कोलकाता : वामपंथ ने बंगाली हिंदुओं का किया सर्वनाश : तथागत

कोलकाता : अपने बेबाक विचारों के कारण प्राय: विवादों में रहनेवाले मेघालय के राज्यपाल व प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष तथागत राय की नयी पुस्तक ‘सर्वनाशेर घंटा’ दुर्गा पूजा के बाद प्रकाशित होगी. बांग्ला भाषा में प्रकाशित होनेवाली पुस्तक की पांडुलिपि तैयार हो गयी है. पुस्तक प्रकाशन के लिए भेजी जा चुकी है. पुस्तक का […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

कोलकाता : अपने बेबाक विचारों के कारण प्राय: विवादों में रहनेवाले मेघालय के राज्यपाल व प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष तथागत राय की नयी पुस्तक ‘सर्वनाशेर घंटा’ दुर्गा पूजा के बाद प्रकाशित होगी. बांग्ला भाषा में प्रकाशित होनेवाली पुस्तक की पांडुलिपि तैयार हो गयी है. पुस्तक प्रकाशन के लिए भेजी जा चुकी है. पुस्तक का प्रकाशन मित्र घोष पब्लिकेशंस द्वारा किया जायेगा.

भावी पुस्तक में बंगाली हिंदुओं पर वामपंथी विचारधारा के प्रभाव और प्रभाव के परिणामस्वरूप बंगाली हिंदुओं की दयनीय स्थिति और उस स्थिति से उबरने के उपायों पर चर्चा की गयी है. दार्शनिक भाव से लिखी गयी पुस्तक में मूलत: यह उल्लेख है कि वामपंथी विचारधारा के अपनाने से हिंदू बंगालियों को बहुत नुकसान हुआ है और वह यह मान बैठा है कि गरीबी उसकी किस्मत है. प्रभात खबर के विशेष संवाददाता अजय विद्यार्थी ने पुस्तक के विषय वस्तु पर मेघालय के राज्यपाल तथागत राय से बातचीत की. प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश :
सवाल : आप नयी पुस्तक लिख रहे हैं. वह पुस्तक क्या है और कब प्रकाशित होगी ?
जवाब : मेरी नयी पुस्तक ‘सर्वनाशेर घंटा’ शीघ्र ही प्रकाशित होगी. पुस्तक पूरी तरह से लिख चुका हूं. उसकी पांडुलिपि तैयार हो चुकी है और उसे प्रकाशित होने के लिए मित्र घोष पब्लिकेशंस को भेज चुका हूं.
उम्मीद है कि पुस्तक दुर्गापूजा के बाद प्रकाशित होगी, क्योंकि पुस्तक के प्रकाशन में समय लगता है. प्रिंटिंग के बाद प्रूफ को दो-तीन बार पढ़ना पड़ता है, ताकि कोई अशुद्धि नहीं रह जाये. लेकिन आशा है कि पुस्तक दुर्गापूजा के बाद बाजार में आ जायेगी.
सवाल : पुस्तक की विषय-वस्तु क्या है ? किस विषय पर पुस्तक लिखी गयी है?
जवाब : पुस्तक मूलत: वामपंथी विचारधारा को लेकर लिखी गयी है. दार्शनिक भाव से लिखी गयी पुस्तक में बंगालियों पर वामपंथी विचारधारा के प्रभाव, वामपंथी विचारधारा के प्रभाव के कारण बंगालियों पर उनके परिणाम और उनसे कैसे उबरा जाये? इन पहलुओं पर चर्चा की गयी है.
मेरा यह मानना है कि वामपंथी विचारधारा के कारण बंगाली हिंदुओं का बहुत नुकसान हुआ है. वामपंथी विचारधारा ने हिंदू बंगालियों को कई सदी पीछे ढकेल दिया है. इससे बंगालियों की मानसकिता बिगड़ गयी है और बंगाली गरीबी को अच्छा समझने लगे हैं. वह यह सोच ही नहीं पाते हैं कि अपनी कोशिश से गरीबी को समाप्त की जा सकती है.
