सोमनाथ के शोक संदेश पर माकपा पोलित ब्यूरो व राज्य कमेटी में मतभेद

कोलकाता : लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी को माकपा से बहिष्कृत किये जाने के फैसले को लेकर जिस तरह से माकपा पोलित ब्यूरो व बंगाल राज्य कमेटी में विवाद था. श्री चटर्जी के निधन के बाद भी यह विवाद कायम रहा. श्री चटर्जी के निधन के बाद माकपा पोलित ब्यूरो द्वारा जारी शोक संदेश […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
कोलकाता : लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी को माकपा से बहिष्कृत किये जाने के फैसले को लेकर जिस तरह से माकपा पोलित ब्यूरो व बंगाल राज्य कमेटी में विवाद था. श्री चटर्जी के निधन के बाद भी यह विवाद कायम रहा. श्री चटर्जी के निधन के बाद माकपा पोलित ब्यूरो द्वारा जारी शोक संदेश में श्री चटर्जी को न तो कॉमरेड के रूप में उल्लेख किया गया और न ही माकपा के पूर्व सांसद के रूप में उनका उल्लेख किया गया.
पोलित ब्यूरो के शोक संदेश में दिवंगत चटर्जी को लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष व 10 बार लोकसभा के सांसद रहे श्री चटर्जी को श्रद्धांजलि दी गयी. शोक संदेश में कहा कि वह एक वरिष्ठ सांसद रहे थे, जिन्होंने भारतीय संविधान के मूल तत्वों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी तथा वह एक नामी गिरामी वकील थे, लेकिन माकपा पोलित ब्यूरो के शोक संदेश में माकपा सांसद के रूप में उनका उल्लेख नहीं किया गया था.
इसे लेकर विभिन्न हलकों में काफी आलोचना शुरू हुई. उसके बाद शाम को माकपा राज्य कमेटी की बैठक हुई. माकपा राज्य कमेटी द्वारा जारी शोक संदेश में श्री चटर्जी को माकपा केंद्रीय कमेटी के पूर्व सदस्य, वरिष्ठ सांसद कॉमरेड के रूप में संबोधित किया गया. शोक संदेश में कहा गया कि वरिष्ठ कानूनविद् कॉमरेड सोमनाथ चटर्जी ने 1971 में बर्धमान लोकसभा केंद्र से माकपा के सांसद के रूप में निर्वाचित हुए थे. 1977 में जादवपुर लोकसभा क्षेत्र से विजयी हुए. 1985 से 2009 तक बोलपुर लोकसभा का प्रतिनिधित्व किया.
2004 से 2009 तक लोकसभा के अध्यक्ष पद पर रहे. राज्य कमेटी द्वारा जारी बयान में कहा गया कि कॉमरेड सोमनाथ चटर्जी गणतंत्र, धर्मनिरपेक्षता व मानवाधिकार के प्रश्न पर वामपंथियों के साथ रहे. विशेष कर राज्य में गणतंत्र पर हमले की आलोचना की और राज्य में गणतांत्रिक अधिकारों के हनन के खिलाफ आवाज उठायी. बाद में माकपा राज्य सचिव डॉ सूर्यकांत मिश्रा ने कहा कि स्वीकार किया कि कॉमरेड सोमनाथ चटर्जी केवल बंगाल ही नहीं, वरन पूरे भारत वर्ष के थे और गणतांत्रिक आंदोलन व प्रजातांत्रिक व्यवस्था को कायम करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है.
सोमनाथ को पार्टी में वापस लाना चाहते थे येचुरी, बीमारी बनी थी रोड़ा
कोलकाता. पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और सीपीएम नेता सोमनाथ चटर्जी अब इस दुनिया में नहीं रहे. सोमवार सुबह लंबी बीमारी के चलते उनका निधन हो गया. लेफ्ट की राजनीति के दिग्गज नेताओं में से एक माने जाने वाले सोमनाथ को 2008 में ही पार्टी से निकाल दिया गया था, उसके बाद जब प्रकाश करात सीपीएम के महासचिव बने तो उनके आने के रास्ते बंद हो गये थे, लेकिन 2015 में जब सीताराम येचुरी ने कमान संभाली थी, तो उन्होंने चटर्जी को वापस लाने की कोशिश की थी लेकिन इसमें उन्हें कामयाबी नहीं मिली.
दरसअल, 2008 में जब यूपीए-1 का शासन था, तब अमेरिका के साथ परमाणु करार के बाद वाम दल ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया था. उस वक्त सोमनाथ चटर्जी लोकसभा स्पीकर थे और उन्हें पद छोड़ने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया था, इसलिए उन्हें पार्टी से ही निकाल दिया गया था. यही कारण रहा कि 2014 लोकसभा चुनाव में उन्हें टिकट भी नहीं दिया गया था. राजनीतिक गलियारों में इस बात के चर्चे हमेशा रहते थे कि सोमनाथ और प्रकाश करात की नहीं बनती है.
यही कारण रहा कि उनकी वापसी मुश्किल रही, लेकिन 2016 में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले सीताराम येचुरी ने उनसे मुलाकात की थी. और पार्टी में वापसी करने को लेकर चर्चा की थी. येचुरी उनसे मिलने बोलपुर में उनके आवास तक ही पहुंच गये थे. हालांकि, बढ़ती उम्र और बीमारी के कारण वह एक्टिव पॉलिटिक्स में वापस नहीं आ पाये थे. अभी कुछ समय पहले ही सोमनाथ ने पार्टी के हालातों को लेकर चिंता व्यक्त की थी. उन्होंने लेफ्ट पार्टियों के मौजूदा हालात को लेकर प्रकाश करात को जिम्मेदार ठहराया था.
