15.1 C
Ranchi
Friday, February 23, 2024

BREAKING NEWS

Trending Tags:

Homeराज्यपश्चिम-बंगालWest Bengal : अयोध्या में राम के साथ घर में ‘लला’ की चाह

West Bengal : अयोध्या में राम के साथ घर में ‘लला’ की चाह

कोलकाता की अधिकतर गर्भवती महिलाओं की यही चाह है कि 22 जनवरी को उनके बच्चे का जन्म हो. वे बेटे में रामलला और बेटी में माता सीता की छवि देखना चाहती हैं. सोमवार को शुभ मुहूर्त में सिजेरियन डिलीवरी कराने के लिए कई प्रसूताएं रविवार को अस्पताल में भर्ती हो गयी हैं.

कोलकाता, शिव कुमार राउत : पश्चिम बंगाल में कई लोग शुभ मुहूर्त देख सिजेरियन डिलीवरी की तारीख तय करते हैं. इस वर्ष का सबसे शुभ मुहूर्त राम मंदिर (Ram Mandir) के उद्घाटन वाले दिन यानी 22 जनवरी को माना जा रहा है. इसके मद्देनजर महानगर के कई निजी अस्पतालों में इस शुभ मुहूर्त में शिशु को जन्म देने के लिए प्रसूता के परिजनों ने अपील की है. हर कोई इस दिन को यादगार बनाने में जुटा है. कोलकाता की अधिकतर गर्भवती महिलाओं की यही चाह है कि 22 जनवरी को उनके बच्चे का जन्म हो. वे बेटे में रामलला और बेटी में माता सीता की छवि देखना चाहती हैं. सूत्रों के अनुसार, कोलकाता के अस्पतालों में इस खास दिन को सिजेरियन डिलीवरी के लिए 100 से अधिक आवेदन आ चुके हैं. इसके लिए लोग सी-सेक्शन का सहारा ले रहे हैं, ताकि उसी तारीख और समय पर उनके बच्चे का जन्म हो सके. बता दें कि राम मंदिर के उद्घाटन का शुभ मुहूर्त सोमवार दोपहर 12.20 बजे का है. इसी शुभ मुहूर्त में गर्भवती महिलाओं के परिजन सिजेरियन डिलीवरी करना चाह रहे हैं.

ऐसी डिलीवरी पर बोलने से कतरा रहे चिकित्सक

सूत्रों के अनुसार, सोमवार को शुभ मुहूर्त में सिजेरियन डिलीवरी कराने के लिए कई प्रसूताएं रविवार को अस्पताल में भर्ती हो गयी हैं. पर राम मंदिर के उद्घाटन को लेकर राज्य में विरोध के स्वर भी गुंज रहे हैं. तृणमूल इसी दिन सद्भावना रैली निकाल रही है, तो भाजपा उत्सव मनाने का एलान कर चुकी है. राज्य में तनातनी के माहौल को देखते हुए महानगर के निजी अस्पतालों के चिकित्सक खुल कर इस मुद्दे पर बात नहीं कर रहे हैं. सूत्रों के अनुसार, मिंटो पार्क स्थित एक निजी अस्पताल में रविवार को शहर के एक बड़े उद्योगपति परिवार की एक प्रसूता को भर्ती कराया गया है. मुकुंदपुर एवं इएम बाइपास स्थित कुछ निजी अस्पतालों में भी सोमवार को शुभ मुहूर्त में सीजर करने का आवेदन किया गया गया.

Also Read: West Bengal : राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दिन बंगाल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राज्यपाल अलर्ट…
मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के प्रो. डॉ स्नेहमय चौधरी

आमतौर पर नॉर्मल तरीके से ही प्रसव कराना चाहिए. पर कुछ विशेष मामलों में चिकित्सकों को सिजेरियन डिलीवरी करानी पड़ती है. हाल के दिनों में सिजेरियन डिलीवरी की डिमांड बढ़ रही है. इसके जरिये लोग अपने अनुसार तय किये गये मुहूर्त पर बच्चे का जन्म करा सकते हैं. पर ऐसा करने से कई बार नवजात की सेहत पर भी असर पड़ता है. आमतौर पर प्रेग्नेंसी के 37 वें सप्ताह यानी 259 से 265 दिन के बाद कभी भी डिलीवरी करायी जा सकती है. 39वें सप्ताह यानी 273 से 279 के बाद प्रसव कराना स्वास्थ्यकर माना जाता है. डिलीवरी डेट के 21 दिन या सात दिन पहले भी प्रसव कराया जा सकता है. कई मामलों में 37वें सप्ताह या इससे कुछ पहले डिलीवरी कराये जाने से शिशु की सेहत पर बुरा असर पड़ता है. नवजात को सांस लेने में दिक्कत हो सकती है. उसे अन्य शारीरिक समस्याओं से भी जूझना पड़ सकता है.

Also Read: पश्चिम बंगाल : ममता बनर्जी 24 को पूर्व बर्दवान में करेंगी प्रशासनिक बैठक
पिछले जन्म के कर्मों से बनता है भाग्य

ज्योतिषाचार्य ओमप्रकाश चतुर्वेदी का कहना है कि चाहे कितना भी प्रयास कर लें, आप अपने बच्चे का भाग्य नहीं बदल सकते. क्योंकि पिछले जन्म में किये गये कर्मों के आधार पर ही अगले जन्म का भाग्य बनता है. ईश्वरीय इच्छा एवं मेडिकल साइंस को दरकिनार कर अपनी इच्छानुसार शुभ मुहूर्त में सिजेरियन डिलिवरी कराना अतार्किक और अवैज्ञानिक है. ईश्वर की इच्छा के खिलाफ आप कुछ भी नहीं कर सकते. ईश्वर ने जो तय कर बच्चे को धरती पर भेजा है, वह होकर ही रहेगा. आप विधि का लिखा नहीं बदल सकते. कोई बदल भी नहीं सका है.

Also Read: WB : दिलीप घोष ने ममता बनर्जी पर कसा तंज कहा, सीएम की सद्भावना रैली में कोई हिंदू नहीं होगा शामिल

You May Like

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

अन्य खबरें