जिला शासक शशांक सेठी ने कहा उद्योगपतियों ने ली जिम्मेदारी
पर्यावरण की रक्षा, सिंचाई व्यवस्था और भू-जल स्तर को बढ़ाने के लिए नदियों के पुनरुद्धार की पहल
सिंहारन नदी निगरानी कमिटी का गठन, महकमा शासक ने निभाई अहम भूमिका
आसनसोल : इलाके में सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने, भू-जल जल स्तर को बढ़ाने और पर्यावरण की रक्षा को लेकर जिला शासक शशांक सेठी की पहल पर जिले में लुप्त होती जा रही नदियों के पुनरुद्धार का कार्य युद्धस्तर पर आरम्भ किया गया. जामुड़िया प्रखण्ड से निकलने वाली जिले के सबसे प्राचीन नदियों में से एक सिंहारन नदी की दयनीय हालत को सुधारने को लेकर कार्य आरम्भ किया गया है.
जिला शासक श्री सेठी ने बताया कि सिंहारन नदी के पुनरुद्धार का कार्य समाप्त होते ही आसनसोल शहर में बहने वाली नुनिया और गाड़ूयी नदी का पुनरुद्धार का कार्य आरंभ किया जाएगा. नदियों का बहाव निरंतर जारी रहे, इसके लिए इन नदियों से जुड़ने वाली प्रमुख नालों (जोड़) की भी सफाई बड़े पैमाने पर कराई जाएगी.
क्या है सिंघारन नदी का इतिहास
अंग्रेजो के शासनकाल से पूर्व जामुड़िया इलाके में राजा सिंहबाहु का राजत्व था. यह इलाका घने जंगलों से घिरा होने और यहां के जंगल में सिंह (शेर) होने के कारण इलाके का नाम सिंहअरण्य पड़ा था. इलाके के नाम पर ही यहां से बहने वाली नदी का नाम सिंहारन पड़ा. प्राचीन काल में गांवों का विकास नदी किनारे ही होता था. सिंघारन नदी के किनारे भी आबादी बसी. यहां मुख्य रूप से आदिवासी, बाउरी, केवट, बागदी, डोम आदि यहां के मूल निवासी थे. भौगोलिक नक्शे में जामुड़िया काफी ऊंचाई पर है. जिससे पूरे इलाके का पानी बहकर इसी नदी में ही आकर मिलती है. एकरा श्मशान के पास स्थित एक झरने से निकलने वाला पानी जोड़ (नाला) के माध्यम से इस नदी में आकर मिलती है. सिंघारन नदी की उत्पत्ति जामुड़िया के बागडीहा, ननडी इलाके से हुई है. इलाके की सभी जगहों के पानी को अपने में समेटकर यह नदी अंडाल प्रखण्ड होकर दामोदर में जाकर मिलती है.
नदी के अस्तित्व पर खतरा
जामुड़िया क्षेत्र औद्योगिक इलाके के रूप में विकसित होने के बाद से इस नदी के अस्तित्व पर खतरा छा गया. यह नदी औद्योगिक क्षेत्र के बीच से होकर गुजरने के कारण उद्योगों से निकलने वाला सारा कचरा नदी के किनारे ही फेंका जाने लगा. जिससे यह नदी दिन प्रतिदिन सिकुड़ती गयी. जिला शासक श्री सेठी ने इस मुद्दे पर पहल की और कार्य का दायित्व आसनसोल सदर के महकमा शासक देवजीत गांगुली को दिया. श्री गांगुली ने जामुड़िया चेम्बर ऑफ कॉमर्स के सदस्यों के साथ बैठक की और उनके सहयोग से नदी के पुनरुद्धार का कार्य आरंभ किया.
उद्योगों ने अपने सीएसआर फंड से आरम्भ किया कार्य
जामुड़िया चेम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष अजय खेतान ने बताया कि महकमा शासक के साथ बैठक के बाद इलाके के उद्योगपतियों को लेकर बैठक की गई. इलाके के सभी उद्योगों को नदी की सफाई का दायित्व दिया गया. गगन फेरोटेक, सुपर स्मेल्टर्स लिमिटेड, श्याम सेल पावर लिमिटेड, शिवम धातु उद्योग प्राइवेट लिमिटेड, मान स्टील प्राइवेट लिमिटेड, आरएआईसी इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, राजश्री आयरन एंड स्टील प्राइवेट लिमिटेड ने अपने-अपने सीएसआर फंड से नदी के किनारे जमा कचरा को हटाया. नदी का चार किलोमीटर इलाके से दोनों ओर का कचरा हटाकर नदी की चौड़ाई बढ़ा दी गयी है. यह सारा कचरा परित्यक्त कोयला खदान में डाल दिया गया. कुछ जगहों पर नदी किनारे दीवार भी बनायी जायेगी. इसके साथ ही नदी किनारे मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए पौधरोपण किया जाएगा और बैठने के लिए सीमेंट का बेंच बनाया जाएगा.
नदी की रखवाली को लेकर कमिटी का गठन
महकमा शासक श्री गांगुली ने जिला शासक के निर्देश पर सिंहारन नदी निगरानी कमेटी का गठन किया किया. जिसमें स्थानीय बीडीओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी, स्थानीय थाना के पुलिस अधिकारी, जामुड़िया चेम्बर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधि शामिल हैं. श्री गांगुली ने कहा कि कमेटी के सदस्य समय-समय पर नदी का निरीक्षण करेंगे. यदि बहाव की निरंतरता में कोई भी बाधा आती है तो उसे तत्काल दूर करने की दिशा में कार्य करेंगे.
आसनसोल में बाढ़ की समस्या समाप्त होगी
जिला शासक श्री सेठी ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में नदी उसकी सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संपदा है. इसकी रक्षा करने की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार या प्रशासन की नहीं है. यह जिम्मेदारी सबकी है. नदी जीवनदायी है और विनाश का प्रतीक भी है. सिंहारन नदी के तर्ज पर आसनसोल में बहने वाली नुनिया और गाड़ूयी नदी के पुनरुद्धार का कार्य जल्द आरम्भ किया जाएगा. इनके पुनरुद्धार होने से बरसात के दिनों में निचले क्षेत्र में प्रतिवर्ष उत्पन्न होने वाली बाढ़ की समस्या समाप्त हो जाएगी. इसके लिए लोगों को भी जागरूक होना होगा.