सोमनाथ को पार्टी में वापस लाना चाहते थे येचुरी, बीमारी बनी थी रोड़ा
कोलकाता. पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और सीपीएम नेता सोमनाथ चटर्जी अब इस दुनिया में नहीं रहे. सोमवार सुबह लंबी बीमारी के चलते उनका निधन हो गया. लेफ्ट की राजनीति के दिग्गज नेताओं में से एक माने जाने वाले सोमनाथ को 2008 में ही पार्टी से निकाल दिया गया था, उसके बाद जब प्रकाश करात सीपीएम के महासचिव बने तो उनके आने के रास्ते बंद हो गये थे, लेकिन 2015 में जब सीताराम येचुरी ने कमान संभाली थी, तो उन्होंने चटर्जी को वापस लाने की कोशिश की थी लेकिन इसमें उन्हें कामयाबी नहीं मिली. दरसअल, 2008 में जब यूपीए-1 का शासन था, तब अमेरिका के साथ परमाणु करार के बाद वाम दल ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया था.
उस वक्त सोमनाथ चटर्जी लोकसभा स्पीकर थे और उन्हें पद छोड़ने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया था, इसलिए उन्हें पार्टी से ही निकाल दिया गया था. यही कारण रहा कि 2014 लोकसभा चुनाव में उन्हें टिकट भी नहीं दिया गया था. राजनीतिक गलियारों में इस बात के चर्चे हमेशा रहते थे कि सोमनाथ और प्रकाश करात की नहीं बनती है.
यही कारण रहा कि उनकी वापसी मुश्किल रही, लेकिन 2016 में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले सीताराम येचुरी ने उनसे मुलाकात की थी. और पार्टी में वापसी करने को लेकर चर्चा की थी. येचुरी उनसे मिलने बोलपुर में उनके आवास तक ही पहुंच गये थे. हालांकि, बढ़ती उम्र और बीमारी के कारण वह एक्टिव पॉलिटिक्स में वापस नहीं आ पाये थे. अभी कुछ समय पहले ही सोमनाथ ने पार्टी के हालातों को लेकर चिंता व्यक्त की थी. उन्होंने लेफ्ट पार्टियों के मौजूदा हालात को लेकर प्रकाश करात को जिम्मेदार ठहराया था.
पूरी जिंदगी रहेगा अफसोस कि हम सोमनाथ को दोबारा पार्टी में नहीं ला पाये
कोलकाता. पश्चिम बंगाल में माकपा नेताओं के एक वर्ग ने लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष और दिग्गज सांसद सोमनाथ चटर्जी के निधन पर शोक जताते हुए सोमवार को इस बात पर ‘अफसोस जताया’ कि वे उन्हें पार्टी में दोबारा शामिल नहीं करा पायें. माकपा नेता ज्योति बसु के करीबी रहे चटर्जी को 2008 में माकपा ने ‘पार्टी के रुख से गंभीर रूप से समझौता करने’ को लेकर पार्टी से निष्कासित कर दिया था. माकपा के वरिष्ठ नेता नेपालदेब भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी में दोबारा शामिल होने के लिए रजामंद करने की खातिर पिछले कुछ सालों में कई नेता चटर्जी से मिले लेकिन मुद्दा सुलझ नहीं पाया.
उन्होंने कहा : हमें पूरी जिंदगी यह अफसोस रहेगा कि हम उन्हें दोबारा पार्टी में नहीं ला पायें. हम आज एक मुश्किल स्थिति में हैं और अच्छा होता अगर वह हमारे साथ होते. हमने पूर्व में उन्हें वापस लाने की पूरी कोशिश की लेकिन नाकाम रहे.
सीपीएम की केंद्रीय समिति के सदस्य सुजन चक्रवर्ती ने कहा कि पार्टी से निष्कासन के बाद भी पार्टी सदस्यों के साथ चटर्जी के संबंध पहले जैसे ही रहे. उन्होंने कहा : हमारे उनके साथ हमेशा बेहद मधुर संबंध थे. काश वह पार्टी के सदस्य बने रहते.
उनका निधन हमारे लिए एक अपूरणीय क्षति है.
वह पार्टी से ऊपर थे
सीपीएम की पश्चिम बंगाल इकाई के सचिव सूर्यकांत मिश्रा ने चटर्जी को धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक ताकतों के लिए लड़ने वाला सांसद बताया जिनके लिए सभी राजनीतिक दलों के नेताओं में प्रेम और सम्मान था.
उन्होंने कहा : पिछले कुछ सालों में वह पार्टी के संपर्क में नहीं थे लेकिन यह मायने नहीं रखता, वह पार्टी से ऊपर थे. उन्होंने संसदीय लोकतंत्र में और धर्मनिरपेक्ष एवं लोकतांत्रिक ताकतों के लिए जो भूमिका निभायी, उसे किसी एक दल के संदर्भ में नहीं देखा जा सकता.
माकपा के एक दूसरे नेता ने नाम सार्वजनिक ना करने के अनुरोध के साथ कहा कि चटर्जी को सीपीएम से निकालने का कारण पार्टी के तत्कालीन नेतृत्व का ‘अहंकार’ था.
लोकसभा सदस्य मोहम्मद सलीम, पार्टी के वरिष्ठ नेता श्यामल चक्रवर्ती और राबिन दे चटर्जी को सोमवार को अस्पताल जाकर श्रद्धांजलि देने वाले नेताओं में शामिल थे. माकपा की प्रदेश समिति ने सुबह पार्टी मुख्यालय में चटर्जी के निधन की खबर आने के बाद अपनी बैठक स्थगित कर दी. दस बार लोकसभा सदस्य रहे चटर्जी 1968 से 2008 तक सीपीएम के सदस्य थे.
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