डायरिया नियंत्रण
कोलकाता : मॉनसून में डायरिया से निबटने के मकसद से ओआरएस घोल और जिंक गोलियों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार इस डायरिया नियंत्रण पखवाड़े में करीब 70-75 लाख बच्चों तक पहुंचने की कोशिश करेगी.
इस हफ्ते बजबज से शुरू हुए इस कार्यक्रम का फोकस ओआरएस और जिंक गोलियों के सेवन को बढ़ावा देकर डायरिया को नियंत्रण करने के बारे में जागरूकता फैलाना है. यूनिसेफ में स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ कनीनिका मित्र ने बताया कि राज्य में जिंक की गोलियों और ओआरएस का घोल इस्तेमाल करनेवालों की संख्या बहुत ज्यादा नहीं है, इसलिए हम इसे बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं.
मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य संगठन ‘आशा’ की कार्यकर्ता घर-घर जा रही हैं और उन परिवारों को जिंक की गोलियां दे रही हैं, जिनके घर में पांच साल की उम्र से कम के बच्चे हैं. यह अस्पतालों में भी मुहैया करायी जा रही है.
राज्य सरकार इस कार्यक्रम को लागू करने के लिए यूनिसेफ के साथ मिलकर काम कर रही है. उन्होंने कहा कि हम इस अभियान के जरिये तकरीबन 70-75 लाख बच्चों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. अभियान के दूसरे हफ्ते का फोकस शिशुओं और छोटे बच्चों के पोषण पर होगा. डायरिया नियंत्रण पखवाड़ा ऐसे वक्त हो रहा है, जब 29 जुलाई को ओआरएस दिवस है. साथ ही हर वर्ष एक से सात अगस्त तक मानाया जानेवाला विश्व स्तनपान सप्ताह पड़ रहा है.