Lok Sabha Election 2024 : डायमंड हार्बर में कभी कम्युनिस्टों का था दबदबा, फिर तृणमूल ने जमाया कब्जा

Lok Sabha Election 2024 : भाजपा की ओर से डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के लिए उम्मीदवार की घोषणा आखिरकार कर दी गयी. तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ भाजपा ने अभिजीत दास (बॉबी) को अपना उम्मीदवार बनाया है.

By Shinki Singh | April 17, 2024 1:45 PM

Lok Sabha Election 2024 : पश्चिम बंगाल के डायमंड हार्बर (Diamond Harbor) लोकसभा सीट पर यूं तो कम्युनिस्टों का ही दबदबा रहा है. लेकिन जैसे-जैसे राज्य में माकपा कमजोर होती गयी, इस सीट पर भी लाल का असर कम होता गया. सोमेन मित्रा के बाद अभिषेक बनर्जी ने जब से सीट का प्रतिनिधित्व करने आए, तब से इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस का ही जादू चल रहा है. यह संसदीय सीट इस मायने में भी इस समय चर्चा में है, क्योंकि यहां से तृणमूल कांग्रेस के युवराज अभिषेक बनर्जी चुनाव लड़ते रहे हैं. इस बार भी अभिषेक यहां से मैदान में हैं. भाजपा ने यहां से अभिजीत दास को उम्मीदवार बनाया है. यहां अल्पसंख्यक वोट पर नजर गड़ते हुए कई पार्टियों ने भी अपने उम्मीदवार उतारे हैं.

सोमेन मित्रा ने 53.66 फीसदी वोट हासिल कर जीता था चुनाव

इसमें आइएसएफ ने मंजू लस्कर, एआइएमआइएम ने मो. रबीबुल शेख भी मैदान में हैं. शुरुआती दौर में यह सीट हमेशा से ही माकपा के कब्जे में रहा है. 1967 से 2004 तक इस सीट पर माकपा को कोई हरा नहीं सका था. 1962 से 1980 तक यहां से ज्योतिर्मय बसु चुनाव जीतते रहे. 1982 से 1991 तक माकपा के अमल दत्ता यहां से चुनाव जीते. 1996 से 2004 तक माकपा के टिकट पर शमिक लाहिड़ी यहां से सांसद चुने गए थे. 2009 में इस सीट से माकपा का जादू खत्म हो गया. जब तृणमूल ने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष रहे सोमेन मित्रा को यहां से मैदान में उतारा. सोमेन मित्रा ने 53.66 फीसदी वोट हासिल कर चुनाव जीता था.

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2014 में डायमंड हार्बर से ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने लड़ा था चुनाव

इस चुनाव में माकपा के शमिक लाहिड़ी दूसरे स्थान पर आ गए. उन्हें 39.17 फीसदी वोट मिला. वहीं भाजपा के अभिजीत दास (बॉबी) को महज 2.88 फीसदी ही वोट मिल पाया था. बॉबी इस बार भी भाजपा के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं. बाकी पार्टियों एक फीसदी वोट पाने में भी सफल नहीं रही थी. 2014 में इस सीट से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने चुनाव लड़ा.अभिषेक बनर्जी को 40.31 फीसदी वोट मिला. पिछली बार की तुलना में तृणमूल का वोट भले ही कम हुआ था, लेकिन बनर्जी चुनाव जीतने में सफल रहे थे.

2019 में अभिषेक बनर्जी यहां काफी मजबूत दिखे

इस चुनाव में माकपा के डॉ. अबु हसनत दूसरे स्थान पर रहे. उन्हें 34.66 फीसदी वोट मिला था. भाजपा के अभिजीत दास (बॉबी) ने पिछली बार की तुलना में अपना वोट बढ़ाया. उन्हें 15.92 फीसदी वोट मिला. भाजपा का वोट 12.36 फीसदी बढ़ गया. 2019 में अभिषेक बनर्जी यहां काफी मजबूत दिखे. उन्हें 56.15 फीसदी वोट मिला. तृणमूल का वोट 15.82 फीसदी बढ़ गया. इस चुनाव में भाजपा दूसरे स्थान पर पहुंच गयी. भाजपा के निलांजन राय को 33.39 फीसदी वोट मिला. भाजपा का वोट भी 17.46 फीसदी बढ़ गया. माकपा यहां तीसरे स्थान पर आ गयी.

