मुकुल के तीन करीबी तृणमूल में शामिल

पार्थ ने की सुपर्ण मैत्रा, कर्नल दीपांशु चौधरी व सोनाली सिंहराय के तृणमूल में शामिल होने की घोषणा कोलकाता : प्रदेश भाजपा को गैस वाला बैलून करार देते हुए तृणमूल कांग्रेस के महासचिव पार्थ चटर्जी ने साफ कहा कि बंगाल में भाजपा कोई फैक्टर नहीं है. यहां एक मात्र लहर है ममता बनर्जी की लोकप्रियता. […]

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पार्थ ने की सुपर्ण मैत्रा, कर्नल दीपांशु चौधरी व सोनाली सिंहराय के तृणमूल में शामिल होने की घोषणा

कोलकाता : प्रदेश भाजपा को गैस वाला बैलून करार देते हुए तृणमूल कांग्रेस के महासचिव पार्थ चटर्जी ने साफ कहा कि बंगाल में भाजपा कोई फैक्टर नहीं है. यहां एक मात्र लहर है ममता बनर्जी की लोकप्रियता. यही वजह है कि कागजी शेर की तरह भाजपा भले ही दहाड़े, लोग यकिन तृणमूल कांग्रेस पर ही करते हैं. यही वजह है कि जिस मुकुल को लेकर भाजपा दंभ भर रही है, उसी मुकुल के करीबी तीन लोग आज उसका साथ छोड़कर भाजपा में शामिल हो गये हैं.
अपने पूर्व घोषणा के मुताबिक पार्थ चटर्जी ने साफ कहा था कि शनिवार को तृणमूल भवन में भाजपा के दो महत्वपूर्ण लोग शामिल होंगे. अपने वादे के मुताबिक पार्थ चटर्जी ने मुकुल राय के करीबी सुपर्ण मैत्रा व कर्नल दीपांशु चौधरी के साथ बोनस के रूप में सोनाली सिंह राय को तृणमूल कांग्रेस का झंडा पकड़ाते हुए इन्हें तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने का आधिकारिक एलान किया. उल्लेखनीय है कि सुपर्ण मैत्रा सीआइआइ के पूर्व निदेशक हैं. खबर है कि उनकी गिनती मुकुल राय के करीबियों में होती थी.
हाल ही में वह मुकुल राय के भाजपा में जाने के बाद भाजपा की तरफ अपना रुझान कर रहे थे. स्थित का आंकलन करते हुए तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें अपनी पार्टी में शामिल होने का प्रस्ताव दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया. पार्थ चटर्जी ने कहा कि हम उनके अनुभव का पूरा लाभ उठायेंगे. वहीं, सेना अधिकारी के रूप में लंबे समय तक काम कर चुके कर्नल दीपांशु चौधरी भी मुकुल राय के काफी करीबी थे. इसके साथ ही वह भाजपा के संयोजक की भूमिका निभा रहे थे. वह चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार भी रह चुके हैं. उनके तृणमूल में शामिल होने पर पार्थ चटर्जी ने कहा कि दीपांशु चौधरी का अनुभव और भाजपा में उनके कामकाज के तरीकों का लाभ हम भाजपा के अगले कदम को रोकने में लगायेंगे.
इधर, बोनस के रूप में आयीं सोनाली सिंहराय मुकुल राय के राजनीतिक जीवन के मेंटर मृणाल सिंहराय की बहन हैं. मुकुल जब कांग्रेस में थे, तो उस समय मृणाल सिंहराय को मुकुल राय का राजनीतिक गुरु कहा जाता था. पार्थ चटर्जी ने कहा कि अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए मुकुल राय ने बहुत लोगों को यूज किया है. इसमें मृणाल बाबू भी हैं. ये लोग मुकुल राय के विरोध में ममता बनर्जी के विकास कार्यों से प्रभावित होकर प्रदेश के विकास में अपना योगदान देने के लिए तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए हैं. हम इनकी क्षमता का पूरा उपयोग करेंगे.
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