बीरभूम. जिला प्रशासन ने बाल विवाह को जड़ से खत्म करने को लेकर कई महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है. बाल विवाह के मामले में बीरभूम राज्य में शीर्ष पर है. इसे लेकर हुई बैठक में जिलाधिकारी बिधान रॉय ने कई कार्यक्रमों की घोषणा की है. इसके तहत अगले वर्ष 27 मार्च को जिले के सभी स्कूलों के छात्र एक निश्चित समय पर नाटक का मंचन करेंगे. यह बाल विवाह रोकने के लिए एक सामाजिक हथियार बन कर सामने आयेगा. सूत्रों के मुताबिक पिछले एक वर्ष में 177 बाल विवाह प्रशासन ने रोका है. जिसमें रामपुरहाट में ही 150 शादियां रोकी गयीं. अन्य जगह 27 ऐसे मामले आए. जिले में 5875 किशोरियों के गर्भवती होने की सूचना है. जिनमें से 5680 की शादी की कोई जानकारी नहीं मिल पायी है. जिलाधिकारी ने स्थिति को बदलने के लिए चार मंत्र दिये. बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए माता-पिता को बच्चों के साथ समय बिताना चाहिए, बच्चे परिजनों के दोस्त बन जाए, पारिवारिक अनुशासन विकसित किया जाना चाहिए व छात्रों से लेकर अभिभावकों तक एक सामाजिक आंदोलन विकसित किया जाना चाहिए. जिलाधिकारी ने कहा कि बाल विवाह बंद करने के नारे को अंतिम रूप दिया जाता है, तो इसे आधिकारिक रूप से सभी कार्यक्रमों में प्रसारित किया जाएगा. बैठक में नाटककार और कल्चर फोर्स के प्रमुख उज्ज्वल मुखोपाध्याय उपस्थित थे. उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन के निर्देश पर कन्याश्री टीम 27 मार्च को दोपहर 1:30 बजे उच्च प्राथमिक से लेकर हाई स्कूल तक हर जगह नाटक का मंचन करेगी. नाटक में हमारा नारा, एक साथ हजारों आवाज में बाल विवाह खत्म करो को लेकर होगा.
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