18th Century Paramilitary Force Revival: पश्चिम बंगाल की सत्ता संभालने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार सूबे की कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कमर कस चुकी है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सिंडिकेटराज और बाहुबलियों की नकेल कसनी शुरू कर दी है. इस बीच, प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि बंगाल की नयी सरकार राज्य के सीमावर्ती और अशांत इलाकों में सुरक्षा-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 18वीं सदी के ऐतिहासिक और पारंपरिक अर्धसैनिक बल (Paramilitary Force) को नये रूप में पुनर्जीवित (Revival) करने पर विचार कर रही है.
जब डकैतों और उपद्रवियों का काल बना था पारंपरिक बल
जिस अर्धसैनिक बल के पुनरुद्धार की बात कही जा रही है, उसका गौरवशाली इतिहास 18वीं सदी (ब्रिटिश काल और उससे पहले) से जुड़ा है. उस दौर में बंगाल के ग्रामीण इलाकों, जंगलों और तटीय क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाये रखने, खूंखार डकैतों का सफाया करने और सीमापार से घुसपैठ रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर विशेष अर्धसैनिक दस्ते का गठन किया गया था.
स्थानीय भूगोल के उस्ताद थे जवान
इस पारंपरिक बल के जवान क्षेत्र के भूगोल से पूरी तरह वाकिफ होते थे. इनकी छापामार युद्ध शैली और त्वरित कार्रवाई इतनी अचूक थी कि बड़े से बड़े अपराधी और उपद्रवी इनके नाम से कांपते थे. आजादी के बाद और फिर दशकों लंबे वामपंथी व टीएमसी राज के दौरान आधुनिक पुलिसिंग के आने से यह पारंपरिक ढांचा पूरी तरह हाशिये पर चला गया और धीरे-धीरे इतिहास के पन्नों में दफन हो गया.
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18वीं सदी के सुरक्षा मॉडल की जरूरत क्यों?
बंगाल चुनाव 2026 में जीत के बाद भाजपा और शुभेंदु अधिकारी सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य के सुदूर ग्रामीण इलाकों, विशेषकर दक्षिण 24 परगना, मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाना है.
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18th Century Paramilitary Force Revival: लोकल इंटेलिजेंस की कमी होगी दूर
आधुनिक पुलिस बल के पास अक्सर स्थानीय स्तर पर खुफिया जानकारी (Local Intelligence) की कमी होती है. अगर इस पारंपरिक बल को आधुनिक हथियारों और नयी ट्रेनिंग के साथ दोबारा खड़ा किया जाता है, तो यह स्थानीय स्तर पर सुरक्षा का एक अभेद्य चक्रव्यूह तैयार कर सकता है.
घुसपैठ और सिंडिकेट पर लगेगा लगाम
भारत-नेपाल और भारत-बांग्लादेश सीमा के करीब जहांगीर खान जैसे बाहुबलियों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने और सीमा पार से होने वाली अवैध गतिविधियों को रोकने में यह बल राज्य पुलिस के लिए एक बड़े ‘गेम चेंजर’ के रूप में काम कर सकता है.
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