ऑटो, टोटो या अन्य गाड़ी से स्कूल जानेवाले बच्चों के गार्जियंस को देना होगा अंडरटेकिंग

स्कूल बस और पूलकार को लेकर स्कूलों का रजिस्टर मेंटेन करना, बच्चे को घर के पास से पिकअप करके स्कूल के बाहर छोड़ने और फिर घर तक छोड़ने की पूरी निगरानी की जिम्मेदारी स्कूल की, पूलकार और स्कूल बसों के सारे कागजात अपडेट रखने का दायित्व भी स्कूल को निभाना होगा.

आसनसोल.

स्कूल बस और पूलकार को लेकर स्कूलों का रजिस्टर मेंटेन करना, बच्चे को घर के पास से पिकअप करके स्कूल के बाहर छोड़ने और फिर घर तक छोड़ने की पूरी निगरानी की जिम्मेदारी स्कूल की, पूलकार और स्कूल बसों के सारे कागजात अपडेट रखने का दायित्व भी स्कूल को निभाना होगा. जो अभिभावक पूलकार या स्कूल बस के बजाय ऑटो, टोटो या अन्य वाहन से अपने बच्चे को स्कूल भेजते हैं, उन्हें एक अंडरटेकिंग देना होगा कि स्कूल आने-जाने में ट्रांसपोर्टिंग के दौरान यदि कोई हादसा होता है, तो उसकी जिम्मेदारी अभिभावक की होगी. इन सभी नियमों के साथ स्कूल बस व पूलकार लेकर परिवहन विभाग के एडवाइजरी को पूर्णरूप से अमल में लाने को लेकर पुलिस उपायुक्त (ट्रैफिक) ने गुरुवार को जिला के सभी स्कूलों, शिक्षा विभाग, ट्रांस्पोर्टरों के साथ डीएम ऑफिस के सभागार में बैठक की. इसमें अतिरिक्त जिलाधिकारी (जनरल) सुहाशिनी. ई भी मौजूद रहीं. गौरतलब है कि पश्चिम बर्दवान जिला में कुल 1555 सरकारी प्राइमरी स्कूल, 526 सरकारी हाइस्कूल और 163 निजी स्कूल हैं. इन स्कूलों में बच्चे विभिन्न माध्यमों से पहुंचते हैं. सरकारी प्राइमरी स्कूलों में तो बच्चे पैदल ही आ जाते हैं, सरकारी हाइस्कूलों में बच्चे साइकिल या पब्लिक ट्रांसपोर्ट के किसी माध्यम से आ जाते हैं. निजी स्कूलों में बच्चों के लिए स्कूल बस, पूलकार या अन्य ट्रांसपोर्ट व्यवस्था की सुविधा होती है. पुलिस उपायुक्त (ट्रैफिक) श्री सतीश ने कहा कि स्कूल आने-जाने के दौरान बच्चों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा और इसे ही नजरअंदाज किया जा रहा है. इसपर कड़ाई से पालन करने का निर्णय लिया गया है, ताकि स्कूल के बाहर भी हर बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके. जिसे लेकर ट्रैफिक विभाग मुस्तैदी से अपना काम कर रही है और बाकियों को भी अपना कार्य करने के प्रति जिम्मेदार बना रही है. जिसे लेकर ही गुरुवार को बैठक की गयी.

“जिला में स्कूल रोड सेफ्टी कमेटी का गठन होगा, जिसमें स्कूलों के प्राचार्य, छात्र, अभिभावक और ट्रांसपोर्टर शामिल होंगे. परिवहन विभाग की एडवाइजरी का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी निगरानी कमेटी के सदस्य करेंगे. इससे स्कूल आते-जाते समय विद्यार्थियों की सुरक्षा मजबूत होगी. जो अभिभावक ऑटो, टोटो या अन्य वाहन से अपने बच्चे को स्कूल भेजेंगे, उन्हें स्कूल को एक अंडरटेकिंग देनी होगी कि ट्रांसपोर्ट की पूरी जिम्मेदारी उनकी है.”

पीवीजी सतीश

, डीसीपी-ट्रैफिक, एडीपीसी

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By AMIT KUMAR

AMIT KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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