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2004 के चुनाव पर डालें एक नजर


माकपा के फुआद हलीम को 6.67 फीसदी वोट ही मिल पाया था. वहीं 2004 के चुनाव पर नजर डालें तो माकपा के शमिक लाहिड़ी को 51.60 फीसदी वोट मिला था. तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय दूसरे स्थान पर थे. उन्हें 33.20 फीसदी वोट ही मिला था. वहीं 1999 में शमिक लाहिड़ी को 47.10 फीसदी व तृणमूल के सरदार अमजद अली को 39.27 फीसदी वोट मिला था. लाहिड़ी इस सीट से चार बार चुने गए थे. इस बार भी तृणमूल का मुकाबला भाजपा से होने की उम्मीद है.

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आइएसएफ विधायक ने भी अभिषेक को दी चुनौती

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी को इस बार उनके संसदीय क्षेत्र डायमंड हार्बर सीट से बड़ी चुनौती मिलने वाली है. 2021 के विधानसभा चुनाव में मुस्लिम बहुल इलाके से जीत दर्ज करने वाले इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आइएसएफ) के नौशाद सिद्दीकी ने इस लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा की, लेकिन बाद में आइएसएफ ने यहां से मंजू लस्कर को मैदान में उतारा है. नौशाद ने ऐसे ही चुनौती नहीं, मुस्लिम तबके में वह खासा असर रखते हैं. दक्षिण 24 परगना जिले की डायमंड हार्बर सीट से 2014 से अभिषेक बनर्जी सांसद चुने जाते रहे हैं. ये मुस्लिम बहुल इलाका है जहां तृणमूल कांग्रेस का हमेशा से वर्चस्व रहा है. बावजूद इसके 2021 के विधानसभा चुनावों में सिद्दीकी ने जिले की भांगड़ सीट से चुनाव जीतकर सत्ताधारी टीएमसी को तगड़ा झटका दिया था.

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सही से चुनाव हुआ, तो अभिषेक की जमानत होगी जब्त

भाजपा की ओर से डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के लिए उम्मीदवार की घोषणा आखिरकार कर दी गयी. तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ भाजपा ने अभिजीत दास (बॉबी) को अपना उम्मीदवार बनाया है. डायमंड हार्बर सीट से भाजपा की ओर से उम्मीदवार की घोषणा अब तक न किये जाने से तृणमूल की ओर से कहा जाने लगा था कि भाजपा क्या इस लोकसभा क्षेत्र में डर गयी है.

भाजपा उम्मीदवार की चुनौती

आखिरकार अभिजीत दास को भाजपा ने यहां से खड़ा किया. उम्मीदवार बनाये जाने के बाद अभिजीत दास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि अभिषेक बनर्जी के खिलाफ चुनावी लड़ाई को वह कठिन नहीं मानते. अगर सही तरीके से शांतिपूर्ण चुनाव होता है तो अभिषेक की जमानत जब्त हो जायेगी. डायमंड हार्बर में लोकतंत्र के पक्ष में लड़ाई होगी. अब तक डायमंड हार्बर में लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव नहीं हुआ. 2018 में नामांकन जमा ही नहीं करने दिया गया था. अभिषेक बनर्जी ने डायमंड हार्बर के लोकतांत्रिक माहौल को नष्ट कर दिया है. अब यदि चुनावी सही तरीके से होता है तो अभिषेक की जमानत जब्त हो जायेगी.

