कल्याण बनर्जी ने अभिषेक को बताया बेटा, 19 सांसदों के बागी तेवर पर कहा-जिन्हें जो करना है; करने दें

Kalyan Banerjee : टीएमसी और कांग्रेस पार्टी की मर्जर की अटकलों पर टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा है कि हम कांग्रेस के साथ मर्ज नहीं कर रहे हैं. पार्टी में फूट पर भी उन्होंने बात की और कहा कि जो जहां जाना चाहता है वो जाए. टीएमसी में टूट की अफवाह तेजी से फैल रही है और बागी विधायकों का कहना है कि उनके साथ अब 64 विधायक हो गए हैं.

Kalyan Banerjee : तृणमूल कांग्रेस के नेता और सांसद कल्याण बनर्जी ने 19 टीएमसी सांसदों के लोकसभा स्पीकर से मिलने पर कहा कि उन्हें जो करना है करने दें. उन्हें बीजेपी की शरण में रहना होगा. यह सब एक राजनीतिक साजिश है. उन 19 सांसदों को बीजेपी स्वीकार नहीं करेगी. कल्याण बनर्जी ने एएनआई न्यूज एजेंसी से बात करते हुए टीएमसी में हुई फूट पर बात की.

पश्चिम बंगाल में डेमोक्रेसी खत्म हो गई है

कल्याण बनर्जी ने यह आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र खत्म हो गया है. बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली जीत के बाद बीजेपी, टीएमसी के नेताओं को परेशान कर रही है. उनके साथ मारपीट हो रही है. बंगाल में अभी जो हो रहा है और जिस स्थिति का सामना हम कर रहे हैं, वैसी स्थिति का सामना किसी ने नहीं किया होगा. बंगाल के वर्तमान सीएम बदला लेने की प्रवृत्ति से काम कर रहे हैं. वे बताएं कि पिछले एक महीने में प्रदेश में क्या विकास हुआ.

अभिषेक बनर्जी मेरे बेटे जैसा है

अभिषेक बनर्जी पर हाल में कल्याण बनर्जी ने बहुत तीखी प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने कहा था कि दीदी को हम दोनों में से किसी एक को चुनना होगा. अब कल्याण बनर्जी अपने बयान पर यह कह रहे हैं कि अभिषेक मेरे बेटे जैसा है. बेटे की सभी गलतियों को माफ करना पिता का काम है. देश में डेमोक्रेसी खतरे में है. पश्चिम बंगाल में कभी ऐसी स्थिति नहीं आई जहां विपक्ष खत्म हो गया हो.

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Published by: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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