल में जाने से पहले शरत चंद्र को राधा-कृष्ण की मूर्ति बतौर उपहार भेंट की थी, जो आज भी इस घर में सुरक्षित रखी हुई है.

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