कोलकाता. कलकत्ता विश्वविद्यालय (सीयू) दो वित्तीय वर्षों में रिटर्न दाखिल नहीं करनेवाला विश्वविद्यालय बन गया है. 2020-21 और 2021-22 वित्तीय वर्षों में कर रिटर्न दाखिल नहीं किया गया है, जिसके कारण आयकर विभाग ने कलकत्ता विश्वविद्यालय पर 73 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. सीयू की वाइस चांसलर शांता दत्ता ने जानकारी दी कि आयकर विभाग ने दो वित्तीय वर्षों में रिटर्न दाखिल नहीं करने पर विश्वविद्यालय पर 73 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. हालांकि उनकी नियुक्ति जून 2023 में अंतरिम कुलपति के रूप में की गयी, लेकिन इससे पहले कोई और पदासीन था. वीसी ने कहा कि विश्वविद्यालय भारी जुर्माने के खिलाफ अपील करेगा और कर रिटर्न दाखिल न करने का कारण जानने के लिए एक समिति गठित की गयी है. राज्य द्वारा सहायता प्राप्त एक विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी ने बताया कि शैक्षणिक संस्थानों को 2015 में शुरू किये गये प्रावधान के अनुसार हर साल आयकर रिटर्न दाखिल करना होता है. वीसी ने कहा कि हमारे अकाउंट्स ऑफिसर को आइटी डिपार्टमेंट से एक पत्र मिला है, जिसमें यूनिवर्सिटी को हम पर लगाये गये भारी जुर्माने के बारे में बताया गया. दो वित्तीय वर्षों के दौरान यूनिवर्सिटी ने टैक्स रिटर्न जमा नहीं किया, जो मेरे वीसी के रूप में कार्यकाल की शुरुआत से पहले के हैं. हम टैक्स विशेषज्ञों के संपर्क में हैं. यूनिवर्सिटी शीघ्र ही उचित फोरम में जाकर आदेश पर रोक लगाने की मांग करेगी. यह पता लगाने के लिए एक कमेटी बनायी गयी है कि रिटर्न क्यों दाखिल नहीं किया गया. वीसी ने कहा कि सीयू ने 2022-23 वित्तीय वर्ष के लिए टैक्स रिटर्न दाखिल कर दिया है और 2023-24 के लिए रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया में है. राज्य द्वारा सहायता प्राप्त एक यूनिवर्सिटी के वित्त अधिकारी ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने 2015 में एक प्रावधान पेश किया था, जिसके तहत सभी शैक्षणिक संस्थानों को सालाना आइटी रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है. रिटर्न में, संस्थानों को उन्हें मिले विभिन्न अनुदानों का विवरण और जिस उद्देश्य के लिए पैसा खर्च किया गया है, उसका विवरण प्रस्तुत करना होगा.
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