वह समझते हैं कि वह जिंदगी भर गरीब ही रहेंगे. उसने गरीबी को अपनी किस्मत मान लिया है. बंगालियों की इस मानसिकता के लिए वामपंथी विचारधारा उत्तरदायी है. वामपंथी हर चीज में राजनीतिकरण करते थे.
जैसे : यदि किसी की नियुक्ति शिक्षा प्रतिष्ठानों में करनी हो, तो इसका निर्णय भी राजनीतिक स्तर पर लिया जाता था. यह नहीं देखा जाता था कि उसमें शिक्षक पद की योग्यता है या नहीं, बल्कि वामपंथी विचारधारा के प्रति उसकी निष्ठा ही उसकी योग्यता का सबसे बड़ा प्रमाण होता था.
इसके बावजूद यदि कोई व्यक्ति जो उनकी विचारधारा से समांजस्य नहीं रखता था और उसकी नियुक्ति हो जाती थी, जैसे संतोष भट्टाचार्य की नियुक्ति हुई थी, तो उसे तरह से तरह परेशान किया जाता था और पूरे राज्य में यह संस्कृति पैदा हो गयी थी. इसके चलते पूरी बंगाली जाति का सत्यनाश हो गया.
मेरी पुस्तक का विषय-वस्तु यही है, लेकिन मेरा मानना है कि वामपंथी विचारधारा का कोई असर मुसलमानों पर नहीं हुआ. यह इसलिए नहीं हुआ, क्योंकि मुसलमान को दूसरे विषय पर विश्वास है. बंगाली हिंदुओं ने वामपंथी विचाराधारा को स्वीकार किया.
इसके चलते यह सब स्थिति उत्पन्न हुई, लेकिन मुसलमानों पर इसका प्रभाव नहीं पड़ा, क्योंकि जो बंगाली मुसलमान हैं, वे अधिकांश बांग्लादेश में रहते हैं और बांग्लादेश में वामपंथी विचारधारा कोई अस्तित्व नहीं है. और पश्चिम बंगाल में जो मुसलमान वामपंथी थे, वे अभी तृणमूल हो गये. बाद में कुछ भी हो सकते हैं.
मतलब मुसलमान को इस पर कोई विश्वास नहीं है. मुसलमान गरीबी को ‘डिजायरेबल’ स्थिति भी नहीं समझते, लेकिन हिंदू समझते हैं. हिंदू को काफी नुकसान हुआ. इस नुकसान से बचने के लिए क्या किया जाये? इस पुस्तक में उस पर चर्चा है.
सवाल : क्या यह पुस्तक केवल वाममोर्चा के कार्यकाल को लेकर ही है या फिर इसमें तृणमूल कांग्रेस के कार्यकाल का भी जिक्र है?
जवाब : इसका लेफ्ट फ्रंट या टीएमएस से कोई खास मतलब नहीं है. यह जो दर्शन है, इस दर्शन के आधार पर पुस्तक लिखी गयी है. मेरा मानना है कि तृणमूल भी लेफ्टिस्ट ही है. तृणमूल और क्या है? ममता ने कैप्टलिस्ट को गाली दी. ममता ने इंडस्ट्री को पश्चिम बंगाल से खदेड़ दिया.
ममता ने खुद ही कई बार कहा है कि वह लेफ्ट विचारधारा के खिलाफ नहीं हैं. पुस्तक में किसी व्यक्ति या पार्टी के खिलाफ कोई बात नहीं है, बल्कि विचारधारा विरुद्ध बातें हैं. पुस्तक में वामपंथी शासन वाले देशों जैसे सोवियत यूनियन, चीन, कंबोडिया, उत्तर कोरिया आदि के बारे में चर्चा की गयी है कि वामपंथी शासन से वहां के लोगों क्या हानि या नुकसान पहुंचा है.
सवाल : यह पुस्तक बांग्ला है, क्या अन्य भाषा में भी प्रकाशित करने की योजना है ?
जवाब : आशा है कि यह पुस्तक पूजा के बाद प्रकाशित होगी तथा यह पुस्तक बांग्ला में है, क्योंकि विषय बंगाल का है. बंगाल के लोगों को पुस्तक में ज्यादा रुचि होगी. अगर बाद में कोई ऐसा अवसर आता है, तो इस बारे में सोचा जा सकता है. दूसरी भाषा में भाषांतर किया जा सकता है. मेरा मकसद है कि बंगाल के लोग
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