पांच गुना अधिक प्रवेश शुल्क वसूल रहा एक स्कूल

कोलकाता. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य के ग्रामीण व श्रमिक वर्ग के लोगों के बच्चों को शिक्षा प्रदान करने और उन्हें स्कूल लाने के लिए कई योजनाएं शुरू की है. राज्य सरकार ने छात्र-छात्राओं के लिए कन्याश्री, शिक्षाश्री व सबूज साथी जैसी योजनाएं शुरू की है ताकि समाज के सभी वर्ग के लोग शिक्षा के […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
कोलकाता. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य के ग्रामीण व श्रमिक वर्ग के लोगों के बच्चों को शिक्षा प्रदान करने और उन्हें स्कूल लाने के लिए कई योजनाएं शुरू की है. राज्य सरकार ने छात्र-छात्राओं के लिए कन्याश्री, शिक्षाश्री व सबूज साथी जैसी योजनाएं शुरू की है ताकि समाज के सभी वर्ग के लोग शिक्षा के अधिकार को प्राप्त कर सकें.

राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों में दाखिले के लिए प्रवेश शुल्क भी तय किया है, लेकिन राज्य सरकार के सभी प्रयासों को ठेंगा दिखाते हुए उत्तर 24 परगना जिले के नैहाटी थाना क्षेत्र स्थित हाजीनगर आदर्श हिंदी विद्यालय के टीचर-इन- चार्ज अपनी मनमानी कर रहे हैं और छात्रों से दाखिले के एवज में तय राशि से पांच गुना से भी अधिक प्रवेश शुल्क लिया जा रहा है. जानकारी के अनुसार, स्कूल में कक्षा 11 में कला संकाय में भरती के लिए 250 रुपये तय है, जबकि स्कूल द्वारा छात्रों से 1360 रुपये लिये जा रहे हैं. विज्ञान संकाय के लिए भी तय 295 रुपये की जगह पर 1420 रुपये वसूले जा रहे हैं.

शुल्क बढ़ाने की मांग को खारिज कर चुकी है राज्य सरकार : स्कूल प्रबंधन ने वर्ष 2011 में प्रवेश शुल्क बढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग को पत्र लिखा था, जिसे शिक्षा विभाग ने खारिज कर दिया था. साथ ही शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधन को लिखित रूप से चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर छात्रों से राज्य सरकार द्वारा तय की गयी राशि से अधिक प्रवेश शुल्क वसूला गया तो प्रधानाध्यापक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी. स्कूल के टीचर-इन-चार्ज ने शिक्षा विभाग के इस आदेश को भी नजरअंदाज कर दिया है.
पैरा शिक्षकों के वेतन के लिए अतिरिक्त शुल्क
स्कूल के टीचर-इन-चार्ज अनंत कुमार साव ने कहा कि स्कूल में नियुक्त पैरा शिक्षकों को वेतन देने के लिए छात्रों से अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा है. उन्होंने स्कूल में शिक्षकों की कमी का हवाला देते हुए कहा कि शिक्षकों की कमी के कारण स्कूल में पहले 11वीं व 12वीं कक्षा में सप्ताह में सिर्फ तीन दिन पढ़ाई होती थी. इसलिए पैरा शिक्षकों की नियुक्ति की गयी है. वहीं, आरोप है कि पैरा शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में भी पारदर्शिता नहीं बरती गयी है और टीचर-इन-चार्ज ने अपनी मरजी से स्कूल में 30 पैरा-शिक्षकों की नियुक्ति की है. इन शिक्षकों की नियुक्ति के लिए क्या कोई विज्ञापन दिया गया था या कोई परीक्षा ली गयी थी, इसका जवाब टीचर-इन-चार्ज नहीं दे पाये. जानकारी के अनुसार, स्कूल प्रबंधन द्वारा पैरा शिक्षकों को प्रत्येक महीने तीन हजार रुपये वेतन दिया जाता है. आरोप यह भी है कि इनमें भी कई लोगों को महज 1500 से 1700 रुपये ही वेतन मिल रहा है.
फीस वृद्धि से अभिभावक परेशान : हाजीनगर जूट मिल बहुल इलाका है. यहां मिल श्रमिकों की संख्या अधिक है. श्रमिकों के बच्चे इस स्कूल में पढ़ते हैं. प्रवेश शुल्क में हुई वृद्धि से जूट मिल श्रमिकों को काफी परेशानी हो रही है. पांच गुना अधिक फीस देने के लिए मजबूर हैं.
सेवानिवृत्त शिक्षकों व संचालन कमेटी ने लगाये गंभीर आरोप
छात्रों से अधिक प्रवेश शुल्क लिये जाने के संबंध में स्कूल संचालन कमेटी के अध्यक्ष नरपत सिंह बैद ने कहा कि टीचर-इन-चार्ज गैर-कानूनी तरीके से छात्रों से मनमाना फीस वसूल रहे हैं. उन्होंने प्रधानाध्यापक के इस फैसले का विरोध किया था तो टीचर-इन-चार्ज ने उनके ही खिलाफ कोर्ट में मामला कर दिया. स्कूल के टीचर-इन-चार्ज ने प्रवेश शुल्क में गड़बड़ी के साथ ही मिड डे मील के तहत मिलने वाले राशन में भी धोखाधड़ी की है और इसकी भी शिकायत उन्होंने थाने में करायी है. वहीं, स्कूल के सेवानिवृत्त शिक्षक दिनेश्वर सिंह ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा तय 250 रुपये व 295 रुपये प्रवेश शुल्क से अधिक रुपये लेना गैरकानूनी है. उन्होंने आराेप लगाते हुए कहा कि छात्रों से मिलने वाला सारा अतिरिक्त रुपया टीचर-इन-चार्ज ने अपने पास रख लिया है.
स्कूल प्रबंधन द्वारा तय राशि से अधिक प्रवेश शुल्क वसूलने की सूचना मिली है, लेकिन लिखित शिकायत नहीं मिली है. पूरे मामले की जांच की जायेगी और इस प्रकार के भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी.
राजू साहनी, स्थानीय पार्षद
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