कोलकाता : हाथी व गैंडों का गुलेल से हो रहा है शिकार

गैंडा की हत्या के आरोप में गिरफ्तार विमल नार्जिनारी व गोपाल सिंह ने पूछताछ में किया खुलासा कोलकाता : जंगली हाथी व गैंडों का शिकार बंदूक से नहीं, बल्कि गुलेल की मदद से किया जा रहा है. इस खुलासे से वन विभाग चिन्तित है. जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान के कोदयाल बस्ती में गैंडा की हत्या के […]

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गैंडा की हत्या के आरोप में गिरफ्तार विमल नार्जिनारी व गोपाल सिंह ने पूछताछ में किया खुलासा

कोलकाता : जंगली हाथी व गैंडों का शिकार बंदूक से नहीं, बल्कि गुलेल की मदद से किया जा रहा है. इस खुलासे से वन विभाग चिन्तित है. जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान के कोदयाल बस्ती में गैंडा की हत्या के आरोप में गिरफ्तार विमल नार्जिनारी व गोपाल सिंह ने पूछताछ में यह खुलासा किया है, जिसमें शिकारी ने बताया कि वे लोग हाथी और गैंडा की हत्या के लिए बंदूक का इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि अरुणांचल प्रदेश से विशेष रूप से तैयार गुलेल का प्रयोग कर रहे हैं.
साथ ही इसके लिए सिरींज की मदद ले रहे हैं. यानी सिरींज में वे रसायन यानी पेटोसियम साइनाइड भर कर गुलेल से निशान साध कर हाथी और गैंडों की आंखों पर मारते हैं. इसके लगते ही हाथी और गैंडे जमीन पर गिर जाते हैं और मर जाते हैं. इसके बाद वे जानवरों की बहुमूल्य अंगों को विदेशों में बेच देते हैं. यह रसायन चीन के तस्करों से लिया जाता है.
मालूम हो कि 5 फरवरी को गैंडे की हत्या करके उसका सिंह काट कर अलग कर दिया गया था. जगह-जगह छापेमारी कर छह लोगों को गिरफ्तार किया गया. उनमें से तीन के पास से गुलेल बरामद किये गये. पूछताछ में पता चला कि विमल और गोपाल मुख्य आरोपी हैं.
वन विभाग चिंतित
शिकारियों के नये हथियार को देख कर वन विभाग चिंतित है. उत्तर बंग वन्य प्राणी शाखा के मुख्य वनपाल उज्ज्वल घोष ने बताया कि जंगल में बंदूक लेकर जाना निषेध है और वह जल्दी से नजर में पड़ जाता है, पर शिकारी इस नये हथियार को छुपा कर आसानी से ले जा कर जंगल में शिकार कर रहे हैं. इससे पार पाने के लिए योजना बनानी होगी. चौकसी भी बढ़ानी होगी.
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