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कभी भाजपा के जिलाध्यक्ष थे अभिजीत
उल्लेखनीय है कि दक्षिण 24 परगना में सभी अभिजीत दास को ‘बॉबीदा’ के तौर पर जानते हैं. कभी अभिजीत भाजपा के जिलाध्यक्ष भी थे. भाजपा के साथ उनका लंबे अरसे से नाता है. हालांकि वर्तमान में वह किसी पद पर नहीं हैं. कुछ वर्ष पहले उन पर हमला भी हुआ था. उन्हें विशेष सुरक्षा भी हासिल है. इलाके में उनका प्रभुत्व भी है.

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अंग्रेजों ने बसाया था डायमंड हार्बर, पहले नाम था हाजीपुर

दक्षिण 24 परगना स्थित डायमंड हार्बर संसदीय क्षेत्र मूलतः समुद्री इलाकों में बसा हुआ है. पहले हाजीपुर के नाम से जाना जाने वाले डायमंड हार्बर को अंग्रेजों ने बसाया था. अंग्रेज डायमंड हार्बर के इलाके से समुद्री तट के माध्यम से व्यापार किया करते थे. डायमंड हार्बर ग्रामीण इलाका है और यहां करीब 85.39 फीसदी आबादी ग्रामीण है. यहां देउलपोटा एवं हरिनारायणपुर में पुरातात्विक खुदाई से 2,000 साल से भी पहले मानव निवास के अवशेष मिले हैं. इस कारण इस शहर का पुरातात्विक महत्व भी है. इस इलाके में अल्पसंख्यक और अनुसूजित जाति का बाहुल्य है. डायमंड हार्बर के सुंदर दृश्य, नदी का समुद्र से मिलन और प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों को आकर्षित करता है. डायमंड हार्बर के पास फ्रेंच इलैंड, हेडलैंड पॉइंट और डायमंड बीच जैसे दर्शनीय स्थल हैं.

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जब अभिषेक ने दिया शाह को चुनाव लड़ने का ऑफर

पिछले कुछ दिनों पहले आसनसोल व डायमंड हार्बर से भाजपा द्वारा उम्मीदवार नहीं दिए जाने को लेकर अभिषेक बनर्जी ने कटाक्ष करते हुए कहा था कि यदि भाजपा के पास उम्मीदवार नहीं है तो गृह मंत्री अमित शाह यहां से चुनाव लड़ सकते हैं. राज्यपाल से मिलने के बाद राजभवन के सामने भी बनर्जी ने कहा था कि मुझे लगता है कि डायमंड हार्बर के लिए भाजपा के लिए सबसे अच्छे उम्मीदवार इडी या सीबीआइ के निदेशक होंगे. अगर गृह मंत्री भी खुद यहां से चुनाव लड़ना चाहते हैं तो उनका भी स्वागत है. बता दें कि मंगलवार को ही भाजपा ने यहां से अभिजीत दास उर्फ बॉबी को मैदान से उतारा है. अभिषेक हमेशा ही यहां से उम्मीदवार नहीं देने को लेकर माखौल तो उड़ाया ही चुनौती भी देते रहे हैं. वह कहते रहे हैं कि भाजपा यहां से एक उम्मीदवार तक नहीं खोज पा रही है. इससे पता चलता है कि उसकी हालत कितनी खराब हो गयी है. अभिषेक ने कहा, ‘यह स्पष्ट है, वे घबरा गए हैं. आप (भाजपा) हमेशा डायमंड हार्बर को गाली देंगे, लेकिन इसके लिए उम्मीदवार तक नहीं ढूंढ पाएंगे.’

