खाद्य सुरक्षा बिल पर पुनर्विचार की जरूरत

कोलकाता: नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने कहा कि केंद्र सरकार के खाद्य सुरक्षा बिल पर पुनर्विचार करने की जरूरत है. वह सोमवार को प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय में दीपक बनर्जी मेमोरियल लेक्चर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. श्री सेन ने कहा कि खाद्य सुरक्षा बिल को शुरू से ही संसदीय बिल के बजाय एक […]

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कोलकाता: नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने कहा कि केंद्र सरकार के खाद्य सुरक्षा बिल पर पुनर्विचार करने की जरूरत है. वह सोमवार को प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय में दीपक बनर्जी मेमोरियल लेक्चर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. श्री सेन ने कहा कि खाद्य सुरक्षा बिल को शुरू से ही संसदीय बिल के बजाय एक अध्यादेश के रूप में प्रचारित किया जा रहा है. इस पर पुनर्विचार करते हुए स्वास्थ्य व शिक्षा क्षेत्र मे दी जानी वाली सब्सिडी कम करने की जरूरत है.

67 फीसदी आबादी को अनाज मुहैया कराने की योजना

गौरतलब है कि हाल ही में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने केंद्र सरकार के इस अध्यादेश को मंजूरी दी है, जिसके अनुसार देश के 1.2 बिलियन (67 फीसदी) लोगों को सब्सिडी पर अनाज मुहैया कराया जायेगा. जिसके तहत लोगों को एक से तीन रुपये किलो की दर से पांच किलो अनाज दिया जायेगा. इस तरह कुल 80 करोड़ लोगों को सब्सिडी पर अनाज देने के लिए सरकार को 1.3 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे.

संतुलित पोषण पर जोर

श्री सेन ने खाद्य सुरक्षा बिल के बारे में कई तरह से विचार करने की बात कहीं. उन्होंने तकनीकी दक्षता की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि लोगों को दिये जाने वाले अनाजों के विकल्प के लिए भी इस बिल के लिए कई तरह के सवाल पैदा होंगे. उन्होंने देश के लोगों को संतुलित पोषण देने के लिए कई दूसरे उपायों पर विचार करने की बात कहीं. इनमें तकनीकी दक्षता को उन्होंने बेहद महत्वपूर्ण बताया. इसी क्रम में उन्होंने डीजल पर दी जाने वाली सब्सिडी के बारे में कहा कि विश्व में कई ऐसे देश हैं जहां ईंधन पर सब्सिडी नहीं दी जाती है.

इससे पहले श्री सेन ने विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र विभाग के पूर्व प्रोफेसर दीपक बनर्जी के नाम पर एक स्टडी रूम का उदघाटन किया. उन्होंने कहा कि प्रोफेसर बनर्जी द्वारा अर्थशास्त्र के क्षेत्र में किया गया शोध इस विषय की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है.

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