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अभिषेक बनर्जी : लोकप्रियता और विवादों के बीच का सफर

तृणमूल कांग्रेस के महासचिव तथा डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी को आज बंगाल में दूसरा सर्वाधिक प्रभावशाली व्यक्ति कहा जाये तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बाद राज्य में लोकप्रियता और प्रभाव की दृष्टि से निर्विवाद रूप से अभिषेक बनर्जी ही आते हैं.अभिषेक बनर्जी के डायमंड हार्बर से चुनाव लड़ने की वजह से यह लोकसभा क्षेत्र राज्य की राजनीति में काफी महत्वपूर्ण भी हो जाता है. 2011 में तृणमूल कांग्रेस में औपचारिक तौर पर शामिल होने के बाद ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी 2014 में पहली बार डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र से बतौर तृणमूल उम्मीदवार खड़े हुए थे और पांच लाख से अधिक वोट हासिल करके उन्होंने माकपा उम्मीदवार को परास्त किया था.

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उस वक्त सांसद बनने वाले वह सबसे युवा नेता बने थे. सफलता की इबारत उन्होंने 2019 में भी लिखी और करीब आठ लाख वोट हासिल करके दूसरे स्थान पर रहे भाजपा उम्मीदवार को हराया. हालांकि इस बीच राज्य में अभिषेक बनर्जी का कद काफी बढ़ गया. तृणमूल कांग्रेस में वह ममता बनर्जी के बाद सर्वाधिक प्रभावशाली नेता बन गये. पार्टी के भीतर जहां अभिषेक बनर्जी के करीबियों की तादाद बढ़ने लगी वहीं उनसे नाखुश होने वाले भी कम नहीं थे. पार्टी के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी ने अभिषेक बनर्जी से दूरियां बढ़ने के बाद पार्टी छोड़ दी और तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गये. अभिषेक बनर्जी ने पार्टी के कई कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया. ‘जनज्वार’ कार्यक्रम के तहत उन्होंने समूचे बंगाल जनसंपर्क बढ़ाया और संगठन को मजबूत किया.

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अभिषेक बनर्जी के साथ कई विवाद भी जुड़े

हालांकि अभिषेक बनर्जी के साथ कई विवाद भी जुड़े हैं. कोयला तस्करी मामले में केंद्रीय एजेंसियों की ओर से न केवल अभिषेक बनर्जी बल्कि उनकी पत्नी रुजिरा बनर्जी से भी पूछताछ की गयी है. रुजिरा की बहन के साथ भी केंद्रीय एजेंसियों ने पूछताछ की है. इधर शिक्षक नियुक्ति घोटाले में गिरफ्तार आरोपी, सुजय भद्र (कालीघाटेर काकू) की कंपनी भी जांच के दायरे में है. इसी कंपनी के निदेशक अभिषेक बनर्जी भी थे. इस मामले की जांच के तहत अभिषेक बनर्जी से भी पूछताछ की गयी है. आरोप यह भी लगा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्रीय जांच एजेंसियों से अभिषेक बनर्जी को राहत पहुंचाने के लिए भाजपा के साथ गुप्त समझौता भी किया है. विपक्षी दलों का यह भी आरोप है कि डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र पर राज्य सरकार की ओर से विशेष ध्यान दिया जाता है. जबकि राज्य में बाकी 41 लोकसभा क्षेत्र और भी हैं.
अभिषेक बनर्जी को सांगठनिक तौर पर भी बेहद दक्ष माना जाता है. दूसरी पार्टियों के नेताओं को तृणमूल के साथ लाने के लिए वह बेहद सक्रिय रहते हैं.
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डायमंड हार्बर में 07 विधानसभा क्षेत्र

  • डायमंड हार्बर तृणमूल पन्नालाल हालदार
  • फलता तृणमूल शंकर कुमार नस्कर
  • सातगाछिया तृणमूल मोहन चंद्र नस्कर
  • विष्णुपुर तृणमूल दिलीप मंडल
  • महेशतला तृणमूल दुलाल चंद्र दास
  • बजबज तृणमूल अशोक कुमार देब
  • मेटियाबुर्ज तृणमूल अब्दुल खालेक मोल्ला

मतदाताओं के आंकड़े

  • कुल मतदाता 1878690
  • पुरुष मतदाता 953571
  • महिला मतदाता 925047
  • थर्ड जेंडर 000072

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